सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है. जंतर-मंतर जाने वाले रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई. साथ ही दिल्ली मेट्रो के स्टेशन्स पर आवाजाही बंद कर दी गई है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग कर निषेधाज्ञा (धारा 163) लागू कर दी. इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. वहीं, जंतर-मंतर के आसपास अब तक 12 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और इलाके में इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगाने की ख़बरें आ रही हैं.
गौरतलब है कि दिल्ली और मुंबई, दोनों जगह पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. ये प्रदर्शन गांधी जयंती के दिन हो रहे हैं. दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं और प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया. वहीं, मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करने की घोषणा की है.
उल्लेखनीय है कि जुलाई में पेपर लीक के खिलाफ सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी थी. अब सीजेपी, कई छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है.
यह मांग द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद उठी, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कुछ आदेश ऐसे थे जिनके बारे में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कहा था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी.
अखिल भारतीय छात्र संघ (आईसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) समेत कई छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर तक मार्च का ऐलान किया था. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी.
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप), आईसा, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) ने भी जंतर-मंतर पर इसी तरह के प्रदर्शन की घोषणा की थी.
दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। इसके तहत पूर्व लिखित अनुमति के बिना पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक रूप से जुटने, जुलूस, प्रदर्शन, पिकेटिंग और धरना देने पर रोक है. साथ ही नारे लगाने और भाषण देने पर भी प्रतिबंध है. इसके अलावा आग्नेयास्त्र, बैनर, पोस्टर, लाठी, तलवार, डंडे, ईंट-पत्थर या इसी तरह की अन्य वस्तुएं ले जाने पर भी रोक लगाई गई है.
जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है. इनमें टॉल्सटॉय मार्ग, जनपथ रोड और संसद मार्ग शामिल हैं.
उधर, दिल्ली मेट्रो ने 12 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद कर दिया है. इनमें बाराखंभा, राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ, पटेल चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं. ये स्टेशन अगले आदेश तक बंद रहेंगे. जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की भी खबरें हैं.
हिरासत में प्रदर्शनकारी
आम आदमी पार्टी के दिल्ली के प्रमुख सौरभ भारद्वाज प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और कहा कि “प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है.” उन्होंने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल अपने आवास के बाहर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश करेंगे.
इसके बाद भारद्वाज, अन्य आप नेताओं और प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटा दिया गया.
पीटीआई के मुताबिक, भारद्वाज ने एक बस के अंदर से वीडियो साझा किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी बैठे दिखाई दे रहे हैं और पुलिसकर्मी भी नजर आ रहे हैं. आप नेता संजीव झा को भी पुलिस अपने साथ ले गई.
इस दौरान भारद्वाज ने कहा, “बिना कार का इस्तेमाल किए मैं जंतर-मंतर पहुंचा हूं. आप भी यहां पहुंच सकते हैं. मुझे भरोसा है कि दोपहर तक बड़ी संख्या में जेन-ज़ी, महिलाएं और युवा चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए जंतर-मंतर पहुंचेंगे. प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है.”
उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें बता रही है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है. भारद्वाज के मुताबिक, आप ने छह दिन पहले शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आधिकारिक अनुमति मांगी थी.
भारद्वाज ने प्रदर्शनकारियों से पुलिस से नहीं डरने की अपील की, “भले ही पुलिस लाठी का इस्तेमाल करे.”
वहीं, प्रदर्शनस्थल पर पहुंचे राजद सांसद मनोज झा को भी हिरासत में लिया गया है.
मुंबई में भी प्रदर्शन का ऐलान
उधर, सीजेपी ने कहा है कि वह मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन करेगी. संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे और अक्टूबर के अंत से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीप्के ने गुरुवार को मुंबई में मीडिया से कहा, “ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और उन्हें आपराधिक आरोपों का सामना करना चाहिए.”
पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के सवाल पर दीप्के ने कहा, “मुझे जेल जाने का डर नहीं है. मैं बार-बार प्रदर्शन करने वापस आऊंगा.”
6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के सवाल पर दीप्के ने कहा कि सीजेपी किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेगी और एक स्वतंत्र आंदोलन के रूप में काम करेगी.
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