‘प्राइड ईस्ट’ का संबंध सरमा की पत्नी रिनीकी भुइयां सरमा से है, जो कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कार्यकाल के पांच वित्तीय वर्षों में राज्य सरकार ने मीडिया और विज्ञापन पर 460.82 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसके मुकाबले, सरमा के मुख्यमंत्री बनने से पहले के पांच वर्षों में राज्य का विज्ञापन खर्च 145.01 करोड़ रुपये था यानी सरमा सरकार में यह खर्च पहले के मुकाबले तीन गुने से भी ज्यादा रहा.
इसी बढ़े हुए विज्ञापन बजट से लाभ पाने वालों में राज्य का सबसे बड़ा मीडिया समूह प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है. कंपनी की प्रबंध निदेशक और चेयरपर्सन रिंकी भुइयां सरमा हैं, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी हैं. हालांकि, कुल सरकारी विज्ञापन खर्च में प्राइड ईस्ट को मिली रकम का हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्राइड ईस्ट को वित्त वर्ष 2021-22 से अगस्त 2024 के बीच करीब 20.11 करोड़ रुपये का सरकारी विज्ञापन मिला. इसके मुकाबले 2010-11 से 2020-21 के बीच 11 वित्तीय वर्षों में कंपनी को लगभग 10.4 करोड़ रुपये का विज्ञापन मिला था.
राज्य सरकार के कुल विज्ञापन खर्च के आंकड़े पिछले महीने विधायक वाजेद अली चौधरी के सवाल के जवाब में विधानसभा में पेश किए गए थे. वहीं, प्राइड ईस्ट को मिले विज्ञापन से जुड़े आंकड़े एक अलग विधानसभा जवाब से सामने आए हैं. यह जवाब 22 अगस्त, 2024 को विधायक आसिफ मोहम्मद नजर के उस सवाल के जवाब में पेश किया गया था, जिसमें उन्होंने कंपनी को दिए गए विज्ञापन बजट का ब्योरा मांगा था.
दोनों जवाबों में शामिल आंकड़ों की समय-सीमा अलग-अलग है. चौधरी के सवाल के जवाब में दिए गए आंकड़े वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक के हैं, जबकि प्राइड ईस्ट से जुड़े आंकड़े अगस्त, 2024 तक के हैं.
प्राइड ईस्ट की शुरुआत 2008 में एक सैटेलाइट न्यूज चैनल के तौर पर हुई थी. आज यह असम का सबसे बड़ा मीडिया समूह है. समूह कम से कम दो न्यूज चैनल और तीन एंटरटेनमेंट चैनल चलाता है. इसके अलावा एक न्यूज पोर्टल, कई पत्रिकाएं और अखबार ‘नियामिया बार्ता’ भी इसके संचालन में हैं. मई 2023 में समूह ने क्षेत्रीय न्यूज पोर्टल टाइम8 का भी अधिग्रहण किया था.
न्यूज़लॉन्ड्री पहले रिपोर्ट कर चुका है कि बार्क के आंकड़ों के मुताबिक, प्राइड ईस्ट का असमिया भाषा का न्यूज चैनल न्यूज़ लाइव राज्य में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला सैटेलाइट चैनल है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
जवाब में मिले आंकड़ों के मुताबिक, प्राइड ईस्ट न्यूज़ चैनल को 2010-11 में 5.95 लाख रुपये और अगले साल 7.76 लाख रुपये मिले. 2012-13 में यह राशि घटकर 2.91 लाख रुपये रह गई, लेकिन 2013-14 में बढ़कर 30.26 लाख रुपये हो गई. इसके बाद यह 2014-15 में 73.36 लाख रुपये, 2015-16 में 77.84 लाख रुपये और 2016-17 में 85.17 लाख रुपये तक पहुंच गई.
2017-18 में प्राइड ईस्ट को विज्ञापनों के बदले 1.36 करोड़ रुपये मिले. यह रकम 2018-19 में बढ़कर 1.43 करोड़ रुपये, 2019-20 में 2.08 करोड़ रुपये और 2020-21 में 2.68 करोड़ रुपये हो गई.
हिमंत बिस्वा सरमा 10 मई, 2021 को असम के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद अगले वित्त वर्ष 2021-22 में प्राइड ईस्ट को विज्ञापनों के तौर पर 5.52 करोड़ रुपये मिले, जो 2020-21 की रकम से दोगुने से भी ज्यादा थी. अगले वित्त वर्ष 2022-23 में यह राशि घटकर 3.74 करोड़ रुपये हो गई और फिर 2023-24 में बढ़कर 10.04 करोड़ रुपये पहुंच गई.
विधानसभा में जवाब अगस्त, 2024 में आया था और उसमें उसी समय तक की जानकारी दी गई थी. ऐसे में 2024-25 के लिए 78.89 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया है.
प्राइड ईस्ट को किए गए विज्ञापन भुगतान के आंकड़े में आए बदलाव को साफ तौर पर देखा जा सकता है. 2010-11 से 2020-21 के बीच कुल भुगतान लगभग 10.40 करोड़ रुपये था. वहीं, 2021-22 से जवाब आने के बीच लगभग 20.11 करोड़ रुपये भुगतान दर्ज हुआ.
यह सवाल अगस्त 2024 में आसिफ़ मोहम्मद नज़र ने विधानसभा में पूछा था. इसी सवाल के तहत उन्होंने पूछा था कि क्या यह सच है कि प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने 2021 में अपने विज्ञापन की दरें बढ़ाई थीं.
इसके जवाब में तत्कालीन सूचना और जनसंपर्क मंत्री पीयूष हज़ारिका ने कहा कि यह सच नहीं है और प्राइड ईस्ट ने 2021 में अपनी विज्ञापन दरें नहीं बढ़ाई थीं.
