हिरेन जोशी कौन हैं, जिन पर संपादकों को धमकाने का आरोप लगा है

पीएमओ कवर करने वाले एक पत्रकार कहते हैं, “हिरेन पीएमओ में काफी ताकतवर हैं. उनका कद इतना बढ़ गया है कि सारे केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री उनकी गुड लिस्ट में आना चाहते हैं.”

हिरेन जोशी कौन हैं, जिन पर संपादकों को धमकाने का आरोप लगा है
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक सभा में प्रधानमंत्री के सलाहकार हिरेन जोशी का नाम लेकर सबको चौंका दिया. और नाम क्या लिया, बल्कि सीधे हिरेन जोशी के ऊपर प्रधानमंत्री के इशारे पर मीडिया के नामचीन संपादकों को धमकाने का आरोप लगा दिया. केजरीवाल ने जो कहा उसका लब्बोलुआब यह कि हिरेन जोशी मीडिया मालिकों और संपादकों को ‘आप’ और केजरीवाल को नहीं दिखाए जाने का संदेश भेजते हैं.

इस आरोप के बाद सत्ता के गलियारों में लो-प्रोफाइल रह कर काम करने वाले हिरेन जोशी अचानक से इंटरनेट पर सर्च का केंद्र बन गए. इंटरनेट पर उनकी गिनी-चुनी तस्वीरें ही उपलब्ध हैं.

51 वर्षीय जोशी देश की सत्ता के केंद्र साउथ ब्लॉक यानी प्रधानमंत्री कार्यालय में नरेंद्र मोदी के ओएसडी यानी विशेष कार्याधिकारी के रूप में तैनात हैं. पीएमओ में उनका ओहदा ज्वाइंट सेक्रेटरी के स्तर का है. आधिकारिक तौर पर उन्हें संचार और आईटी का ओएसडी बनाया गया है, लेकिन सत्ता के गलियारों में जो कानाफूसी चलती है, उसके मुताबिक जोशीजी फिलहाल वे प्रधानमंत्री के आंख और कान हैं. प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया हैंडल उनके जरिए ही प्रबंधित होता है.

जोशी 2008 से ही नरेंद्र मोदी के ओएसडी के रूप में काम करते आ रहे हैं. तब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. 2014 में मोदी दिल्ली पहुंचे तो जोशी भी पीएमओ बुला लिए गए. 2019 में जब मोदी दोबारा प्रधानमंत्री चुने गए तब जोशीजी को पदोन्नति करते हुए ज्वाइंट सेक्रेटरी समकक्ष ओहदा दिया गया. जोशीजी प्रधानमंत्री के कितने खास हैं, इसे इस बात से समझिए कि उन्हें नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के चार दिन बाद ही गुजरात से पीएमओ बुला लिया था.

कौन है हिरेन जोशी?

हिरेन जोशी और नरेंद्र मोदी की मुलाकात किसी फिल्मी कहानी सी है. बात उन दिनों की है जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. गुजरात में तैनात एक अधिकारी बताते हैं, “गुजरात सरकार ने इंजीनियर्स के लिए एक प्रोग्राम रखा था. प्रोग्राम में कोई तकनीकी दिक्कत आ गई, उस समय मोदी भी कार्यक्रम में मौजूद थे. जोशी ने कुछ ही मिनटों में दिक्कत को दूर कर दिया. कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ और मोदी उनसे बहुत प्रभावित हुए.” यह घटना दोनों की जान-पहचान का बयस बन गई. 2008 में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपना ओएसडी बना लिया.

जोशी राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले है. उन्होंने पुणे से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (आईआईटीएम) ग्वालियर से पीएचडी की. जोशी, नरेंद्र मोदी का ओएसडी बनने से पहले माणिक्य लाल वर्मा टेक्सटाइल एंड इंजीनियरिंग कॉलेज, भीलवाड़ा में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर थे.

कॉलेज की वेबसाइट के अनुसार जून 2020 तक, जोशी को पढ़ाने का कुल 13 साल का अनुभव है. उन्होंने साल 1995 से पढ़ाना शुरू किया था. जोशी 2008 के बाद से ही नरेंद्र मोदी के लिए काम कर रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक हिरेन जोशी के पास प्रधानमंत्री के सभी सोशल मीडिया को हैंडल करने की जिम्मेदारी है. वह वेबसाइट, ब्लॉग, सोशल मीडिया अकाउंट (ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि) पर नजर रखते हैं. उनकी सहमति से ही पीएम के अकाउंट से कोई भी पोस्ट होती है.

