हर सुबह करीब पांच बजे दिल्ली और आसपास के इलाकों से पक्षी प्रेमी लोधी गार्डन पहुंचते हैं. उनकी निगाहें एक सेमल (सिल्क कॉटन) के पेड़ में बने एक घोंसले पर टिकी रहती हैं.
दिल्ली के लोधी गार्डन में इन दिनों प्रकृति का एक ऐसा अनोखा खेल देखने को मिल रहा है, जिसने पक्षी प्रेमियों, फोटोग्राफरों और पक्षी-विज्ञानियों को हैरान कर दिया है. जंगलों की गहराइयों में प्रकृति ऐसे अनगिनत रहस्य रचती होगी, जिनका इंसानी दुनिया को कभी पता भी नहीं चलता. लेकिन कभी-कभी ऐसे दुर्लभ संयोग शहरों के बीच भी सामने आ जाते हैं.
हर सुबह करीब पांच बजे दिल्ली और आसपास के इलाकों से पक्षी प्रेमी लोधी गार्डन पहुंचते हैं. उनकी निगाहें एक सेमल (सिल्क कॉटन) के पेड़ में बने एक घोंसले पर टिकी रहती हैं. इस घोंसले में एक मादा भारतीय धूसर धनेश (इंडियन ग्रे हॉर्नबिल) अपने बच्चों को पाल रही है.
हॉर्नबिल पक्षियों में प्रजनन के दौरान एक अनोखी प्रक्रिया होती है. मादा घोंसले के भीतर मिट्टी से खुद को लगभग पूरी तरह बंद कर लेती है और केवल एक छोटी-सी दरार खुली छोड़ती है. इसी संकरी जगह से नर हॉर्नबिल उसे और उसके बच्चों को भोजन पहुंचाता है. इस दौरान मादा और उसके बच्चों का जीवन पूरी तरह नर पर निर्भर होता है.
कहानी यहां तक बिल्कुल सामान्य थी. लेकिन फिर एक ऐसा मोड़ आया जिसने सभी को चौंका दिया. एक ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल इस घोंसले के पास पहुंची और उसने मादा भारतीय धूसर धनेश तथा उसके बच्चों को खाना खिलाना शुरू कर दिया.
इस घटना को और भी रहस्यमय बनाने वाली दो बातें हैं. पहली, ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल आमतौर पर हिमालय की तराई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है और दिल्ली में इसका दिखना बेहद दुर्लभ है. दूसरी, यह पक्षी नर नहीं बल्कि मादा है. ऐसे में सवाल उठता है कि एक मादा हॉर्नबिल दूसरी प्रजाति की मादा और उसके बच्चों की देखभाल क्यों कर रही है?
ये सवाल पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं दोनों को उलझन में डाल रहे हैं.
हर सुबह यहां आने वाले पक्षी-फोटोग्राफर निखिल देवासर कहते हैं, “हम समझ नहीं पा रहे हैं कि जिस पक्षी को देखने के लिए हमें कुमाऊं और गढ़वाल की तराई तक जाना पड़ता था, वह दिल्ली कैसे पहुंच गया. अब पता चला है कि दिल्ली में ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल की दो मादाएं हैं- एक यहां लोधी गार्डन में और दूसरी जामिया इलाके में देखी गई है.”
उनका मानना है कि संभवतः किसी फार्महाउस में पाला गया यह पक्षी किसी तरह वहां से निकलकर आजाद हो गया होगा.
लेकिन उससे भी अधिक चौंकाने वाली बात उसका व्यवहार है. पहले दिन से ही यह हॉर्नबिल घोंसले में जामुन, करी पत्ते, अंडे, घोंघे और कई तरह का भोजन लेकर आ रही है. हालांकि मादा ग्रे हॉर्नबिल ने उसकी लाई हर चीज स्वीकार नहीं की, लेकिन उसके द्वारा लाए गए भोजन का बड़ा हिस्सा उसके और बच्चों के काम आया.
