कॉप-26: टूटा विश्वास, गहराया अविश्वास

ग्लासगो में संपंन कॉप-26 क्या वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने में मदद करेगा?

WrittenBy:सुनीता नारायण
Date:
Article image

पहले से अमीर देशों ने विकासशील दुनिया के खर्च व जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के खर्च के भुगतान को लेकर गंभीरता या इच्छा नहीं दिखाई. ग्लास्गो जलवायु समझौता 'गहरे अफसोस के साथ' इस बात को दर्ज करता है कि विकसित मुल्कों द्वारा साल 2020 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका. क्लाइमेट फाइनेंस को अब भी 'दान' के नैरेटिव का हिस्सा माना जाता है और सच कहा जाए, तो अमीर दुनिया पैसा देने को लेकर अब इच्छुक नहीं है.

लेकिन सच तो ये है कि ये फाइनेंस जलवायु न्याय के लिए है, जिसे कुछ के लिए लिखित रूप में महत्वपूर्ण के तौर पर खारिज कर दिया गया है. इसकी आवश्यकता इसलिए है क्योंकि जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक समझौता ये मांग करता है कि जिन देशों ने समस्याएं उत्पन्न की हैं, जो देश वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन का कारण हैं, उन्हें अपने योगदान के आधार पर बड़े स्तर पर उत्सर्जन में कमी लानी चाहिए. बाकी दुनिया जिन्होंने ने उत्सर्जन में कोई योगदान नहीं दिया है, उन्हें प्रगति का अधिकार मिलना चाहिए. इस प्रगति में कर्बन उत्सर्जन कम हो, ये सुनिश्चित करने के लिए वित्त व टेक्नोलॉजी मुहैया कराये जाएंगे. ये एक दूसरे पर निर्भर इस दुनिया के सहकारी समझौते का हिस्सा है.

कॉप-26 के बाद, दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान के भीतर रहने के आसपास भी नहीं है. सच बात ये है कि साल 2030 तक उत्सर्जन में 50% तक कटौती कर 2010 के स्तर पर लाने के लक्ष्य की जगह इस दशक में दुनिया भर में उत्सर्जन में इजाफा होगा. यहां सवाल ये नहीं है कि कोयले के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से हटाना चाहिए, लेकिन अलग-अलग और वास्तविक इरादे से ट्रांजिशन के लिए धन उपलब्ध कराया जाना चाहिए.

हम ऊर्जा संक्रमण का बोझ विकासशील देशों पर नहीं लाद सकते हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के सबसे ज्यादा वल्नरेबल हैं. जलवायु परिवर्तन अस्तित्व पर खतरा है और कॉप-26 को ये सीख देनी चाहिए कि दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए किंडरगार्टन डिप्लोमेसी से आगे बढ़ने की आवश्यकता है.

(डाउन टू अर्थ से साभार)

Also see
article imageजलवायु परिवर्तन: दुनियाभर में 180 करोड़ लोगों पर खतरे की आशंका
article imageजलवायु परिवर्तन: भारत सहित दुनियाभर के 100 करोड़ से ज्यादा बच्चों पर मंडरा रहा गंभीर खतरा
subscription-appeal-image

Power NL-TNM Election Fund

General elections are around the corner, and Newslaundry and The News Minute have ambitious plans together to focus on the issues that really matter to the voter. From political funding to battleground states, media coverage to 10 years of Modi, choose a project you would like to support and power our journalism.

Ground reportage is central to public interest journalism. Only readers like you can make it possible. Will you?

Support now

Comments

We take comments from subscribers only!  Subscribe now to post comments! 
Already a subscriber?  Login


You may also like