जानिए क्या है राबिया सैफी की हत्या का पूरा मामला

26 अगस्त को राबिया सैफी की हत्या कर दी गई. खुद को राबिया का पति बताकर एक शख्स ने इस मामले की जिम्मेदारी ली है. लेकिन अब इस मामले को सांप्रदायिक और राजनीतिक मोड़ देकर कई अलग-अलग कहानियां गढ़ी जा रही हैं. आखिर क्या है राबिया की मौत का सच?

जानिए क्या है राबिया सैफी की हत्या का पूरा मामला
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राबिया की मौत के जरिए मुद्दे से भटकाने की कोशिश?

न्यूज़लॉन्ड्री ने राबिया के वकील महमूद पराचा से भी बात की. वह कहते हैं, "राबिया के सीनियर रविंद्र मेहरा को एक दिन पहले 25 अगस्त को भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ के लिए ले जाया गया था. बता दें कि मेहरा के नेतृत्व में पुलिस ने मास्क पहनने जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल के उलंघन के लिए बहुत सारे चालान (जुर्माना) जारी किए. पुलिस ने कथित तौर पर डुप्लीकेट प्रतियां छापी और संबंधितों द्वारा भारी मात्रा में धन की हेराफेरी की. मेहरा मुख्य रूप से पूरे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल था. जबकि राबिया ने पूरी घटना देखी क्योंकि वह मेहरा की सहायक थीं. इसलिए मेहरा की कहानी को दबाने लिए राबिया को मार दिया गया."

राबिया के वकील आगे कहते हैं, "मामला अभी जांच का विषय बना हुआ है. हम इसकी निष्पक्ष सीबीआई जांच चाहते हैं. देश में मामला ढकने के लिए दलित, मुसलमान और लड़कियों को औज़ार बनाया जाता है. मेहरा के मामले को छुपाने और शायद उसे बचाने के लिए राबिया को मार दिया गया. मुद्दे से ध्यान भटकाया जा रहा है. इस मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है."

कालिंदी कुंज पुलिस का भी कहना है कि समाज के कुछ गुट राबिया के मामले को गलत मोड़ देकर मामले को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं जिस से इंसाफ मिलने में देरी होती है. लोगों को पुलिस जांच का इंतज़ार करना चाहिए.

न्यूज़लॉन्ड्री ने सूरज कुंड क्राइम ब्रांच से भी बात की. जिसमें पता चला कि निजामुद्दीन फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. पुलिस ने इस से अधिक जानकारी देने से मना कर दिया. हमने रविंद्र मेहरा से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ है.

क्या कहते हैं महिलाओं के साथ अपराध के आंकड़े?

2019 राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डाटा के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में हर घंटे एक औरत के खिलाफ अपराध होता है. साल 2021 में राज्य सभा में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार देश में साल 2019 में रेप के साथ हत्या के 283 मामले दर्ज किये गए. वहीं महिलाओं के अपहरण के 72780 मामले दर्ज हुए. 2019 में दिल्ली में 13395 और हरियाणा में 14683 अपराध दर्ज किए गए. यह केवल दर्ज किये गए मामले हैं. इसके अलावा रोजाना कई ऐसे मामले होते हैं जो पुलिस रजिस्टर में जगह नहीं बना पाते.

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