एक स्थानीय अदालत ने दो साल पहले जम्मू प्रेस क्लब में सितंबर, 2024 तक चुनाव करवाने का निर्देश दिया. लेकिन दो साल बाद भी मतदान नहीं हुआ है जबकि निगरानी कमेटी मोटा पैसा खर्च कर अपने पद पर बनी हुई है.
जुलाई, 2024 में जम्मू की एक जिला अदालत ने दो सेवानिवृत्त जजों को एक साफ और सीधी जिम्मेदारी दी. जम्मू प्रेस क्लब के लंबित चुनाव ‘हर हाल’ में 30 सितंबर तक कराए जाएं.
इस बात को दो साल से अधिक का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक चुनाव नहीं हो पाए हैं. साथ ही दोनों पूर्व जज अब भी अपने पद पर बने हुए हैं. और, इसके बदले में क्लब उन्हें हर महीने एक-एक लाख रुपये दे रहा है, ताकि वे क्लब के खातों की निगरानी कर सकें.
ये दोनों जज 49 कर्मचारियों की तनख्वाह, बार के बिल और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने से जुड़े भुगतान पर मंजूरी देते हैं. यह काम वह कभी क्लब के समिति कक्ष से तो कभी अकाउंट्स कार्यालय से और कभी अपने घर से करते हैं.
करीब 870 पत्रकारों की सदस्यता वाले इस संगठन के लिए यह व्यवस्था विचित्र लगती है.
खासकर तब जब इसके सदस्य पत्रकार अपना पूरा कामकाजी जीवन सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों से यह पूछते हुए बिताते हैं कि उनकी प्रक्रियाएं क्यों अटकी हुई हैं, लेकिन ये खुद दो साल से अपना चुनाव नहीं करा पाए हैं.
दोनों पूर्व जजों ने अब तक उन्हें मिली रकम की स्पष्ट जानकारी देने से तो इनकार किया लेकिन अनुमान के मुताबिक, जुलाई 2024 से क्लब दोनों को करीब 50 लाख रुपये का भुगतान कर चुका है.
क्लब के कुछ सदस्यों का कहना है कि यह रकम क्लब की इमारत की मरम्मत पर खर्च की जा सकती थी, जिसका वर्षों से इंतजार है.
जिला अदालत के अलावा यह मामला हाई कोर्ट भी पहुंच चुका है. और इस विवाद के केंद्र में जम्मू के हर रिपोर्टर के लिए जाने-पहचाने दो नाम हैं.

Independent journalism is not possible until you pitch in. We have seen what happens in ad-funded models: Journalism takes a backseat and gets sacrificed at the altar of clicks and TRPs.
Stories like these cost perseverance, time, and resources. Subscribe now to power our journalism.
Annual auto-renew
Annual auto-renew
Already a subscriber? Login