फकीरा कहीं नहीं जाएगा और फकीरे से डेमोक्रेसी सेव करती भाजपा

दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.

WrittenBy:अतुल चौरसिया
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दिवाली का मौसम है, आप सबको रौशनी का त्यौहार मुबारक हो. आपके जीवन में खुशहाली, और संपन्नता का उजाला फैले. लगे हाथ थोड़ा सा ख्याल आप न्यूज़लॉन्ड्री और आज़ाद पत्रकारिता की भी रखिए. एक सौ एख रुपए के शुभ शगुन के साथ इस दिवाली आप न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब कीजिए. जो कभी कहते फिरते थे कि हम फकीर हैं, झोला लेकर चल देंगे. वो जब जाने का मौसम आया तो कह रहे कि मोदी कहीं कहीं नहीं जाएगा. जी हां. मोदीजी और उनके शागिर्द बाकायदा ढोल हरमुनिया लेकर ऊतारू हो गए हैं कि हम कुर्सी नहीं छोड़ेंगे.

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