संविधान, समानता और पहचान. यही तीन शब्द दिल्ली के संसद मार्ग की तस्वीर बयान कर रहे थे. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि एक आंदोलन, एक उत्सव और एक सवाल बन चुकी है.
संविधान, समानता और पहचान. यही तीन शब्द दिल्ली के संसद मार्ग की तस्वीर बयान कर रहे थे. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि एक आंदोलन, एक उत्सव और एक सवाल बन चुकी है.