जहांगीरपुरी हिंसा: हनुमान जंयती, भगवा झंडा और उकसाऊ भीड़

16 अप्रैल को दिल्ली के जहांगीरपुरी में दो समुदायों के बीच हुई हिंसा के बाद से पूरे इलाके में पुलिस तैनात है.

Article image

बांग्लादेशी आतंकवादी बताकर एक ही घर से तीन लोगों को किया गिरफ्तार

32 वर्षीय आयशा का परिवार पिछले 40 साल से जहांगीरपुरी के सी ब्लॉक गली नंबर 5 में रहता है. उनके दादा-दादी पश्चिम बंगाल के मेधनीपुर (हल्दिया) से दिल्ली आए थे.

आयशा और उनका परिवार

आयशा के तीन देवरों, मुख्तार, अक्सार और असलम को पुलिस पकड़कर ले गई. आयशा ने हमें बताया कि पुलिस रात को ढाई बजे उनके घर आई थी.

वह कहती हैं, “रात को जब एक बजे पुलिस आई तो मोहल्ले के लोग अपने घरों के बाहर खड़े थे. इस दौरान पुलिस ने उनसे अंदर जाने को कहा. इसके बाद पुलिस करीब ढाई बजे फिर से मोहल्ले में आई और हमारे घर का दरवाजा जोर-जोर से पीटने लगी. जब हमने दरवाजा खोला तो पुलिस हमारे घर में घुस गई और मुख्तार, अक्सार और असलम को पीटकर बाहर ले गई. हमने वजह पूछी तो हमें ही डंडे और लातों से मारने लगे.”

आयशा का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें और महोल्ले की अन्य महिलाओं को लात और डंडों से मारा. आयशा ने हमें अपने शरीर पर घाव भी दिखाए. वह गली में लगे सीसीटीवी कमरे की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, “अगर मैं झूठ बोल रही हूं तो सीसीटीवी कैमरा की फुटेज निकालकर देख लो.”

मुख्तार पास में स्थित सीडी पार्क में चाय और खाने की दुकान चलाते हैं. छोटा भाई अक्सार की पनवाड़ी की दुकान है और असलम दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं. तीनों महीने का 8000 से 10000 रुपए कमा लेते हैं.

असलम पर हिंसा के दौरान गोली चलाने का आरोप लगाया गया है. वह महज 15 साल का है. आयशा कहती हैं, “पुलिस घर आई थी. उन्होंने अपनी पिस्टल असलम के हाथ में रख दी और कहने लगे तेरे पास बंदूक है, तूने गोली चलाई थी. जबकि हमारे घर में कोई बंदूक नहीं है.”

आयशा

आयशा आगे कहती हैं, “पुलिस ने हमें बांग्लादेशी आतंकवादी कहकर बुलाया. जबकि यहां हिंदू व मुस्लिम परिवार पिछले 40 साल से साथ रह रहे हैं. चुनाव के समय ये नेता हमारे घर हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं. अब हमें रोहिंग्या कहकर बुला रहे हैं.”

आयशा ने शोभायात्रा को देखा था. उन्होंने हमें बताया, “शोभायात्रा में जय श्री राम के नारे लगाए जा रहे थे. और साथ ही कहा जा रहा था, ‘हिंदुस्तान में रहना होगा जय श्री राम कहना होगा.’ हमें हिंदुओं से कोई तकलीफ नहीं है. हम चाहते हैं सब साथ रहें लेकिन हमें दबाया क्यों जा रहा है?”

क्या कहता है दूसरा पक्ष?

घटना के बाद से ही लोगों ने इसे सांप्रदायिक रूप देना शुरू कर दिया. “अगर ये गद्दारों की औलाद हैं तो इन्हें पाकिस्तान, अफगानिस्तान चले जाना चाहिए. इनको यहां रहकर परेशानी किस बात की है? क्यों रह रहे हैं यहां पर?” यह सब जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन के बाहर बोला गया और यह कहने वाला व्यक्ति भाजपा नेता सूर्य प्रकश मैथिलि हैं.

