दिल्ली मीडिया के ‘बाढ़ जिहाद’ को असम सरकार और स्थानीय मीडिया ने कैसे किया नाकाम

स्थानीय पत्रकारों के पूछे गए सवालों पर असम के मुख्यमंत्री और राज्य की पुलिस, दोनों ने स्पष्टीकरण दिए. लेकिन दुख की बात है कि शायद न्यूज़ एक्स को यह मेमो नहीं मिला.

दिल्ली मीडिया के ‘बाढ़ जिहाद’ को असम सरकार और स्थानीय मीडिया ने कैसे किया नाकाम
Kartik Kakar
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कल्पना कीजिए कि आप दिल्ली की बड़ी मीडिया कंपनी के लिए एक स्ट्रिंगर हैं. आप असम में रहते हैं जहां इस साल बाढ़ की वजह से 190 लोग मारे जा चुके हैं. आपको अपने अधिकारियों का फोन, एक नए और भयानक दावे की खोजबीन करने के लिए आता है - नाम है "Flood Jihad या बाढ़ जिहाद."

ट्विटर पर 6 जुलाई को #FloodJihad ट्रेंड होना शुरू होने के बाद, राज्य के कई रिपोर्टर और स्ट्रिंगर्स को ऐसा ही कुछ सुनना पड़ा. थ्योरी यह थी कि 'जिहाद' के नाम पर चार मुसलमान युवकों ने, कछार जिले में जानबूझकर एक तटबंध को तोड़ा था जिससे सिलचर शहर में बाढ़ आ गई थी.

भारत में किसी ऐसे मुहावरे का ट्रेंड हो जाना कोई नई बात नहीं है, खासतौर से जब उसके साथ जिहाद शब्द जुड़ा हुआ हो. ज़ी न्यूज़ पर सुधीर चौधरी ने एक बार अलग-अलग तरह के जिहादों को लेकर पूरा कार्यक्रम भी किया था - फिल्म और गानों का जिहाद, लव जिहाद, लैंड जिहाद, विक्टिम जिहाद, आर्थिक जिहाद - हालांकि उन्होंने इस "जिहाद के चार्ट" को एक संदेहास्पद फेसबुक पेज से उठाया था.

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