Exclusive: उत्तराखंड में हजारों मुसलमानों के वोट हटाने के लिए भाजपा नेताओं ने दिए आवेदन 

एसआईआर के तहत दर्ज, इन आपत्तियों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल होने के अलावा एक और बात सामने आती है. बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल करने को लेकर चुनाव आयोग के नियमों में हाल के वर्षों में बदलाव हुआ है.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की गई हैं. न्यूज़लॉन्ड्री के विश्लेषण में इन आपत्तियों का एक खास पैटर्न सामने आया है.

राज्य की पांच विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराने वाले पांच लोग भाजपा से जुड़े हुए हैं. इनमें से चार सीटों पर जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, वे सभी मुस्लिम हैं.

उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में इन पांच लोगों ने सबसे ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराई हैं. इनकी ओर से दाखिल आपत्तियों की संख्या 230 से लेकर 4,855 तक है. तीन सीटों पर एक ही व्यक्ति ने नाम हटाने के लिए आई कुल आपत्तियों में से 49 से 99 फीसदी तक आवेदन खुद दाखिल किए.

इन आपत्तियों में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल होने के अलावा एक और बात सामने आती है, बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल करने को लेकर चुनाव आयोग के नियमों में हाल के वर्षों में बदलाव हुआ है.

बड़ी संख्या में आवेदन करने के नियमों में बदलाव

चुनाव आयोग के 2023 के वोटर लिस्ट मैनुअल के मुताबिक, बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) एक दिन में 10 से ज्यादा आवेदन दाखिल नहीं कर सकता था.

बाद में कई राज्यों में एसआईआर से पहले चुनाव आयोग ने यह सीमा बढ़ाकर 50 आवेदन प्रतिदिन कर दी. लेकिन इस साल जनवरी में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए एक पत्र में आवेदन संख्या की यह सीमा पूरी तरह हटा दी गई.

न्यूज़लॉन्ड्री ने जिन पांच विधानसभा सीटों का विश्लेषण किया, उनमें से कम से कम एक सीट के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) ने इसी पत्र का हवाला दिया है.

ये सभी आपत्तियां ‘दावे और आपत्तियों’ के चरण में दाखिल की गईं, जो 13 अगस्त को खत्म हुआ. इसके बाद 11 सितंबर तक नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया चलेगी. अंतिम वोटर लिस्ट 15 सितंबर को जारी की जानी है.

चुनाव आयोग ने 14 जुलाई को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की थी. इसमें 71.3 लाख मतदाताओं के नाम थे, जबकि इससे पहले यह संख्या 79.6 लाख थी.

किच्छा: 4,857 में से 4,855 आपत्तियां एक शख्स की
ऊधम सिंह नगर जिले की किच्छा विधानसभा सीट पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए कुल 4,857 आपत्तियां दर्ज की गईं. इनमें से 4,855 आपत्तियां अकेले राजेश तिवारी ने दर्ज कराईं.  ‘हिंदुस्तान’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तिवारी भाजपा के बूथ लेवल एजेंट हैं. उनकी ओर से जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, वे सभी मुस्लिम हैं.

तिवारी की ज्यादातर अर्जियों में नाम हटाने का एक ही कारण बताया गया है- “पहले से ही नामांकित.” यानी दावा किया गया कि संबंधित मतदाता का नाम पहले से किसी दूसरी जगह की वोटर लिस्ट में दर्ज है. इसके अलावा कुछ में स्थानांतरण का कारण दर्ज है. 

इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए तिवारी से संपर्क नहीं हो सका.

हालांकि, किच्छा से भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की ओर से हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि तिवारी की ओर से बूथ स्तर पर की गई आंतरिक समीक्षा में सामने आया कि किच्छा की वोटर लिस्ट में कथित तौर पर 8,000 से ज्यादा ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत और रामपुर जिलों की वोटर लिस्ट में भी दर्ज हैं.

