यहां बसों की संख्या असामान्य रूप से ज़्यादा थी. करीब 20 से 30 बसें तैनात थीं. इनमें जालीदार ग्रिल लगी थीं और अंदर से बंद थीं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर लोग जब प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे तो दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ धरपकड़ का खेल खेला.
कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकारों ने देखा कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए उन्हें गलियों में खदेड़ रहे थे, घेर रहे थे और फिर घसीटकर बसों में भर रहे थे.
यहां बसों की संख्या असामान्य रूप से ज़्यादा थी. करीब 20 से 30 बसें तैनात थीं. इनमें जालीदार ग्रिल लगी थीं और अंदर से बंद थीं.
पुलिस ने हमारे पत्रकारों को बताया कि इन बसों का इस्तेमाल आमतौर पर जेल से अदालत तक विचाराधीन कैदियों को ले जाने के लिए किया जाता है. न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि महिला प्रदर्शनकारियों को भी धक्का देते हुए बसों में चढ़ाया गया.
प्रदर्शनकारी किसी एक जगह पर इकट्ठा नहीं हुए थे. वे पटेल चौक, टॉल्स्टॉय रोड, अशोक रोड और दूसरी जगहों पर छोटे-छोटे समूहों में जुटे थे. पुलिस ने इन जगहों पर उन्हें रोका और हिरासत में ले लिया.
बिहार से आए छात्रों ने हिरासत की कार्रवाई को सख़्त बताते हुए कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था. वहीं, छत्तीसगढ़ के रायपुर से आए एक व्यक्ति ने हिरासत में लिए जाते समय न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “मैं लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगने के लिए इतनी दूर रायपुर से आया हूं.”
उन्होंने टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर ज्ञानेश कुमार की तस्वीर छपी थी.
सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे वकीलों को भी हिरासत में लिया गया. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए देश की राजधानी के हालात को ‘अघोषित आपातकाल’ बताया.
पुलिस ने कुल कितने लोगों को हिरासत में लिया, इसकी संख्या अभी स्पष्ट नहीं थी.
देखिए रिपोर्ट.
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जंतर-मंतर प्रदर्शन: किले में तब्दील हुई राजधानी, हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात और रेल-मेट्रो पर लगी रोक