उन्होंने ही narendramodi.in वेबसाइट का हिंदी और संस्कृत भाषा में अनुवाद कराया था. वह मंत्रालयों और भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को सोशल मीडिया के बारे में बताते हैं, साथ ही उनकी निगरानी भी करते हैं. 2014 लोकसभा चुनावों की तैयारी के दौरान अलग-अलग भाषाओं में मोदी द्वारा किए जाने वाले ट्वीट, उनकी ही देखरेख में होते थे.

2016 में केंद्रीय मंत्रियों को सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का निर्देश दिया गया. सोशल मीडिया में उपस्थिती और प्रदर्शन के आधार पर मंत्रियों का आकलन शुरू हुआ. भाजपा के एक नेता के मुताबिक इसके पीछे हीरेन जोशी का दिमाग था. वह सभी मंत्रियों के सोशल मीडिया पर भी नजर रखते हैं. उन्होंने इस प्रदर्शन के आधार पर तैयार रिपोर्ट को हर दो महीने में मंत्रालय को भेजना शुरू किया था.

जोशी उस समय काफी चर्चा में आए थे जब 2014 में प्रधानमंत्री के जापान दौरे से पहले उनका एक ट्वीट जापानी भाषा में हुआ था. यह ट्वीट पीएमओ के अकाउंट से नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत अकाउंट से हुआ था.

जापानी भाषा में ट्वीट करने के लिए पीएमओ ने ट्वीट को पहले टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास के पास अनुवाद के लिए भेजा. फिर वहां से आए अनुवाद की भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुवादक ने जांच की. उसके बाद उसे एक अनुवादक साफ्टवेयर से चेक किया गया, ताकि गलती की कोई संभावना न रहे. यह सारा काम जोशीजी के नेतृत्व में किया गया था.

2014 के लोकसभा चुनावों से पहले 2013 में पत्रकार आकार पटेल ने अपने एक लेख में यह जानकारी देकर हलचल पैदा कर दी थी कि जोशी करीब 2000 लोगों की टीम के साथ मोदी का सोशल मीडिया प्रबंधन करते हैं. इस दौरान इंटरनेट पर बड़ी संख्या में राहुल गांधी को ‘पप्पू’ और मनमोहन सिंह को मौनी बाबा जैसे मीम बनाकर वायरल किए गए.

पीएमओ कवर करने वाले एक पत्रकार नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, “हिरेन पीएमओ में काफी ताकतवर हैं. उनका कद इतना बढ़ गया है कि सारे केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री उनकी गुड लिस्ट में आना चाहते हैं.”

2017 से पहले तक जोशी सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का सोशल मीडिया ही देखते थे, लेकिन 2018 में पीएमओ में पीआरओ रहे जगदीश ठक्कर के निधन के बाद वह पूरा मीडिया संभालने लगे.

दिल्ली के कुछ पत्रकारों ने इस बात की पुष्टि की है कि हीरेन जोशी की ओर से खबरों के एंगल आदि के संबंध में मैसेज भेजे जाते हैं.

हिरेन की ‘ताकत’

पीएम नरेंद्र मोदी के लिए हिरेन की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह 2008 से लगातार नरेंद्र मोदी के साथ जुड़े हुए हैं. जोशी न कभी भाजपा के सदस्य बने और न ही उनकी नौकरशाही वाली पृष्ठभूमि है. वो किसी कैडर से नहीं आते.

गुजरात के एक वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र मोदी से जोशी के संबंधों के बारे में कहते हैं, “हिरेन, मोदी का पर्सनल काम देखते थे. सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में 2010 में जब सीबीआई जांच चल रही थी, तब एजेंसी ने अहमदाबाद स्थित हिरेन के पर्सनल ऑफिस पर छापा मारा था. हालांकि एजेंसी ने कभी नहीं बताया कि उसे वहां से क्या मिला.”