किच्छा में करीब 28.4 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. 2022 में कांग्रेस के तिलक राज बेहड़ ने दो बार विधायक रहे राजेश शुक्ला को 10,000 से ज्यादा वोटों से हराकर यह सीट जीती थी.

राजेश तिवारी ने जिन लोगों के नाम पर आपत्ति दर्ज करवाई है, उनमें से एक रहीस अहमद भी हैं. तिवारी ने अपने आवेदन में रहीस के लिए ‘स्थानांतरण’ को आपत्ति का आधार बनाया है. इस आपत्ति पर रहीस अहमद न्यूज़लॉन्ड्री को बताते हैं, “मेरी उम्र करीब 60 साल है और मेरा जन्म यहीं हुआ है. मैंने दो बार पंचायत चुनाव लड़ा है और हरीश रावत सरकार के दौरान राज्य मंत्री भी रहा हूं.”

वह कहते हैं,  “हमारे विधानसभा क्षेत्र में करीब 45 से 50 हजार मुस्लिम मतदाता हैं और पिछले चुनाव में भाजपा यह सीट हार गई थी. अब वह मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाना चाहते हैं. यह सब पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला और उनके सहयोगियों द्वारा किया जा रहा है.”

वह आगे बताते हैं, “अभी तक मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है और बीएलओ ने भी मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.”

गदरपुर: एक व्यक्ति ने दर्ज कराईं 670 आपत्तियां

ऊधम सिंह नगर की गदरपुर विधानसभा सीट पर किसी एक व्यक्ति की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों की संख्या राज्य में दूसरी सबसे ज्यादा है. इस सीट पर नाम हटाने के लिए कुल 1,370 आपत्तियां दर्ज हुईं. इनमें से 670 अकेले चंकित हुरिया ने दर्ज कराईं. उनकी ओर से जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, वे सभी मुस्लिम हैं.

हुरिया की फेसबुक प्रोफाइल पर भाजपा में उनके कई पदों का जिक्र है. इनमें काशीपुर के जिला उपाध्यक्ष और जिला सचिव और गदरपुर के शहर अध्यक्ष का पद शामिल है. उनकी प्रोफाइल पर भाजपा नेताओं के साथ कई तस्वीरें भी हैं.

हुरिया ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि उन्होंने भाजपा के बीएलए-1 के तौर पर करीब 900 मतदाताओं की एक सूची सौंपी है. उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस विधानसभा क्षेत्र में जांच के दौरान ऐसे मतदाताओं के बारे में पता चला, जिनके नाम दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं.

उन्होंने कहा कि इन डुप्लीकेट एंट्री को हटाने के लिए स्थानीय ईआरओ यानी स्थानीय एसडीएम को आवेदन दिया गया है और मामले की समीक्षा की जा रही है.

मालूम हो कि भाजपा के अरविंद पांडे ने 2022 में गदरपुर सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है. हालांकि, इस बार जीत का अंतर मात्र 1,120 वोट तक आ पहुंचा. जबकि 2017 में उन्होंने यह सीट 14 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीती थी.

2011 की जनगणना के मुताबिक, गदरपुर सीट पर 21.5 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) के मतदाताओं की हिस्सेदारी 11.34 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की 7.7 प्रतिशत है.

खटीमा: 394 में से 392 आपत्तियां एक व्यक्ति की

खटीमा विधानसभा सीट पर नाम हटाने के लिए 394 आवेदन दाखिल किए गए हैं. इनमें से 392 यानी करीब 99 फीसदी आवेदन अमित कुमार पांडे ने दिए हैं. पांडे ने जिन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति की, वह सभी मुस्लिम हैं.

उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर मौजूद वीडियो और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पांडे भाजपा के जिला उपाध्यक्ष और पार्टी के बूथ लेवल एजेंट हैं. उनसे प्रतिक्रिया के लिए संपर्क नहीं हो सका.