लक्ष्मीशंकर शुक्ला

न्यूज़लॉन्ड्री ने शोभायात्रा के संयोजकों से भी बातचीत की. लक्ष्मीशंकर शुक्ला आदर्श नगर भाजपा मंडल उपाध्यक्ष हैं. 16 अप्रैल की घटना के बारे में कहते हैं, “उस शाम शोभायात्रा बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से निकल रही थी. एक दम से ही हम पर पथराव होने लगा. भगदड़ मच गई. पीछे मुड़कर देखा तो महिलाएं भी पत्थर चला रही थीं. रोहिंग्या मुसलमान ही इसी तरह की हरकत करते हैं.”

गरिमा गुप्ता

इस पर भाजपा की पार्षद गरिमा गुप्ता कहती हैं, “यहां बांग्लादेशी रहते हैं. हर आपराधिक गतिविधि में वे शामिल होते हैं. इन्होंने डीडीए की जमीन पर अवैध अतिक्रमण किया हुआ है. सालों से यहां हिंदू- मुस्लिम साथ रह रहे हैं लेकिन कल (16 अप्रैल) इन बांग्लादेशी शरारती तत्वों ने ही हिंसा भड़काई और दंगे करवाए हैं.”

“दिल्ली पुलिस हाय- हाय. हमें इंसाफ चाहिए.”

ये नारे शाम को सी-ब्लॉक गली नंबर- 5 में लगाए जा रहे थे. इन नारों के बीच मुस्लिम समुदाय की महिलाएं अपने देवर, पति और भाई के लिए पुलिस प्रशासन से सवाल कर रही थीं.

गली में मौजूद अनवरा कहती हैं, “हमारे छोटे-छोटे बच्चों को चोट आई है. लेकिन पुलिस को सिर्फ हम दोषी दिखते हैं. हिंसा करने वाले दूसरे पक्ष के लोगों को गिरफ्तार नहीं किया गया. ऐसा क्यों?”

मौके पर हमने पाया कि छोटे बच्चों के शरीर पर चोट के निशान थे. ये चोटें 16 अप्रैल के दौरान हुई हिंसा के दौरान आई हैं.

इसी मोहल्ले में रहने वाले हिंदू परिवारों से भी हमने बातचीत की. 63 वर्षीय गोपालचंद ने कहा, “हमारी चाय की टपरी मुसलमान की दुकान के साथ जुड़ी हुई है. यहां पहले कभी सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई. सब साथ रहते हैं. लेकिन इन नेताओं ने वोट के लिए हमें बांट दिया है.”

imageby :आदित्या वारियर

इस पूरे मामले के बाद रविवार 17 अप्रैल को डीसीपी उत्तर-पश्चिमी ऊषा रंगनानी ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, “दोनों समुदायों को खुद पर नियंत्रण रखना चाहिए था. कानून और व्यवस्था के साथ सांप्रदायिक सद्भाव होना चाहिए. पुलिस निष्पक्षता से जांच करेगी.”

बता दें कि इस मामले में सोमवार को भी कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक अब तक 22 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

इस मामले में हमने एसएचओ संजीव कुमार से भी बात की. उन्होंने हमारे सवालों पर कहा कि आप इस मुद्दे पर डीसीपी से बात कीजिए.

वहीं जब हमने डीसीपी ऊषा रंगनानी से बात की तो उन्होंने कहा, "मैं एक एक मीडियाकर्मी से बात नहीं कर सकती हूं. मैंने घटना के बारे में सभी जानकारी ट्वीट कर रही हूं."

दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने सोमवार को मीडिया से बात की. उन्होंने कहा, "आरोपियों के पास से अब तक तीन बंदूकें और पांच तलवारें बरामद की गई हैं. मामला अपराध शाखा को सौंप दिया गया है. फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने मौके से साक्ष्य एकत्र किए हैं. सोशल मीडिया से डिजिटल साक्ष्य की जांच की जा रही है."

Also see
article imageवेज-नॉनवेज: ‘धर्म’ नहीं एक दूसरे को ‘ताकत’ दिखाने का परिणाम है जेएनयू हिंसा
article imageजेएनयू छात्रों में हिंसक झड़प, लेफ्ट और एबीवीपी का एक दूसरे पर गंभीर आरोप

Comments

We take comments from subscribers only!  Subscribe now to post comments! 
Already a subscriber?  Login


You may also like