एक सड़क दुर्घटना: न्यूज़-18 इंडिया का पत्रकार, पुलिस और जाति का मायाजाल

न्यूज़-18 इंडिया के लखनऊ संवाददाता अजीत प्रताप सिंह के बेटे के ऊपर आरोप है कि उसकी गाड़ी की टक्कर से एक लड़के की मौत हो गई, लेकिन पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

एक सड़क दुर्घटना: न्यूज़-18 इंडिया का पत्रकार, पुलिस और जाति का मायाजाल
Shambhavi
  • whatsapp
  • copy

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 27 अक्टूबर की सुबह करीब एक बजे आलमबाग इलाके में एक कार दुर्घटना हुई. इसमें विशाल बलेचा नामक युवक की मौत हो गई. 35 साल के विशाल अपने घर लौट रहे थे.

जिस कार से यह एक्सीडेंट हुआ उस कार से न्यूज़-18 इंडिया के लखनऊ ब्यूरो के पत्रकार अजीत प्रताप सिंह का विजिटिंग कार्ड और न्यूज चैनल का माइक आईडी मिला. इस कार का नंबर है ‘यूपी 32 एलपी 6100’. इस मामले में एक अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है.

राजधानी में हुए इस एक्सीडेंट के बारे में ज्यादा जानकारी बाहर नहीं आ पाई. लखनऊ के एक अखबार में काम करने वाले एक पत्रकार ने गोपनीयता की शर्त पर हमें बताया, “इस घटना को दबा दिया गया. लखनऊ में ही कई पत्रकारों को इस घटना के बारे में जानकारी नहीं है. पत्रकारों की एक लॉबी जो अजीत प्रताप सिंह के साथ है, उन लोगों ने मिलकर इस मामले को रफा-दफा कर दिया.”

घटना की खास मीडिया कवरेज नहीं हुई लेकिन सोशल मीडिया में जल्द ही एक्सिडेंट वाली कार और मोटरसाइकिल की फोटो और वीडियो वायरल हो गई. जिस काले रंग की फोर्ड इंडीवर गाड़ी से यह एक्सीटेंड हुआ, वह गाड़ी लखनऊ आरटीओ में सतीश कुमार सिंह के नाम पर रजिस्टर है.

मृतक के चचेरे भाई मुकेश कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, ”हमें घटना के एक-दो घंटे बाद जानकारी मिली थी. जब हम पहुंचे तो विशाल की मौत हो चुकी थी. चश्मदीदों ने बताया कि दुर्घटना के वक्त कार में तीन लोग सवार थे. हालांकि जब हम पहुंचे तो कार में कोई नहीं था.”

घटनास्थल से मिले फोटो में अजीत सिंह का कार्ड मिला. क्या वह खुद गाड़ी चला रहे थे या मौके पर मौजूद थे? इसपर न्यूज18 यूपी के ही एक पत्रकार कहते है, “वह गाड़ी में नहीं थे.” इस बात की तस्दीक एक अन्य स्थानीय पत्रकार ने भी की है.

अगर वह गाड़ी अजीत सिंह की नहीं है तो फिर उसमें उनका कार्ड और चैनल का माइक कैसे पहुंचा और दूसरी बात एक्सीडेंट के समय गाड़ी में कौन था?

लखनऊ के एक प्रतिष्ठित अखबार में काम करने वाले पत्रकार कहते हैं, “वह गाड़ी (जिससे एक्सीडेंट) अजीत के चाचा के नाम पर है. लेकिन गाड़ी का उपयोग अजीत सिंह ही करते है, ये सब जानते हैं. उन्हें सरकारी आवास भी मिला हुआ है. उस दिन गाड़ी उनका बेटा चला रहा था. ड्राइवर बगल वाली सीट पर बैठा था और एक अन्य दोस्त भी गाड़ी में था. यह लोग रॉग साइड से आ रहे थे.”

इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय सिन्धु सभा (मृतक सिंधी समाज से ताल्लुक रखता था) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा है. जिसमें उन्होंने कहा है- “पुलिस ने अजीत सिंह के रसूख के कारण उनके बेटे को मौका-ए -वारदात से भागने में मदद की. साथ ही आरोपी के बारे में जानकारी होने के बावजूद भी उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया.”

कई अखबारों में काम कर चुके लखनऊ के एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, “अजीत सिंह के बेटे वैभव सिंह ने कुछ समय पहले भी एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की थी. बाद में अजीत सिंह ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर उस पुलिसकर्मी का ट्रांसफर करवा दिया. यह लोग अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर इस मामले को भी दबा रहे हैं.”

