'मैं पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहा था': छात्र संघ चुनाव पर गहराते गतिरोध के बीच जामिया में हिरासत और ऑनलाइन कैंपस

पुलिस डायरी की एंट्री में लिखा गया है कि हिरासत में लिए गए तीनों छात्रों ने भीड़ को उकसाया और अशांति पैदा की. जबकि उनमें से एक छात्र ने बताया कि वे केवल अंदर मौजूद छात्रों तक पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे.

WrittenBy:खुशी मेहरोत्रा
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बाहर सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति अब थोड़ी कम है, लेकिन हर प्रवेश द्वार पर कड़ा पहरा है. बाहर पुलिस की चेतावनी जारी है और लाउडस्पीकर लगे हुए हैं. क्लासेज़ ऑनलाइन ही चल रही हैं. वहीं गेट नंबर 7 के भीतर धरने पर बैठे छात्रों में से पांच छात्रों की भूख हड़ताल का आज 18वां दिन है. बाहर, छात्रों का कहना है कि कैंपस की तमाम गतिविधियां लगभग ठप हैं, यहां तक कि खाना और पानी भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है.

सोमवार शाम को विश्वविद्यालय परिसर के पास ही दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया. जिनमें ऑल इंडिया रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन - AIRSO के सदस्य निरंजन केएस, योग स्टडीज में सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे जामिया के छात्र मुन्ना कुरैशी और दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई कर रहे जामिया के पूर्व छात्र अरबाज़ मेवाती शामिल हैं. अगले दिन, अमर कॉलोनी में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के अंतर्गत चलाई गई कलंदरा कार्यवाहियों के तहत तीनों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

कलंदरा पुलिस की एक ऐसी रिपोर्ट होती है जो उन तथ्यों और परिस्थितियों की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जो पुलिस के दृष्टिकोण में, एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा निवारक कार्रवाई का औचित्य साबित करती हैं. किसी एफआईआर के विपरीत, इसका उद्देश्य निवारक कार्यवाही शुरू करना होता है. साथ ही इससे कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं बनता है.

अरबाज़ मेवाती ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में बताया कि उन्हें कैंपस के अंदर छात्रों को पानी उपलब्ध कराने की कोशिश के लिए हिरासत में लिया गया था, वहीं तीनों छात्रों के बारे में पुलिस डायरी की एंट्रीज़ में आरोप लगाया गया कि वे उपद्रव पैदा कर रहे थे और लोगों को उकसा रहे थे. उनके वकीलों का कहना है कि एसईएम अदालत ने उनके तर्कों को रिकॉर्ड पर नहीं लिया और न ही न्यायिक हिरासत में भेजने के कोई स्पष्ट कारण दिए गए.

गौरतलब है कि जामिया में 2005 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं ऐसे में जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ को बहाल करने की मांग, अब एक बड़े गतिरोध में बदल गई है. प्रशासन ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी कर कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे लेकिन प्रदर्शनकारी दोनों के लिए तय तारीखों की मांग कर रहे हैं. छात्रों और वकीलों का अब कहना है कि विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन कैंपस में असहमति और विरोध को दबाने के लिए पाबंदियों, नोटिसों, हॉस्टल ख़ाली करने के दबाव, प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने से रोक और हिरासतों का सहारा ले रहे हैं.


'मैं बस छात्रों तक पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहा था'


पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय अरबाज़ ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, "मैं बस अंदर के छात्रों तक पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहा था, उन्होंने मुझे हिरासत में ले लिया."

अरबाज़ के दोस्त सुल्तान कसाना ने बताया कि जब पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, तब वह और कुरैशी कैंपस के अंदर छात्रों को पानी मुहैया करा रहे थे.

कुरैशी और अरबाज़ से संबंधित जनरल डायरी की एंट्रीज़ के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर लोगों को उकसाया और विश्वविद्यालय के गेट नंबर 7 के बाहर भीड़ इकट्ठा करने की कोशिश की, जिससे अशांति फैली और छात्र न होते हुए भी कैंपस में घुसने का प्रयास किया.

इस बीच, निरंजन को कथित तौर पर गफ्फार मंज़िल से हिरासत में लिया गया. जनरल डायरी एंट्री के अनुसार, ऑन-ड्यूटी सब-इंस्पेक्टर नई दिल्ली के जामिया नगर में गफूर नगर पार्किंग के पास विश्वविद्यालय की बाहरी सीमा दीवार पर पहुंचे, जहां 24 वर्षीय पूर्व छात्र निरंजन को कथित तौर पर कैंपस के अंदर से दीवार फांदते हुए पाया गया.

डायरी में आरोप लगाया गया कि निरंजन ने ‘दिल्ली पुलिस मुर्दाबाद’ के नारे लगाए, छात्रों व राहगीरों को उकसाया और अशांति पैदा की. इसमें आगे कहा गया कि उन्होंने चेतावनियों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद थाना प्रभारी ने उन्हें हिरासत में लेने का निर्देश दिया. इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि निरंजन का नाम पिछले साल कैंपस में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में विश्वविद्यालय के पास दर्ज एक अन्य प्राथमिकी में भी शामिल था.


प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ - वकील 


तीनों हिरासत में लिए गए लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एमबी जावेद इकबाल ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि अदालत ने वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों को रिकॉर्ड पर नहीं लिया.

इकबाल ने कहा, "यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन है. अभियोजन पक्ष द्वारा हमें एमएलसी की प्रति तक नहीं दी गई."