मालूम हो कि खटीमा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पारंपरिक सीट रही है. उन्होंने 2012 और 2017 में यहां से चुनाव जीता था. 2022 में कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी ने धामी को 6,579 वोटों से हराया. इसके बाद धामी चंपावत से उप-चुनाव जीतकर विधानसभा लौटे.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा 2022 में हारी हुई 23 सीटों पर विशेष नजर रख रही है. खटीमा भी इस सूची में शामिल है और पार्टी ने यह सीट खुद धामी को सौंपी है. खटीमा में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 8 फीसदी है.

नानकमत्ता: 391 में से 353 आवेदन एक व्यक्ति के

नानकमत्ता विधानसभा सीट पर दाखिल 391 फॉर्म-7 आवेदनों में से 353 यानी करीब 90 फीसदी किशोर जोशी की ओर से दाखिल किए गए हैं.

जोशी खुद को भाजपा का बीएलए बताते हैं. हालांकि, आवेदनों में डाटा एंट्री की गलती के चलते उनका नाम “किशर कुमार” दर्ज है.

जोशी की सभी आपत्तियां मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ थीं. उनके 351 आवेदनों में नाम हटाने का एक ही कारण बताया गया- “शिफ्टेड”, यानी मतदाता का दूसरी जगह चले जाने का दावा.

किशोर जोशी ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि वह पहले युवा मोर्चा के जिला महासचिव, मंडल अध्यक्ष और राज्य सचिव रह चुके हैं. उनके मुताबिक, इस बार पार्टी ने उन्हें चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी दी है.

उनका दावा है कि नाम हटाने के ये अनुरोध उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से उत्तराखंड में हुए बड़े पैमाने के पलायन से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में मुस्लिम-बहुल इलाकों में मतदान प्रतिशत में असामान्य वृद्धि देखने को मिली है.

जोशी के मुताबिक, भाजपा के 142 बीएलए के सहयोग से की गई आंतरिक जांच में पाया गया कि कई लोगों ने उत्तर प्रदेश में अपना मतदाता पंजीकरण रद्द किए बिना उत्तराखंड में भी अपना नाम दर्ज कराया है. 

उन्होंने दावा किया कि उनके सभी आवेदनों के समर्थन में सत्यापन योग्य दस्तावेज हैं, जिन्हें औपचारिक सुनवाई के दौरान पेश किया जाएगा. किशोर जोशी ने फॉर्म-7 में अरिफ का नाम दिया है. उनके नाम को हटाने का कारण “अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित” बताया गया. 

न्यूजलॉन्ड्री से बात करते हुए अरिफ ने कहा, “मैं पिछले 10 साल से यहां रह रहा हूं और पिछले चुनाव में भी वोट दिया था. मैंने एसआईआर के पहले चरण में अपने दस्तावेज जमा किए थे. फिर पिछले हफ्ते मुझे बीएलओ का फोन आया, जिसमें मेरे माता-पिता से जुड़े दस्तावेज मांगे. मेरे पिता अब नहीं रहे, इसलिए मैंने अपनी मां का वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज जमा किया. मुझे नहीं पता था कि मेरा नाम हटाने के लिए सूची में डाला गया है. मुझे तो आपसे ही इसकी जानकारी मिली.” 

अरिफ ने कहा कि उन्हें अपने नाम पर की गई आपत्ति या नाम हटाने के प्रस्ताव को लेकर कोई नोटिस नहीं मिला.

नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र से दो अन्य नाम शफीकन और मोहम्मद करीम के हैं. ये दोनों पति-पत्नी हैं. आपत्ति दर्ज कराने वालों में से एक पर किशोर जोशी और दूसरे पर नवल किशोर जोशी का नाम दर्ज है. 

दंपत्ति के बेटे नाज़िम ने न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहा, “हमें बिल्कुल नहीं पता था कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए दिए गए हैं. मेरे पिता 2003 से पहले से यहां रह रहे हैं. हमने पिछले चुनाव में भी वोट दिया था. हमें कोई नोटिस नहीं मिला और बीएलओ ने भी हमें इसकी जानकारी नहीं दी. बीएलओ का केवल मेरी पत्नी के वोटर आईडी से जुड़ी कुछ जानकारी के लिए फोन आया था. हम नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता हैं.”

