दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.
इस समय देश में एलपीजी गैस की सप्लाई हेलमहेल हो गई है. अगर कोई व्यक्ति यह कह रहा है कि उसके सिलेंडर में गैस नहीं है तो इसका सीधा सा मतलब है कि वह अफ़वाह फैला रहा है. और अगर आपको फिर भी गैस की कमी खल रही है तो बाहर निकल कर चिल्ल-पों करने की ज़रूरत नहीं है. शांत रहिए. संयम रखिए. और ज़रूरत पड़े तो भूखे रहिए. भूखे रहने से भी गैस बनती है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश में हालात हमसे भी ज़्यादा ख़राब हैं. इसलिए अपनी परेशानी छोड़िए, पड़ोसी की बदहाली देखकर खुश रहिए. सरकार तो साफ कह रही है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है.
गैस की मारामारी और सरकार की कारगुजारी पर देखिए इस हफ्ते की टिप्पणी.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
मदरलैंड वाले पॉपॉ की फादरलैंड पॉलिटिक्स और बाबा का बुद्ध राग