कौन है अजीत सिंह

न्यूज18 इंडिया के लखनऊ ब्यूरो के संवाददाता अजीत सिंह, अंबेडकर नगर के रहने वाले है. वह पत्रकारिता में करीब 10-15 सालों से है. जानकार बताते हैं कि लखनऊ आने से पहले अजीत सिंह बतौर स्ट्रिंगर काम करते थे. इस दौरान वह तत्कालीन गोरखपुर के सांसद और मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संपर्क में आए. इसके बाद उनके करियर का सितारा चमक उठा.

न्यूज18 इंडिया में काम करने वाले एक पत्रकार कहते है, “साल 2017 में अजित सिंह लखनऊ आ गए थे. न्यूज18 का कोई संवाददाता नहीं होने के कारण वह चैनल के लखनऊ संवाददाता बन गए. उनकी पकड़ सरकार में है, इसलिए वो सरकार के सभी कार्यक्रमों में नज़र आते हैं.”

अजित सिंह ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपनी कई फोटो लगा रखी हैं. एक फोटो में वह अपनी बेटी और मुख्यमंत्री के साथ दिखाई दे रहे हैं.

इस घटना को दबने के पीछे की वजह जातीय आधार बतायी जा रही है. एनबीटी लखनऊ में काम करने वाले एक पत्रकार कहते हैं, “एक्सीडेंट की घटना के बाद राजपूत पत्रकारों की एक लॉबी अजित सिंह के बेटे को बचाने के लिए सक्रिय हो गई. उसने संबंधित थाने और पुलिस वालों के ऊपर दबाव डलवाकर एफआईआर में नाम नहीं जुड़ने दिया.”

बता दें कि जिस युवक की मौत हुई वह सिंधी समाज से है. इसे लेकर भारतीय सिंधु सभा ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है.

क्या केस को दबाया जा रहा है?

सिंधी समाज ने जो पत्र लिखा है उसमें भी आरोप लगाया गया है कि सरकार के कुछ उच्चधिकारी और मुख्यमंत्री कार्यालय में काम करने वाले कुछ लोग उसके साथ (अजीत सिंह) व्यवसायिक रुप से जुड़े हैं और हरसंभव मदद कर रहे हैं.

अखबार में काम करने वाले पत्रकार कहते हैं, “इस घटना के बाद वैभव को (अजित सिंह के बेटे) शहर के मेयो अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, यह दिखाने के लिए कि घटना में वैभव भी चोटिल हुआ है. जबकि वह आईसीयू में बैठकर चिप्स और कोलड्रिंक पी रहा था.”

मृतक के भाई ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो गाड़ी में कोई नहीं था लेकिन कार से तीन शराब की बोतल, एक पिस्टल और लाठी मिली.”

क्या है व्यवसायिक हित

अजीत सिंह फोर्ड गाड़ी का उपयोग करते है साथ ही उनके पास महिंद्रा की एक्ससयूवी 300 भी है. उनकी बेटी लंदन में पढ़ती है जिसका जिक्र खुद उनके फेसबुक वॉल पर भी है. वहीं उनका बेटा लखनऊ में एक कॉलेज में पढ़ता है. एक स्वतंत्र पत्रकार कहते हैं, ”अजीत सिंह काफी संपन्न परिवार से आते है. उनके परिवार के सदस्य अंबेडकर नगर में ठेकेदारी का काम करते हैं.”

लखनऊ के एक अन्य पत्रकार कहते हैं, “दरअसल अजीत सिंह ने 2017 के बाद से ठेकेदारी का काम करना शुरू किया. उनकी पहचान के कारण उन्हें काफी ठेके भी अंबेडकरनगर में मिलते हैं. जिसमें उनकी मदद मुख्यमंत्री के कार्यालय से की जाती है.”

अजीत सिंह ने अपने बेटे वैभव के नाम पर कंपनी बनाकर अंबेडकर नगर में ठेकेदारी का काम शुरु किया है. न्यूज़लॉन्ड्री को मिले दस्तावेज के मुताबिक, अंबेडकरनगर जिले के प्रतापपुर कला से नवानगर, सरर्फुद्दीनपुर से नरायनपुर, सरर्फुद्दीनपुर से फुलवरिया, परसौली से हरिजन बस्ती, सईदपुर -रसीदपुर संपर्क मार्ग के सड़क निर्माण का काम वैभव कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला है. यह 20 मार्च 2021 में जारी हुआ है. 9 मार्च 2021 को जारी हुए टेंडर में भी कई ठेके वैभव कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला है.

