यह पहली ऐसी घटना है, जिसमें चुनाव आयोग के एप का इस्तेमाल कर मतादाता सूची में धोखाधड़ी की कोशिश की गई. एक ही डिवाइस से सैंकड़ों आवेदन दर्ज हुए.