किशोर जोशी द्वारा दाखिल आपत्तियों के अलावा भाजपा कार्यकर्ता भुवन चंद जोशी ने भी 10 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं. भुवन ने जिन नामों पर आपत्ति दी है, उनमें से एक नाम वाहिद का भी है. 

न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए वाहिद के भाई इकबाल कहते हैं, “वाहिद मेरा छोटा भाई है. हमें आज ही पता चला कि हमारे नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए दिए गए हैं. हम दोनों यहीं पैदा हुए हैं. हमें कोई नोटिस नहीं मिला. हालांकि, मेरी मां को उनके नाम से जुड़े एक मुद्दे को लेकर नोटिस मिला था, जिसके बाद उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे. लेकिन हम दोनों में से किसी को भी कोई नोटिस नहीं मिला.”

गौरतलब है कि 2022 में कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा ने नानकमत्ता सीट 13,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीती थी.

रुद्रपुर: 2,818 नाम हटाने के आवेदन, ज़्यादातर मुस्लिम मतदाता 

ऊधम सिंह नगर की रुद्रपुर विधानसभा सीट पर नाम हटाने के लिए 2,818 आवेदन मिले. इनमें सबसे बड़ी सूची 230 नामों की थी, जिसे सनी पासवान ने दाखिल किया. फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक, पासवान रुद्रपुर में भाजपा के एससी मोर्चा के शहर महासचिव हैं.

न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि वह भाजपा के बीएलए हैं. उन्होंने कहा, “मैंने आपत्तियां दर्ज कराई हैं. जिन लोगों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गई हैं, उन्हें अपना नाम जुड़वाने के लिए अपने दस्तावेज पेश करने होंगे.”

चार अन्य लोगों ने भी 100 से ज्यादा नामों पर आपत्तियां दर्ज कराईं. इन सभी आपत्तियों में जिन मतदाताओं के नाम थे, वे मुस्लिम थे.

रुद्रपुर में करीब 11.3 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. भाजपा ने पिछले तीन विधानसभा चुनावों में यह सीट जीती है.

नए नियम क्या कहते हैं?

चुनाव आयोग के 2023 के वोटर लिस्ट मैनुअल में ‘बल्क एप्लीकेशन’ ऐसे आवेदन को कहा गया है, जिन्हें कोई व्यक्ति उन कई मतदाताओं की ओर से दाखिल करता है जो एक ही परिवार के सदस्य नहीं हैं.

मैनुअल में पार्टी के बीएलए के लिए एक प्रावधान था. इसके तहत वे एक दिन में 10 से ज्यादा आवेदन दाखिल नहीं कर सकते थे. साथ ही, हर बार आवेदन के साथ तय प्रारूप में लिखित घोषणा और आवेदनों की सूची देना जरूरी था.

मैनुअल के मुताबिक, अगर कोई बीएलए दावे और आपत्तियों की पूरी अवधि में 30 से ज्यादा आवेदन दाखिल करता है तो ईआरओ या एईआरओ को व्यक्तिगत रूप से  क्रॉस-वेरिफिकेशन (सत्यापन) करना होता है.

फॉर्म-7 में आवेदक को अपना नाम, एपिक नंबर और मोबाइल नंबर देना होता है. उसे आपत्ति का कारण बताना होता है और जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति है, उसकी पहचान के लिए नाम, एपिक नंबर और पता देना होता है.

आवेदक को यह घोषणा भी करनी होती है कि दी गई जानकारी सही है. चुनाव आयोग के फॉर्म-7 के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, आपत्ति या नाम हटाने के लिए बताए गए कारण को साबित करने की जिम्मेदारी भी आवेदक की होती है.

क्या कहती है भाजपा?