कृष्णा नगर के एसएचओ आलोक राय ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “पहले इस मामले की जांच कर रहे सिपाही राज बहादुर सिंह का ट्रांसफर हो गया. अब इस मामले की जांच आलोक श्रीवास्तव को दी गई है. हालांकि वह अभी छुट्टी पर हैं. डीजीपी कॉन्फ्रेंस होने के कारण गाड़ी चालक को 21 नवंबर के बाद पूछताछ के लिए बुलाया गया है.”

यह पूछे जाने पर की गाड़ी से जिस पत्रकार का विजिटिंग कार्ड मिला क्या उनसे कोई पूछताछ की गई. इस पर एसएचओ कहते हैं, “यह तो किसी के पास भी मिल सकता है. हो सकता है उनका कार्ड गाड़ी चालक ने लिया हो. उनसे कोई पूछताछ नहीं की गई है.”

क्या गाड़ी में कोई शराब की बोतल, पिस्टल भी मिली है? इस पर आलोक राय कहते हैं, “गाड़ी में हमें कुछ नहीं मिला. जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो मौके पर इंडेवर गाड़ी में कोई नहीं था. पुलिस ने एफआईआर में गाड़ी चालक के खिलाफ दिए आवेदन पर पूछताछ के लिए बुलाया है.”

अंत में वह कहते हैं, “यह मामला साफ है इसमें अब कुछ नहीं बचा है. मृतक के परिवार में कोई नहीं है. बहुत मुश्किल से उसके चाचा के भाई ने एफआईआर लिखवाई है.”

इस एक्सीडेंट के बाद से अजीत सिंह टीवी पर नहीं आए हैं. कहा जा रहा है कि उनके संस्थान न्यूज़ 18 इंडिया ने इस घटना के बाद उन्हें 20 नवंबर तक के लिए ऑफ एयर किया गया है.

अजित सिंह ने न्यूज़लॉन्ड्री से अपना पक्ष रखते हुए कहा, “उस घटना से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. ना ही मेरा बेटा उसमें था, ना ही वह गाड़ी मेरी है. यह तो बहुत पुराना मामला हो गया है.”

वह आगे कहते हैं, “उस दिन मैं मऊ में अखिलेश यादव की रैली में था. मेरी छवि खराब करने के लिए यह मुद्दा उछाला जा रहा है.”

बेटे वैभव सिंह के गाड़ी चलाने के सवाल पर अजीत कहते हैं, “मेरे बेटे से भी कोई मतलब नहीं है. जबरदस्ती उसे फंसाया जा रहा है.” इसके बाद अजीत सिंह का फोन कट गया. वापस उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

लखनऊ में काम करने वाले एक नेशनल चैनल के रिपोर्टर अजीत सिंह के बारे में न्यूज़लॉन्ड्री से कहते हैं, “वैसे तो मैं उनके (अजीत सिंह) के बारे में बहुत नहीं जानता. लेकिन यूपी की भाषा में कहें तो वह ‘भौकाली’ पत्रकार हैं.”

न्यूज-18 इंडिया के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने बताया कि उन्हें इस घटना के बाद सस्पेंड कर दिया गया है. चैनल के एडिटर किशोर आजवाणी से हमने इस संबंध में बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

कुछ सवाल इस घटना को लेकर अभी भी कायम हैं, जो अजीत सिंह और उत्तर प्रदेश पुलिस की भूमिका को संदेहास्पद बनाते हैं. मृतक के भाई का सवाल है- “जिस कार से एक्सिडेंट हुआ वह कार कब्जे में है, उसके मालिक अजीत सिंह के चाचा हैं, आरोप है कि कार उनका बेटा चला रहा था इसके बावजूद पुलिस ने एफआईआर अज्ञात के खिलाफ लिखी है. ऐसा क्यों?”

Also Read :
उत्तर प्रदेश की एनकाउंटर संस्कृति और न्यायेतर हत्याएं
क्या ‘अब्बा जान’ बयान के जरिए राशन कार्ड पर झूठ बोल गए सीएम योगी?
newslaundry logo

Pay to keep news free

Complaining about the media is easy and often justified. But hey, it’s the model that’s flawed.

You may also like