नीति आयोग और डीईए की सलाह पर एफसीआई ने साइलो टेंडर्स से मोनोपॉली की शर्त हटा दी. इसके बाद ये सारे टेंडर अडाणी को मिले. इस योजना का 16,500 करोड़ रुपये से अधिक का हिस्सा अडाणी और लीप इंडिया नामक दो कंपनियों ने हासिल कर लिया.