दिल्ली में एसआईआऱ शुरू होने से पहले 25,185 नाम हटाए गए और एसआईआऱ के बाद 37,315 नाम. इस तरह नई दिल्ली विधानसभा सीट से 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद कुल 62,500 मतदाता हटाए जा चुके हैं.
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में ‘ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन’ के कैंपस में जनवरी 2025 में मतदाता सूची में जोड़े गए 10 वोटरों के नाम अब हटा दिए गए हैं. ये नाम विधानसभा चुनाव से करीब एक महीने पहले जोड़े गए थे. इन्हें हटाए जाने की वजह “स्थायी रूप से स्थानांतरित” के तौर पर दर्ज की गई है.
गौरतलब है कि ये सभी इस संस्था के रेजिडेंशियल स्टूडेंट थे. यह संस्था एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल और वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर चलाती है. यहां स्किलिंग से जुड़े कोर्स कराए जाते हैं. एनजीओ के एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डेविड अब्सालोम ने बताया कि 2025 के चुनाव से पहले जिला प्रशासन ने संस्था से संपर्क कर दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक विशेष कैंप लगाने की बात कही थी. संस्था में प्रशासनिक कर्मचारी तेजिंदर सिंह बिष्ट ने बताया कि चुनाव अधिकारियों के साथ संस्था की लंबे समय से बातचीत चल रही थी.
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग के मैनुअल में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने की अनुमति है. यह ‘ऑर्डिनरिली रेजिडेंट’ यानी सामान्य तौर पर निवासी की शर्त पूरी करने के पात्र हो सकते हैं, बशर्ते उनका कोर्स कम से कम एक साल का हो और किसी सरकार, बोर्ड या विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हो. लेकिन इन छात्रों के नाम दो वजहों से हटाए गए.
पहली- उनमें से ज्यादातर अब दिल्ली के बाहर मतदाता के तौर पर पंजीकृत हैं. दूसरी- एसआईआऱ की प्रक्रिया के दौरान उनका रेजिडेंशियल स्किलिंग कोर्स पूरा हो चुका था.
हालांकि, इस बारे में हमारा छात्रों से तो संपर्क नहीं हो सका लेकिन पता चला कि हटाए गए नामों में से कुछेक छात्रों का एडमिशन जुलाई, 2024 में हुआ. इसके बाद जनवरी, 2025 में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ा और जून, 2025 में उनका कोर्स खत्म हो गया. यानि कि वोटर लिस्ट में जुड़ने के चार महीने के भीतर ही ये लोग चले गए.
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर लिस्ट की जांच से पता चलता है कि फरवरी, 2025 के चुनाव से ठीक पहले दो महीनों में मतदाता सूची में जोड़े गए ज्यादातर वोटरों के नाम इस साल के एसआईआर ड्राफ्ट में हटाए गए. जनवरी 2025 में जोड़े गए 1,430 वोटरों में से 560 यानी करीब 40 फीसदी के नाम हटा दिए गए हैं. वहीं दिसंबर, 2024 में जोड़े गए 2,369 वोटरों में से 783, यानी करीब एक-तिहाई नाम अब सूची में नहीं हैं.
इस विधानसभा क्षेत्र से 2025 में आम आदमी पार्टी के प्रमुख और तत्कालीन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भाजपा के प्रवेश वर्मा से मामूली अंतर (4 हजार) से चुनाव हार गए थे. विधानसभा चुनाव के दौरान यहां 1,08,788 मतदाता थे. एसआईआऱ में इनमें से 37,315 नाम हटा दिए गए, यानी करीब 34.3 फीसदी मतदाताओं के नाम हटे.
जनवरी, 2025 से जून, 2026 के बीच यानी एसआईआऱ शुरू होने से पहले ही इस विधानसभा क्षेत्र में 5,713 नए नाम जोड़े गए और 25,185 नाम हटाए गए. एसआईआऱ में हटाए गए 37,315 नामों को जोड़ दें तो 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद से इस सीट से कुल 62,500 मतदाता हटाए जा चुके हैं.
2025 के विधानसभा चुनाव और एसआईआर शुरू होने के बीच दिल्ली की मतदाता सूची से 11.1 लाख नाम हटाए गए थे. एसआईआऱ में 47.5 लाख और नाम हटाए गए. इन दोनों को मिलाकर फरवरी 2025 में 1.56 करोड़ वोटर वाली दिल्ली की मतदाता संख्या अगस्त, 2026 तक घटकर 97.5 लाख रह गई है.
