नाबालिग बस गैंगरेप: दिल्ली और नोएडा पुलिस आमने-सामने, 27 दिनों तक क्यों छिपाई घटना 

4 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर एक बार फिर से निर्भया कांड दोहराया गया. 31 अगस्त को इसकी जानकारी जनता के सामने आई. पूर्व डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि ये अहम सवाल तो है कि घटना की जानकारी देर से क्यों दी गई लेकिन ये भी देखना होगा कि इसकी वजह क्या कानून व्यवस्था का सवाल था या कुछ और. 

WrittenBy:अवधेश कुमार
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नोएडा और दिल्ली पुलिस के लोगो. पृष्ठभूमि में बस की तस्वीर.

4 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दौड़ रही एक बस में एक नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ. “UP83 ET 3789” रजिस्ट्रेशन नंबर वाली बस नोएडा से दिल्ली में दाखिल हुई, और घंटों तक दिल्ली-नोएडा की सड़कों पर दौड़ती रही. इस दौरान नाबालिग लड़की से बस कंडक्टर और ड्राइवर हैवानियत करते रहे. 

31 अगस्त को यह मामला बाकी दुनिया की जानकारी में आया. पूरे 27 दिन तक दिल्ली पुलिस ने इस मामले को दबाए रखा. अब इस घटना के चलते दिल्ली पुलिस और नोएडा पुलिस आमने-सामने आ गए हैं. नोएडा पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में उसे गुमराह किया और 27 दिनों तक इतने संगीन अपराध की कोेई जानकारी साझा नहीं की. नोएडा पुलिस के मुताबिक, उसे इस मामले की जानकारी पहली बार मीडिया के माध्यम से मिली. 

दरअसल, उत्तरी दिल्ली की डीसीपी निहारिका भट्ट ने 31 अगस्त को इस घटना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 4 अगस्त की रात को कश्मीरी गेट थाने में एक 17 वर्षीय लड़की ने आकर सूचना दी कि उसके साथ नोएडा में एक बस में दुष्कर्म हुआ है. 

यह चौंकाने वाली बात है कि घटना 4 अगस्त की रात की है और दिल्ली पुलिस ने 31 अगस्त को पहली बार इस बारे में जानकारी साझा की. हालांकि दिल्ली पुलिस ने घटना संज्ञान में आते ही तत्परता से कार्यवाही की. निहारिका भट्ट के मुताबिक, कश्मीरी गेट थाने में पीड़िता से पूछताछ के दौरान पता चला कि लड़की उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से नोएडा के सेक्टर 63 स्थित अपने एक रिश्तेदार के घर जा रही थी. वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक से नोएडा, सेक्टर 63 जाने के लिए एक बस में सवार हुई. उस बस में लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ. घटना के बाद बस चालक और कंडक्टर लड़की को रिंग रोड पर कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में बस से उतार कर फरार हो गए. 

भट्ट ने अपने बयान में कहा कि मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को समझते हुए बिना ज्यूरिडिक्शन इश्यू में गए हुए थाना कश्मीरी गेट ने तुरंत पीड़िता का मेडिकल चेकअप कराया और केस दर्ज किया. इसके बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की मदद से कुछ ही घंटों में घटना में इस्तेमाल हुई बस को खोज लिया. और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पीड़िता को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष पेश करके उसके आदेशानुसार परिजनों को सुपुर्द कर दिया. इस केस की जांच अभी जारी है.

एक तरफ दिल्ली पुलिस ने तुरत-फुरत में कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, दूसरी तरफ उसने अगले 27 दिनों तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी. यहां तक कि नोएडा पुलिस को भी इस मामले में कोई जानकारी साझा नहीं की गई. नोएडा पुलिस के एक अधिकारी, जो इस मामले की जांच से जुड़े हुए हैं, उन्होंने बताया, “हमारे हाथ आज भी पूरी तरह खाली हैं. नोएडा पुलिस को कोई जानकारी नहीं लगने दी गई.” यहां तक कि पहली बार उसे इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से हुई. 

एक तरफ दिल्ली पुलिस इस मामले में फुर्ती से कार्रवाई कर रही थी, दूसरी तरफ वो इस मामले को पूरी तरह से दबाए हुए थी. ऐसे में कुछ अहम सवाल पैदा होते हैं, जिसकी पड़ताल करने पर एक अलग ही तस्वीर सामने आई. पहला सवाल तो यही है कि इतने लंबे समय तक घटना को दिल्ली पुलिस ने क्यों छिपाया? दिल्ली पुलिस ने बयान जारी किया कि अपराध नोएडा में हुआ, तो फिर नोएडा पुलिस को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं दी गई? कानूनन कश्मीरी गेट थाने को ज़ीरो एफआईआर दर्ज करके मामला नोएडा पुलिस को ट्रांसफर कर देना चाहिए था. 