वे आरोप लगाते हुए कहते हैं, “वह गुजरात में पार्टी के नेताओं और दूसरे अहम लोगों के सर्वेलांस का काम देखते थे.”

पीएमओ कवर करने वाले एक पत्रकार कहते हैं, “केजरीवाल ने जो बात हिरेन जोशी को लेकर कही है उसमें एक हद तक सच्चाई है. सीधे धमकी नहीं दी जाती, लेकिन रिपोर्टर को बोल दिया जाता है वह अपने संपादक को बता दे कि पीएमओ नाराज है.”

वह आगे बताते हैं, “हिरेन ही टीवी डिबेट का नरैटिव सेट करते हैं, जो खास पत्रकारों को भेजा जाता है. जिसके बाद टीवी पर आप देखते ही हैं. एक ही टॉपिक पर बहस होती है.”

वे कहते हैं, “जानकारी ब्रॉडकास्ट की जाती है कि क्या ट्वीट करना है. ट्वीट करने के बाद पत्रकारों को अपना ट्वीट पीएमओ से साझा करना पड़ता है. जोशी की टीम पत्रकारों के ऊपर निगरानी करती है.”

गुजरात के एक अंग्रेजी अखबार के पूर्व संपादक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "गुजरात में नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर हिरेन जोशी का नाम है.”

पूर्व संपादक ने बताया कि जोशी ने उन्हें एक बार उनके द्वारा कमीशन किए गए कॉलम को लेकर फोन किया था. उस ‘धमकाने वाली’ कॉल के बाद, संपादक को अखबार के मालिकों का फोन आया.

29 मार्च, 2020 को केंद्र सरकार ने कोविड की रोकथाम को लेकर 11 अधिकार प्राप्त समूह बनाए थे.. इनमें से एक ग्रुप जानकारी, संवाद और जन जागरूकता को लेकर था, इसके एक सदस्य हिरेन जोशी भी थे.

पीएमओ कवर करने वाले पत्रकार बताते हैं, “कमेटी में शामिल इसलिए किया गया ताकि वह सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ा पाएं. कई अहम मौकों पर आपने देखा होगा की पत्रकारों से लेकर केंद्रीय मंत्री तक सब एक जैसा ही ट्वीट करते है. इसके पीछे जोशीजी का हाथ होता है.”

2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में भाजपा ने कई टीमें बनाई थीं. इनमें से एक टीम का काम ‘मोदी की व्यक्तिगत छवि को चमकाना’ था. इसकी जिम्मेदारी भी जोशी के पास ही थी. तब उनकी टीम में शिवनाथ ठुकराल शामिल थे, जो अब व्हाट्सएप के भारत के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख हैं.

राज्यसभा सांसद और फिलहाल मोदी विरोधी बन चुके सुब्रमण्यम स्वामी समय-समय पर जोशी के प्रभाव और कामकाज की ओर इशारा करते रहते हैं. वे कई मौकों पर हीरेन जोशी पर ट्रोल आर्मी चलाने का आरोप लगा चुके हैं. एक ट्वीट में उन्होंने जोशी की पीएचडी डिग्री पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, “हिरेन जोशी पीएमओ के डर्टी ट्रिक्स डिवीजन का हिस्सा हैं. मीडिया को मैनेज करना उनका काम है.”

न्यूजड्रम नामक वेबसाइट पर मौजूद एक खबर के मुताबिक, “साल 2019 तक अरुण जेटली ही मेनस्ट्रीम मीडिया का नैरेटिव तय करते थे. लेकिन उनके निधन के बाद जोशी ने काफी हद तक वह काम अपने हाथ में ले लिया है. अब वह मोदी के आंख और कान बन गए हैं.”

गुजरात में काम करने वाले ज्यादातर वरिष्ठ पत्रकार हिरेन जोशी के नाम से वाकिफ हैं. पत्रकारों के बीच उनकी छवि सभी से मिलने जुलने वालों की है क्योंकि गुजरात में बतौर ओएसडी वह मीडिया को मैनेज नहीं करते थे.

गुजरात के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, “गुजरात में मीडिया का ज्यादातर काम अमित शाह और मोदी खुद ही देखते थे. वही एडिटर्स और मालिकों से मीटिंग किया करते थे.”