अब ड्राफ्ट रोल से बाहर हुए लोग अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले अपना नाम दोबारा जुड़वाने की उम्मीद कर रहे हैं.
‘अब मेरा नाम दोबारा कैसे जुड़ेगा?’
दिल्ली की संकरी गलियों से गुजरते हुए एक चार मंजिला सफेद इमारत आती है. इसकी एक मंजिल पर 63 वर्षीय गिरीश चंद्र पाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ एक कमरे के घर में रहते हैं. यही कमरा उनके कपड़े और कारोबार से जुड़े दूसरे सामान रखने की जगह भी है.
शाम करीब 7 बजे जब हम पाल से मिले, तो वह घर पर अकेले थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पता है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है, तो वह हैरान रह गए.
उन्होंने कहा, “मुझे तो आपके बताने के बाद ही पता चला.”
उनकी पत्नी और दोनों बच्चों के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. पाल और उनका परिवार पिछले 20 साल से इसी इमारत में रह रहा है और पिछले 35 साल से इसी इलाके में रह रहा है. पाल का नाम दिसंबर, 2024 में मतदाता सूची में जोड़ा गया था यानी विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले और अब एसआईआऱ के बाद उनका नाम “स्थायी रूप से स्थानांतरित” होने की वजह से हटा दिया गया.
अब वह पूछ रहे हैं, “अब मेरा नाम दोबारा कैसे जुड़ेगा?”
ग्यारह वोटर कार्ड, जिन्हें कभी लेने कोई नहीं आया
दिसंबर, 2024 और जनवरी, 2025 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में जोड़े गए और अब हटाए गए मतदाताओं के नाम पूरे क्षेत्र में फैले हुए हैं. लेकिन सिर्फ जनवरी में हटाए गए नामों में से 173 पिलांजी गांव, सरोजिनी नगर के हैं.
जनवरी, 2025 में वहां एक ही पते पी-8, पिलांजी गांव, सरोजिनी नगर पर आठ लोगों को मतदाता के तौर पर पंजीकृत किया गया. इनमें अरुण कुमार, राजू कुमार, चंद्रेश, राहुल राणा, राजा, पप्पू सिंह, अंकित भान, सत्यवीर और दिगपाल सिंह के नाम शामिल थे. अब इन सभी के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और वजह “स्थायी रूप से स्थानांतरित” बताया गया है.
रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि इनमें से सिर्फ राजा का बतौर वोटर दिल्ली से नाम हटकर उत्तर प्रदेश के बदायूं में जुड़ गया है.
इमारत के मालिक सुनील बसोया ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके पते पर रहने वाले लोगों से कहीं ज्यादा वोटर पंजीकृत किए गए थे.
उन्होंने कहा, “करीब 11 फर्जी वोटर मेरे पते पर दर्ज किए गए थे और चुनाव आयोग ने इन लोगों के 11 वोटर कार्ड मेरे पते पर भेजे थे. जो भी कार्ड आए, वे अभी भी मेरे पास हैं. उन्हें लेने कोई नहीं आया. मैंने उस समय नियुक्त एईआरओ से इसकी शिकायत भी की थी. उन्होंने भरोसा दिया था कि वह इसे देखेंगे, लेकिन कुछ नहीं बदला.”
पिलांजी गांव घनी आबादी वाला इलाका है और नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के पांच पोलिंग बूथ 84 से 88 में आता है. 2025 में इन पांचों बूथों पर भाजपा के प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल से बढ़त बनाई थी.
बूथ 84 पर केजरीवाल को 325 वोट मिले, जबकि वर्मा को 394. इसी तरह बूथ 85 पर क्रमशः यह आंकड़ा 202 के मुकाबले 277, बूथ 86 पर 160 के मुकाबले 284, बूथ 87 पर 179 के मुकाबले 325 और बूथ 88 पर 107 के मुकाबले 214 था.
कुछ मतदाताओं ने शिकायत की, कि एन्यूमरेशन अवधि के दौरान कोई बीएलओ उनके घर नहीं आया और उन्हें फॉर्म भी नहीं मिले. इस पर बीएलओ मदन सिंह ने कहा कि पिलांजी घनी आबादी वाला इलाका है, जहां ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूर हैं.