इस पूरे मामले को लेकर हमने उत्तराखंड भाजपा के प्रवक्ता विनोद चमोली से बात की. उन्होंने कहा, “अगर किसी को लगा हो कि कोई ग़लत वोटर है या उसका नाम दूसरी जगह भी है तो उसके ख़िलाफ़ आपत्ति दे सकते हैं. यह जांच का विषय है और चुनाव आयोग उन्हें समय देगा. अगर वो ग़लत होंगे तो नाम कटेगा अगर सही हैं तो नहीं कटेगा.”

मुस्लिम मतदाताओं को लेकर की गई आपत्ति पर उन्होंने कहा, ‘‘धर्म देखकर आपत्ति नहीं दी गई, बीएलए के पास जिसके खिलाफ जानकारी थी, उन्होंने भर दिया. अगर आप देखें तो पता चलेगा कि हमें मुस्लिम भी वोट करते हैं. मेरे क्षेत्र (हरिद्वार) में भी मुस्लिम हैं और वो मुझे वोट करते हैं.’’

चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?

न्यूज़लॉन्ड्री ने पांचों विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ से बल्क एप्लीकेशन से जुड़े नियमों और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर सवाल किए.

गदरपुर की ईआरओ अमृता शर्मा को चंकित हुरिया का नाम लेकर और मैनुअल के प्रावधानों का हवाला देते हुए सवाल भेजे गए थे. जवाब में उन्होंने पश्चिम बंगाल एसआईआर पर चुनाव आयोग की ओर से जारी एक पत्र का स्क्रीनशॉट भेजा. इसमें कहा गया था कि कोई व्यक्ति कितने भी फॉर्म जमा कर सकता है और इसकी कोई सीमा नहीं है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उत्तराखंड एसआईआर के लिए भी ऐसा कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन या आदेश जारी किया गया है, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

खटीमा के ईआरओ तुषार सैनी ने कहा कि आपत्ति दर्ज कराने वाले ने अपने दावों की पूरी जिम्मेदारी ली है. उनके मुताबिक, सभी आवेदनों की एक साथ पुष्टि करना संभव नहीं था, इसलिए उनकी अलग-अलग जांच की जा रही है.

उन्होंने कहा कि आपत्ति दर्ज कराने वाले से उसके दावों के बारे में संपर्क किया गया है और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का उचित मौका देने के बाद ही फैसला लिया जाएगा.

किच्छा के ईआरओ गौरव पांडे से राजेश तिवारी की ओर से दाखिल 4,800 से ज्यादा अर्जियों के बारे में पूछा गया. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पोर्टल ने आवेदन स्वीकार किए हैं और तय प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में आवेदन आने पर क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से नियुक्त बीएलए-1 प्रतिनिधि तय दिशानिर्देशों के तहत काम करते हैं और हर आपत्ति की जांच, औपचारिक सुनवाई और निपटारा किया जाएगा.

मुस्लिम मतदाताओं के खिलाफ दर्ज की जा रही आपत्तियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर वह मतदाताओं के समुदाय के आधार पर आंकड़ों पर टिप्पणी नहीं कर सकते. उनकी जिम्मेदारी कानून के मुताबिक हर दावे और आपत्ति पर कार्रवाई करना है.

उन्होंने कहा कि आवेदनों की शुरुआती जांच की गई है और फील्ड वेरिफिकेशन, कानूनी नोटिस तथा प्रभावित लोगों की सुनवाई के बिना किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा.

हमने नानकमत्ता और रुद्रपुर के ईआरओ से भी इस संबंध में सवाल पूछे गए हैं. साथ ही, इन बड़ी संख्या में दाखिल की गई आपत्तियों को लेकर उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सवालों का विस्तृत ईमेल भेजा गया है. अगर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है, तो उसे इस रिपोर्ट में शामिल जरूर किया जाएगा. 

बताते चलें कि बीते गुरुवार को कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसआईआर से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग से मुलाकात की. सांसद कुमारी सैलजा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा भी शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई. 

इसी मामले में उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र भेजकर पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार को चुनाव आयोग के कार्यालय बुलाया है. पत्र में पार्टी को मामले से जुड़े अपने तथ्य और चिंताएं प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है.

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