आप और भाजपा की लड़ाई

ऐसा नहीं है कि हिरेन जोशी का नाम पहली बार मीडिया को डराने या धमकाने के लिए लिया गया हो. इससे पहले साल 2021 में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एबीपी न्यूज पर उनका नाम लिया था.

भाजपा के द्वारा आप को भी निशान पहली बार नहीं बनाया जा रहा है. आम आदमी पार्टी पर पीएमओ के द्वारा नजर रखे जाने की शुरुआत तो 2015 से हो गई थी, लेकिन इसका खुलासा 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हुआ. रिपोर्ट में बताया गया कि हिंदुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक शिशिर गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट से जुड़े सवालों के लिए जो मेल भेजी, वो सवालों के बजाय जानकारी देने के लिए भेजी गई लगती थी. गुप्ता ने यह मेल हिरेन जोशी और अमित शाह को भेजी थी. खास बात है कि इस मेल के कुछ दिनों बाद ही, पीएमओ ने गृह मंत्रालय के अधिकारी को आदेश देकर, मेल में लिखी गई बातों पर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था.

गुजरात के एक अखबार में राजनीतिक संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, “हिरेन का अभी गुजरात मीडिया में उतना दखल और प्रभाव नहीं है. अभी मीडिया में एकतरफा कवरेज हो रहा है. सिर्फ बीजेपी ही दिख रही है, बाकी सब गायब हैं.”

एक अंग्रेजी अखबार की पूर्व संपादक ने बताया, “केजरीवाल ने गलत नहीं कहा. गुजराती मीडिया में ‘आप’ का कवरेज बहुत ही कम है. पार्टी जो दिख रही है वह सिर्फ सोशल मीडिया पर है.”

वह बताते हैं, “अगर टीवी डिबेट पर आप पार्टी के प्रवक्ता बुलाए जाते हैं, तो बीजेपी वहां नहीं जाती.” यही आरोप एक गुजराती टीवी चैनल के पत्रकार ने भी लगाया. वह कहते हैं, “हमें आप के सिर्फ दो प्रवक्ताओं को बुलाने के लिए कहा गया है, सिर्फ उन्हें बुलाने पर ही बीजेपी आती है, वरना नहीं आती.”

हालांकि कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि यह सच नहीं है. अहमदाबाद में एक अखबार में बतौर संपादक 10 साल काम करने वाले एक पत्रकार कहते हैं, “मैने 10 साल बतौर एडिटर के तौर पर काम किया, लेकिन कभी हिरेन का फोन नहीं आया, या कभी कुछ कहा गया हो. जो खबर होती है वह हम छापते हैं.”

राज्य में एक अखबार के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, “हम ‘आप-बीजेपी-कांग्रेस’, सभी को अपने यहां जगह देते हैं. सभी की खबरें होती हैं. लेकिन कितनी बार सिर्फ केजरीवाल के दौरे की खबर लिखेगें?”

वे आगे बताते हैं, “दो महीने पहले तक ‘आप’ विज्ञापन देती थी, लेकिन अब उन्होंने बंद कर दिया है. ऐसा नहीं है कि कवरेज नहीं हो रहा या पहले ज्यादा होता था. बस उन्होंने देना बंद कर दिया. ऐसा कई अखबारों के साथ हुआ है.”

गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार और सरकार के एक आलोचक कहते हैं, “गुजरात का मीडिया, दिल्ली की मीडिया की तरह चरणों में नहीं लेटा है. यहां प्रमुखता से बीजेपी के खिलाफ भी खबरें छपती हैं. साथ ही साथ खबरों में प्रधानमंत्री का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है.”

***

न्यूज़लॉन्ड्री ने अरविंद केजरीवाल द्वारा हिरेन जोशी पर लगाए गए आरोपों से जुड़े कुछ सवाल जोशी को भेजे हैं. उनकी ओर से जवाब आने पर उसे खबर में जोड़ दिया जाएगा.

न्यूज़लॉन्ड्री ने संदेश के मैनेजिंग एडिटर और गुजरात समाचार, न्यूज़ 18 गुजराती के एडिटर से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने बात करने से मना कर दिया.

साथ ही 'आप' के आरोपों पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, गुजरात के प्रवक्ता और मीडिया टीम के सदस्यों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने भी बात करने से मना कर दिया.

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