उत्तराखंड में चुनाव चमोली आपदा के ठीक एक साल बाद हो रहे हैं. भूस्खलन, उफनती नदियां, जल संकट और बर्बाद होते जंगल जिन पर सामुदायिक जीवन और मवेशियों का चारा निर्भर है. ये सवाल दलबदल, तोड़फोड़ और लूटखसोट की राजनीति में कहीं खो गए हैं.