दिव्या का सीएम योगी से जवाब मांगने का वीडियो वायरल होने के बाद दक्षिणपंथी समर्थकों ने उन्हें निशाने पर ले लिया और इसके पीछे विपक्ष का हाथ बताया.
सीएम योगी आदित्यनाथ से सवालों के जवाब मांगने वाली पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव को ऑनलाइन धमकियों और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है. हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मुख्यमंत्री से सवालों के जवाब न मिलने पर टिप्पणी की थी. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इसके बाद उन्हें ट्रोलिंग, धमकियों और अभद्र भाषा का सामना करना पड़ा.
जानकारी के मुताबिक, वह इस वाकये के बाद लखनऊ छोड़कर दिल्ली आ गई हैं.
वायरल वीडियो में आखिर क्या?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिव्या श्रीवास्तव सीएम योगी से बार-बार कहती सुनाई दे रही हैं, "मुख्यमंत्री जी, सवाल का जवाब तो देते जाइए, प्रेसवार्ता है ये, मुख्यमंत्री जी प्रेस का हनन है ये".
वीडियो में दिख रहा है कि दिव्या के बोलने के दौरान सीएम योगी बिना उनकी ओर देखे प्रेस कॉन्फ्रेंस कक्ष से बाहर जा रहे हैं. इसके बाद दिव्या कहती हैं, "अगर आप प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रश्नों के जवाब नहीं देते हैं तो हमें बुलाया ही क्यों है? क्या सिर्फ अपनी बात सुनने के लिए बुलाया है?"
वीडियो वायरल होने के बाद दिव्या पर निशाना
वीडियो वायरल होने के बाद दिव्या को खासकर दक्षिणपंथी समर्थकों की ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि वह जवाब तो मांग रही हैं, लेकिन पहले यह बताएं कि उन्होंने सीएम योगी से क्या सवाल पूछा था. वहीं, कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें सीएम योगी की छवि खराब करने के लिए विपक्षी नेताओं ने भेजा था. दिव्या इन आरोपों से इनकार करती हैं और इन्हें झूठा बताती हैं.
इन आरोपों के जवाब में दिव्या ने एक वीडियो शेयर किया. उन्होंने कहा, "समझ नहीं आ रहा है कि भाजपा समर्थक अंधे हैं क्या? मैं लगातार कह रही हूं कि मैं गई थी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने के लिए, सीएम योगी ने मुझे देखा, वह मेरे सामने ही थे. मुझे सीएम योगी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन भाजपा समर्थक और कुछ सोशल मीडिया क्रिएटर मुझे लगातार परेशान कर रहे हैं और मेरे खिलाफ नेगेटिव वीडियो बना रहे हैं".
सवाल पूछने के बाद हंसने पर भी उठे सवाल
वायरल वीडियो में दिव्या को सवाल पूछने के बाद हंसते हुए भी देखा जा सकता है. इसे लेकर कई लोगों ने उनकी नीयत पर सवाल उठाए. इसके जवाब में दिव्या ने कहा कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा था तो वह बहुत ही शालीनता से मुस्कुराकर वहां से चले गए. इसके बाद उन्हें हल्की-सी हंसी आ गई.एक स्वतंत्र मीडिया जिन सवालों के जवाब मिलने चाहिए उन सवालों को पूछ कर जनतंत्र को थामे रखता है, जिन कहानियों को कहना जरूरी है उन्हें कह कर उसे बचाए रखता है. स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें. आज ही सब्सक्राइब करें.
दिव्या ने कहा कि वह एक पत्रकार हैं और उनका काम सवाल करना है. उन्होंने बताया कि वह अखिलेश यादव, सांसद संजय सिंह समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं से भी सवाल पूछती रहती हैं.
राजनीतिक दलों ने किया समर्थन
एक ओर जहां सोशल मीडिया पर दिव्या को निशाने पर लिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर लोग उनका समर्थन भी कर रहे हैं. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित कई राजनीतिक दल और संगठन उनके समर्थन में आगे आए हैं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “भाजपा पत्रकारों को मूक श्रोता बनाना चाहती है. तानाशाही और दानाशाही को चुनौती देनेवाली साहसिक पत्रकारिता की आवाज अब और नहीं दबाई जा सकती है.”
इसके अलावा उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरपर्सन सी.पी राय ने कहा कि अगर आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है तो उसमें सवाल होंगे. ये परंपरा है. उसी परंपरा के तहत दिव्या ने सवाल पूछा था. ये कोई अपराध नहीं.
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