नोएडा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, “दिल्ली पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करके जांच के लिए नोएडा पुलिस को भेज देना चाहिए था. फिर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने का काम हमारा था. लेकिन दिल्ली पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद रिमांड पर लेकर उन्हें जेल भी भेज दिया और हमें कानों-कान खबर तक नहीं हुई.” 

खैर इस सवाल की पड़ताल के दौरान कुछ और भी जानकारियां हमारे सामने आईं, जो दिल्ली पुलिस की भूमिका पर संदेह पैदा करती हैं. नोएडा पुलिस के एक अधिकारी, जो जांच से जुड़े हैं, ने हमें बताया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस हमें लगातार गुमराह करती रही. घटना की जानकारी मिलने पर हमने तमाम इलाकों के सीसीटीवी खंगाले लेकिन हमें कुछ नहीं मिला. एक तो मामला करीब एक महीने पुराना था तो दूसरा बहुत सारे सीसीटीवी कैमरे काम भी नहीं कर रहे थे.

उक्त अधिकारी ने हमें बताया कि कि चार अगस्त को घटना से पहले वह बस सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप पर करीब एक हफ्ते से खड़ी थी. जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस जांच के दौरान उस वर्कशॉप पर गई और वहां पर लगे सारे सीसीटीवी फुटेज लेकर चली गई. बाद में जब ग्रेटर नोएडा पुलिस वर्कशॉप पर पहुंची तो उसके हाथ कुछ नहीं लगा. 

नोएडा पुलिस के अधिकारी ने बताया, “वर्कशॉप पर एक सप्ताह से खड़ी बस 4 अगस्त को करीब 3:30 बजे दिन में यहां से निकली. यह वर्कशॉप सूरजपुर थाने से करीब 6-7 किलोमीटर की दूरी पर है.” 

वे आगे बताते हैं, “वर्कशॉप पर लगे सीसीटीवी की एक सप्ताह की फुटेज दिल्ली पुलिस अपने साथ लेकर चली गई. दिल्ली पुलिस 6 या 7 अगस्त को वहां गई थी. हमें दिल्ली पुलिस ने जानकारी नहीं दी थी वरना हम उनकी मदद करते.”

31 अगस्त को सेंट्रल नोएडा, ग्रेटर नोएडा, एसओजी टीम और मैनपुरी पुलिस की एक टीम ग्रेटर नोएडा गई. उन्होंने परी चौक और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी खंगाले. इस इन्वेस्टिगेशन टीम का हिस्सा रहे एक सदस्य ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “दिल्ली पुलिस शुरू से ही इस मामले को दबाने में लगी थी. 4 अगस्त को घटना हुई और 5 अगस्त से ही आरोपी दिल्ली पुलिस के कब्जे में थे. ऐसे में यूपी पुलिस से संपर्क नहीं करना संदेह पैदा करता है.” उनका दावा है कि नोएडा पुलिस ने दिल्ली पुलिस से जब साक्ष्य मांगे तो उन्होंने कुछ भी साझा नहीं किया. 

एक रिपोर्ट के मुताबिक 11 अगस्त को भी दिल्ली पुलिस नोएडा पुलिस के कंट्रोल रूम आई थी. उन्होंने एक अन्य मुकदमे के संबंध में चार अगस्त की एक्सप्रेसवे की सीसीटीवी फुटेज दिखाने के लिए कहा. इसके बाद पुलिस वो सारा फुटेज अपने साथ ही ले गई. वह सवाल जस का तस है कि जब दिल्ली पुलिस इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर रही थी फिर वो नोएडा पुलिस को अंधेरे में क्यों रख रही थी. 

नोएडा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी इस सवाल का जवाब देते हैं, “दिल्ली पुलिस ऊपरी दबाव में थी. जिस दिन की यह घटना है, उस समय दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के ऊपर किए गए दमन के चलते काफी आलोचना झेल रही थी. इसके अलावा राजनीतिक माहौल ऐसा था कि विपक्ष लगातार संसद भवन में सरकार को घेर रही थी. अमित शाह संसद से गायब थे. संसद चल नहीं रही थी. ऐसे में अगर गैंगरेप की एक और घटना उसी समय उजागर हो जाती तो राजनीतिक बखेड़ा खड़ा हो जाता और सरकार के लिए बहुत असहज स्थिति पैदा हो जाती. इसलिए दिल्ली पुलिस जानबूझकर मामले को दबाने में लगी रही.”