उन्होंने कहा, “हम उनके घरों पर गए हैं, लेकिन ज्यादातर समय वे घर पर नहीं मिले. जिन लोगों से संपर्क हो पाया, उन्हें हमने फॉर्म दिए. जिन्होंने फॉर्म भरे, उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया, जबकि जिन्होंने फॉर्म नहीं भरे, उनके नाम एएसडीडी सूची में उचित कारण के साथ दर्ज किए गए.”
सिंह ने कहा कि बीएलओ ने अपनी तरफ से काम किया, लेकिन इलाके में मतदाताओं को ढूंढना मुश्किल था.
उन्होंने कहा, “एसआईआऱ के साथ हमें अपना नियमित काम भी करना होता है. उस इलाके में वोटरों को ढूंढना मुश्किल है. हमने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मकान मालिकों से भी संपर्क किया था”
नागरिकता साबित करने के लिए बिहार गया एक मौलवी
नई दिल्ली के पंचकुइयां रोड स्थित दरगाह सैयद हुसैन इलाके के निवासी और मौलवी जमशेद आलम का नाम दिसंबर 2024 में मतदाता सूची में जोड़ा गया था, यानी चुनाव से दो महीने पहले और एसआईआऱ के दौरान उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची से बाहर हो गया.
उन्होंने कहा, “मुझे डर था कि एसआईआऱ के दौरान मेरी पहचान खत्म हो जाएगी, इसलिए मैंने बिहार में आवेदन किया.”
आलम ने कहा, “हम कई साल से दिल्ली में रह रहे हैं. मैंने आखिरी बार 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट दिया था. दिल्ली चुनाव के बाद एसआईआऱ की घोषणा हुई. उस समय कहा गया था कि वोटर आईडी के लिए आपको अपने पिता और मां के वोटर आईडी की जानकारी देनी होगी, वरना आपकी नागरिकता संदिग्ध मानी जा सकती है. मेरे लिए यह स्थिति तनावपूर्ण और परेशान करने वाली थी. इसलिए मैं बिहार के अररिया चला गया, जहां मेरे पिता का संबंध है. हमारे कुछ रिश्तेदार वहां रहते हैं और वहां के बीएलओ को भी हम जानते हैं. इसलिए मैं वोटर कार्ड के लिए अररिया वापस चला गया.”
किदवई नगर ईस्ट में दिसंबर और जनवरी में जोड़े गए करीब 57 नाम भी हटा दिए गए हैं. इनमें तबिता जैस्पर विलियम का नाम भी शामिल है. उनका नाम जनवरी 2025 में बूथ नंबर 119 पर जोड़ा गया था. अब इसे “अनट्रेसेबल/अनुपस्थित” वजह के साथ हटा दिया गया है.
जब हमने उनकी मां जैस्पर विलियम से संपर्क किया तो उन्हें अपनी बेटी का नाम हटाए जाने की जानकारी नहीं थी.
उन्होंने कहा, “अब मेरी बेटी दिल्ली से बाहर एक कॉलेज में पढ़ रही है, इसलिए हमने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.”
इसी तरह सेंट्रल मार्केट में एक दुकान के पते पर पंजीकृत दो वोटरों लाल सिंह और भारतेन्दु शुक्ला के नाम भी मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उनसे संपर्क करने पर उन्हें भी एसआईआऱ के दौरान नाम हटाए जाने की जानकारी नहीं थी.
ईआरओ पीयूष मोहंती ने कहा कि बीएलओ द्वारा मतदाताओं के घर नहीं जाने की शिकायत सही नहीं है. उन्होंने कहा कि बीएलओ घरों पर गए थे, लेकिन पिलांजी में रहने वाले कई लोग प्रवासी हैं. कई लोग हैं उनमें से उन्होंने अपने फॉर्म जमा नहीं किए.
उन्होंने कहा, “किदवई नगर इलाके में, जहां ज्यादातर लोग सरकारी कर्मचारी हैं, बीएलओ ने उनसे संपर्क किया. लेकिन उनमें से कई लोग दूसरे घरों में शिफ्ट हो गए थे. इसलिए नियमों के मुताबिक हमने उनके नाम हटा दिए. हालांकि, दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान वे फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। हमने उन्हें इसकी जानकारी पहले ही दे दी है.”
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के छात्रों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैं इसकी जानकारी लेता हूं. फिलहाल मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.”
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