ज्ञानेश की गटर गंगा और महान लोकतंत्र की सौतेली संतान उमर खालिद

दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.

WrittenBy:अतुल चौरसिया
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लोकतंत्र की जड़ों में मट्ठा डालने का जो काम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुरू किया था उसके नतीजे सामने आ गए हैं. चुनाव आयोग के अंदर एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर जारी अंदरूनी मतभेद अब सामने आ गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के सहयोगी दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की. आपत्ति ये कि ज्ञानेश कुमार फैसले और आदेश उनकी जानकारी और सहमति के बिना ले रहे हैं. 

साथ में उमर खालिद है जिसे बिना मुकदमे, सुनवाई के छह साल जेल में पूरे हो गए हैं. न्याय के तंत्र में अन्याय का यह सिलसिला अभी कितना और चलेगा इसका इंतजार पूरा देश कर रहा है.

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