क्या कहती है दिल्ली पुलिस?

इस मामले को लेकर हमने दिल्ली पुलिस की डीसीपी निहारिका भट्ट से बात की. वह कहती हैं, “मैंने उस बारे में एक वीडियो स्टेटमेंट दिया है. वही मेरा आखिरी बयान है. मैं इस पर अब कोई कमेंट नहीं कर सकती हूं. अभी हमारा फोकस सिर्फ जांच पर है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके.”

कानूनी रूप से कितना पेंच?

इसके कानूनी पक्ष पर हमने हरियाणा के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह से बात की. वह कहते हैं, “देखिए, पुलिस को अगर लगता है कि किसी कार्रवाई से आगे चलकर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ सकती है, तो वह उस कार्रवाई से बचती है. ऐसी स्थिति में फैसला एक टैक्टिकल और लीगल इनपुट के आधार पर लिया जाता है. यह एक टैक्टिकल चॉइस है.”

सिंह ने कहा, “कानूनी तौर पर अगर कहीं भी मुकदमा दर्ज होता है, तो उसकी तफ्तीश की जा सकती है. लेकिन जब चार्जशीट दाखिल करने की बात आएगी, तो घटना जिस थाना क्षेत्र में हुई है, उसी क्षेत्र के संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने मामला जाएगा और वहीं ट्रायल होगा.

अगर दिल्ली पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके इसकी तफ्तीश की है, तो इसमें अपने आप में कुछ गैर-कानूनी नहीं है. नोएडा पुलिस को जांच में लूप में रखा गया या नहीं, इससे इस कानूनी स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ता. दिल्ली पुलिस अपनी तफ्तीश पूरी कर सकती है, लेकिन आगे चार्जशीट और ट्रायल घटना वाले क्षेत्र में ही होगा.”

घटना के बारे में देरी से जानकारी दिए जाने को लेकर सिंह कहते हैं, “अगर दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जानकारी यूपी पुलिस से 25-27 दिनों तक छिपाए रखी तो मेरे हिसाब से यह एक बड़ा सवाल और जांच का अहम एंगल है. यह देखना होगा कि क्या ऐसा इसलिए किया गया ताकि कोई बवाल न हो, कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े या मामला मीडिया से भी छिपा रहे.”

जांच अभी जारी 

ग्रेटर नोएडा के परी चौक से कश्मीरी गेट की दूरी करीब 47 किलोमीटर है. इस दायरे के लगभग 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. दरअसल पुलिस अभी भी बस का असल में रूट तय नहीं कर पाई है. यह एक स्लीपर बस थी और जिसमें पर्दे लगे थे.  

नाबालिग पीड़िता 11 वीं की छात्रा है. वह अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश मैनपुरी जिले के एक गांव में रहती है. पीड़िता द्वारा पुलिस को दिए बयान के मुताबिक तीन अगस्त को उसकी मां ने डांटा था. इसके बाद वह नाराज होकर चार अगस्त को घर से निकल गई. वह नोएडा सेक्टर 63 स्थित अपने ताऊ के घर जाने के लिए निकली थी. बारिश और अंधेरा होने के चलते वह गलती से परी चौक उतर गई. वहां पर वह उस बस में सवार हुई. कंडक्टर संदीप ने उसे बताया था कि वह नोएडा सेक्टर 63 जाएंगे. आरोप है कि बस चलने के कुछ देर बाद कंडक्टर ने छात्रा के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. और ग्रेटर नोएडा के परी चौक से कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर तक दुष्कर्म को अंजाम दिया गया. इसके बाद आरोपी उसे घटना स्थल से दूर रिंग रोड पर कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में उतारकर फरार हो गए. पुलिस ने आरोपी चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को तिमारपुर पार्किंग से गिरफ्तार किया. 

जानकारी के मुताबिक, फिलहाल पीड़ित परिवार ने मैनपुरी स्थित गांव छोड़ दिया है. आखिरी बार वह रक्षाबंधन पर घर पर थे. घर पर ताला लटका है. पीड़िता का परिवार और रिश्तेदार कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं. पिता ने अपना फोन भी स्विच ऑफ कर लिया है. जानकारी के मुताबिक पुलिस ने परिवार को किसी से भी बात करने के लिए मना किया है. 

दिल्ली में चलती बस में बलात्कार की तीन महीने के भीतर दूसरी घटना है. इससे पहले एक फैक्टरी में काम करने वाली 30 वर्षीय महिला के साथ चलती बस में गैंगरेप हुआ था.

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