हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा में इस हफ्ते पश्चिमी एशिया में युद्ध के चलते भारत में उपजे ऊर्जा संकट और होली पर हुए विवाद के बाद उत्तम नगर में हुई हत्या को लेकर विस्तार से बात हुई.
इसके अलावा अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ामेनेई की मौत के बाद मुज्तबा ख़ामेनेई चुने गए नए सर्वोच्च नेता, पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात करके खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर की चर्चा, सुप्रीम कोर्ट ने 31 वर्षीय हरीश राणा को दी इच्छा मृत्यु की इजाज़त, असम कैबिनेट ने राज्य संचालित फ़ख़रुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल का नाम बदलने की की घोषणा, दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तम नगर हत्या मामले में मुस्लिम लोगों के घरों पर बुलडोज़र चलाने पर लगाई रोक, पीएम मोदी के कोच्चि दौरे के कार्यक्रम से केरल के लोक निर्माण मंत्री को बाहर रखने को लेकर उठा विवाद, लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने टेक्सास में एक ऐतिहासिक रेफ़ाइनरी की घोषणा की, गुरमीत राम रहीम सिंह एक हत्या के मामले में बरी और जम्मू में पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुख अब्दुल्लाह को जान से मारने के प्रयास में एक व्यक्ति गिरफ्तार आदि ख़बरें भी हफ्तेभर की सुर्खियों में शामिल हैं.
इस बातचीत में बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार कल्लोल भट्टाचार्य और ज्योत्सना मोहन शामिल हुईं. न्यूज़लॉन्ड्री टीम से सह संपादक शार्दूल कात्यायन और विकास जांगड़ा ने चर्चा में हिस्सा लिया. न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने चर्चा का संचालन किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि देश में ऐसा कोई संकट नहीं है जबकि ग्राउंड रियलिटी यह है कि एलपीजी सिलेंडर बुक करने का सिस्टम ठप हो चुका है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से ईरान ने चीन और बांग्लादेश के जहाज़ गुजरने की इजाज़त दे दी है बाक़ी किसी देश को यह अनुमति नहीं है यही वह रास्ता है जहां से भारत की भी ईंधन की सप्लाई होती है.”
इस विषय पर ज्योत्सना कहती हैं, “मैं अबुधाबी में हूं और दो हफ्ते हो रहे हैं जबसे युद्ध शुरू हुआ है, सच कहूं तो अब आदत सी हो गई है, शुरू में थोड़ा डर लगता था. 14 दिन से यहां कुछ नहीं बदला है. स्कूल बंद हैं और उनके भी खुलने की जल्दी उम्मीद नहीं है. हालांकि जितना पैनिक भारतीय टेलीविज़न मीडिया दिखा रहा है वैसा यहां कुछ नहीं है.”
सुनिए पूरी चर्चा -

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