पिछले शुक्रवार को तो एक और अद्भुत दृश्य देखने को मिला. इस हॉर्नबिल ने एक छोटे पक्षी के बच्चे को पकड़कर घोंसले तक पहुंचाया और काफी मशक्कत के बाद उसे भीतर डाल दिया. वन्यजीव फोटोग्राफर विजय बेदी ने इस पूरे दृश्य को कैमरे में कैद किया.

बेदी कहते हैं, “यह दो अलग-अलग हॉर्नबिल प्रजातियों के बीच देखने को मिला बेहद असाधारण और अविश्वसनीय व्यवहार है. अगर कोई बाघिन तेंदुए के बच्चों के लिए खाना लेकर आए तो वह भी बड़ी खबर होगी. लेकिन यहां जो हमने देखा, वह शायद जीवन में एक बार ही देखने को मिलता है. मैंने अपनी आंखों से उसे एक पूरा चूजा घोंसले के भीतर पहुंचाते देखा.”
इस कहानी की शुरुआत 12 मई को हुई थी, जब दिल्ली की सेवानिवृत्त स्कूल प्रिंसिपल और पक्षी प्रेमी अनुराधा माथुर ने इस घोंसले के पास एक ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल को दो नर भारतीय धूसर धनेशों के साथ देखा. उन्होंने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया और पक्षी प्रेमियों के व्हाट्सऐप समूहों में साझा की.
हंसते हुए अनुराधा कहती हैं, “जिस कैमरे से मैंने वह तस्वीर ली थी, वह अब खराब हो चुका है. लेकिन पक्षियों की दुनिया में एक नई कहानी जरूर सामने आ गई है.”
अब मादा भारतीय धूसर धनेश घोंसले से बाहर निकल चुकी है, लेकिन उसके बच्चों को बड़ा होने और बाहर आने में अभी समय लगेगा. करीब 30 वर्षों से पक्षियों के व्यवहार का अध्ययन कर रहीं शैला छाबड़ा बताती हैं कि यह ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल इन बच्चों की देखभाल ऐसे कर रही है मानो वे उसके अपने बच्चे हों.
वह कहती हैं, “यह पक्षी इतनी अधिकारपूर्ण हो गई है कि उसने नर ग्रे हॉर्नबिल को भी घोंसले के पास आने से रोकना शुरू कर दिया है और उसका पीछा करके भगा देती है.”
यहीं से इस कहानी का रहस्य और गहरा हो जाता है. पक्षी प्रेमियों के बीच एक आशंका भी चर्चा का विषय बन गई है. आखिर जब असली मां घोंसले से बाहर आ चुकी है और पूरा ग्रे हॉर्नबिल परिवार बच्चों को भोजन दे सकता है, तब भी यह पाइड हॉर्नबिल वहां क्यों बनी हुई है?
क्या वह अब तक सिर्फ भोजन का इंतजार कर रही थी? क्या बच्चों के घोंसले से बाहर आने पर वह उनके माता-पिता को भगा सकती है? या फिर कहीं वह उन्हीं बच्चों का शिकार तो नहीं कर लेगी?
शैला छाबड़ा कहती हैं, “अभी कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता. पंजाब में ऐसी घटना कम-से-कम एक बार पहले भी दर्ज की जा चुकी है. हम जानते हैं कि ये उसके अपने बच्चे नहीं हैं. कोई भी नहीं चाहता कि यह बड़ा पक्षी इन मासूम चूजों को नुकसान पहुंचाए. लेकिन प्रकृति अपने नियमों से चलती है और हम उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते. इस कहानी का अंत जानने के लिए हमें इंतजार करना होगा.”
फिलहाल लोधी गार्डन का यह घोंसला दिल्ली के सबसे दिलचस्प प्राकृतिक रहस्यों में बदल चुका है, जहां हर सुबह लोग एक ऐसी कहानी का अगला अध्याय देखने पहुंच रहे हैं, जिसका अंत अभी किसी को नहीं मालूम.
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