यह हिरासत जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच हुई है, जो मंगलवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया था. छात्र संघ के संविधान को मंजूरी के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने के विश्वविद्यालय के फैसले के बावजूद छात्रों ने अपना आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है.

प्रदर्शनकारी छात्रों ने उन चुनावों के लिए एक निश्चित तारीख की मांग की है, जो 2005 से नहीं हुए हैं, साथ ही संविधान को मंजूरी देने के लिए एक स्पष्ट समय सीमा की मांग की है. क्लासेज़ ऑनलाइन जारी रहेंगी और विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि दूसरी मिड टर्म परीक्षाएं भी ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी.

रविवार रात प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच हुई बैठक से समाधान की उम्मीद जगी थी. दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित समझौते में कहा गया था कि यदि मांगें पूरी हो जाती हैं तो प्रदर्शन वापस ले लिया जाएगा, और प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय के खिलाफ दिए गए ‘अपमानजनक’ बयानों के लिए एक सार्वजनिक माफी जारी की जाएगी.

विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों में से पांच छात्र भूख हड़ताल पर थे. उनमें से तीन, जासिम अली खान, रेहान खान और रिदा ने अपना अनशन तोड़ दिया. दो अन्य रेहान खान और एबिन बासिल ने यह कहते हुए अपना अनशन जारी रखा कि उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं. मंगलवार दोपहर तक, तीन और छात्र भूख हड़ताल में शामिल हो गए. एसएफआई के अबूज़र, अल्ताफ और ऋतिक, जिससे अब भूख हड़ताल पर बैठे कुल छात्रों की संख्या पांच हो गई है.

27 अक्टूबर को प्रशासन से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर और फ्रेटरनिटी मूवमेंट के सदस्य लुबैब बशीर ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, "एक पैनल कमेटी बनाई गई है जिसने छात्रों की मांगों को कुलपति के पास पहुंचाया है. हमने उनसे कहा है कि 20 दिसंबर तक संविधान तैयार कर स्वीकृत किया जाना चाहिए और 6 फरवरी तक चुनाव कराए जाने चाहिए."

बशीर ने कहा कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच पिछला समझौता जल्दबाज़ी में हस्ताक्षरित किया गया था, जिससे केवल कुछ प्रदर्शनकारी ही सहमत थे. अनशन खत्म करने वाले जासिम अली खान के इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपलोड किए गए एक वीडियो में समझौते पर हस्ताक्षर होते दिख रहे हैं, जिसमें इसे स्वीकार करने को लेकर पीछे छात्र हंगामा कर रहे हैं.

बशीर ने न्यूज़लॉन्ड्री को उस बैठक के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, "प्रशासन की तरफ से इस नोटिस पर दस्तखत करने का दबाव था कि हमारी सारी मांगें पूरी हो गई हैं. हालांकि, चुनाव से जुड़ी हर चीज़ की समय-सीमा तय करने जैसे मुख्य बिंदु पर ध्यान नहीं दिया गया है." उन्होंने कहा कि प्रशासन ने नोट किया था कि अंतिम आदेश में सभी मांगों को शामिल किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.


कैंपस के आसपास भारी सुरक्षा

मंगलवार को क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के साथ ही, दोपहर भर कैंपस के आसपास लाउडस्पीकरों पर स्थिति के बारे में लोगों को चेतावनी देने और पत्रकारों को संबोधित करने की घोषणाएं जारी रहीं. दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा विश्वविद्यालय के हर गेट पर पहरा दिया जा रह है.

रविवार रात सुरक्षा उपस्थिति तुलनात्मक रूप से कम थी, जब प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत चल रही थी.

विश्वविद्यालय परिसर के बाहर आसपास जमा हुए छात्रों ने कहा कि कैंपस में प्रवेश और निकास पूरी तरह से रोक दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी भी अंदर खाना और पानी ले जाने की इजाज़त नहीं दी जा रही है.


नोटिस, कैंपस बैन और हॉस्टल खाली करने का दबाव

बशीर ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के कारण कुछ छात्रों को 'कैंपस बैन' और 'कारण बताओ नोटिस' दिए गए हैं. उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय से इन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं. मुझे भी कारण बताओ नोटिस मिला है."

रेहान खान को भी नोटिस दिया गया था. न्यूज़लॉन्ड्री द्वारा देखे गए इस नोटिस में कहा गया था कि यदि प्राप्तकर्ता ने विरोध स्थल को खाली नहीं किया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.  

इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के अंदर बैठे छात्रों ने, जहां धरना स्थानांतरित हो गया था, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है. नोटिस में आगे कहा गया है कि साइट पर जामिया के पूर्व छात्र भी मौजूद थे.

छात्रों ने यह भी कहा कि यह दबाव हॉस्टलों तक पहुंच गया है. जामिया के एक छात्र हमाद ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, "अनौपचारिक रूप से, छात्रों को हॉस्टल छोड़कर घर जाने के लिए कहा जा रहा है. कोई आधिकारिक आदेश नहीं है."

एक अन्य छात्रा रिबिनशा ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि 27 अक्टूबर की सुबह आईडी की जांच की गई और छात्रों से पूछा गया कि क्या वे हॉस्टल में रह रहे हैं. उन्होंने कहा, "वे छात्रों को डराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कैंपस के अंदर भीड़ कम रहे."

द टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स ने भी छात्रों के इसी तरह के आरोपों की रिपोर्ट की है.

न्यूज़लॉन्ड्री ने प्रतिक्रिया के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया है. हमने टिप्पणी के लिए दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया है. जवाब मिलने पर स्टोरी को अपडेट किया जाएगा.

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