न्यूज़लॉन्ड्री ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी को इस संबंध में कुछ सवाल भेजे हैं. उनका जवाब मिलने पर उसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.
असम का मीडिया पर खर्च 3 गुना बढ़ा
हिमंत बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद सिर्फ प्राइड ईस्ट का विज्ञापन भुगतान ही नहीं बढ़ा, बल्कि असम सरकार का कुल प्रचार और मीडिया आउटरीच खर्च भी तेजी से बढ़ा है.
आंकड़ों के मुताबिक, असम सरकार ने 2016-17 से 2020-21 तक, यानी हिमंत बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने से पहले के पांच सालों में प्रचार पर 145.01 करोड़ रुपये खर्च किए था. जबकि 2021-22 से 2025-26 तक के पांच वित्त वर्ष में यह खर्च बढ़कर 460.82 करोड़ रुपये हो गया. यानी पिछले पांच वर्षों के मुकाबले खर्च तीन गुना से भी ज्यादा रहा.
सर्बानंद सोनोवाल के पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में 145 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल में अकेले 2023-24 में इससे ज्यादा, 160.90 करोड़ रुपये, प्रचार-प्रसार पर खर्च किए गए.
ये आंकड़े 13 जुलाई, 2026 को असम विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब से सामने आए.
सरकार ने 2016-17 में 27.06 करोड़ रुपये, 2017-18 में 17.29 करोड़ रुपये, 2018-19 में 23.61 करोड़ रुपये, 2019-20 में 30.70 करोड़ रुपये और 2020-21 में 46.35 करोड़ रुपये खर्च किए.
इसके बाद यह खर्च बढ़कर 2021-22 में 72.83 करोड़ रुपये और 2022-23 में 78.69 करोड़ रुपये हो गया. 2023-24 में यह सबसे ज्यादा 160.90 करोड़ रुपये तक पहुंचा. 2024-25 में यह घटकर 69.17 करोड़ रुपये और 2025-26 में 79.23 करोड़ रुपये रहा.
2021-22 के आंकड़ों में अप्रैल 2021 का समय भी शामिल है, जबकि सरमा ने 10 मई, 2021 को मुख्यमंत्री पद संभाला था.
हिमंत बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने से पहले के पांच वित्त वर्षों यानी 2016-17 से 2020-21 के दौरान असम सरकार ने प्रिंट मीडिया पर 120.98 करोड़ रुपये खर्च किए थे. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 4.62 करोड़ रुपये और होर्डिंग व बैनर पर 19.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
2021-22 से 2025-26 तक के पांच वित्त वर्षों में प्रिंट मीडिया पर खर्च बढ़कर 335.55 करोड़ रुपये हो गया. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर खर्च 69.70 करोड़ रुपये और होर्डिंग व बैनर पर खर्च 50.04 करोड़ रुपये रहा.
हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल में नए प्लेटफॉर्म पर भी खर्च शामिल रहा. सोशल मीडिया पर 2.64 करोड़ रुपये और डिजिटल मीडिया पर 2.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
टॉप 10 अखबार
13 जुलाई को दिए गए अपने जवाब में असम सरकार ने राज्य में सबसे ज्यादा सर्कुलेशन वाले 10 दैनिक समाचार पत्रों को 2016-17 से 2025-26 तक किए गए विज्ञापन भुगतान का विवरण दिया.
आंकड़ों से पता चलता है कि अलग-अलग प्रकाशनों को मिलने वाली राशि में काफी अंतर है. अंग्रेजी भाषा के दैनिक समाचार पत्र ‘द असम ट्रिब्यून’ को सबसे ज्यादा राशि मिली. उसे सरकारी विज्ञापनों के लिए कुल 43.10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. एक अन्य अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द सेंटिनल’ को 30.20 करोड़ रुपये मिले.
असमिया भाषा के अखबारों में ‘असमिया प्रतिदिन’ को 21.08 करोड़ रुपये मिले, जो इस समूह में सबसे ज्यादा है. इसके बाद ‘अमर असम’ को 19.59 करोड़ रुपये, ‘दैनिक जन्मभूमि’ को 19.42 करोड़ रुपये, ‘दैनिक अग्रदूत’ को 17.15 करोड़ रुपये और ‘असमिया खबर’ को 14.18 करोड़ रुपये मिले.
हिंदी भाषा के तीन अखबारों को अपेक्षाकृत कम रकम मिली. ‘दैनिक पूर्वोदय’ को 7.24 करोड़ रुपये, ‘पूर्वांचल प्रहरी’ को 5.11 करोड़ रुपये और ‘प्रातः खबर’ को 2.34 करोड़ रुपये मिले.
इसी सवाल के तहत टेलीविजन मीडिया को दिए गए विज्ञापनों के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन असम सरकार ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई.
किन रेडियो और न्यूज़ चैनलों को मिला विज्ञापन
दस्तावेज बताते हैं कि असम में टेलीविजन मीडिया पर अपेक्षकृत कम खर्च हुआ है. जुलाई, 2026 में विधानसभा में दिए गए जवाब में असम के बाहर के टेलीविजन चैनलों या अखबारों को किए गए विज्ञापन भुगतान का जिक्र नहीं है. इसकी जानकारी अगस्त, 2024 में विधानसभा में पूछे गए एक अलग सवाल के जवाब में मिलती है. इसमें राज्य के बाहर छपने वाले अखबारों और टेलीविजन चैनलों को दिए गए विज्ञापनों की जानकारी मांगी गई थी.
असम सरकार के जवाब में मई 2021 से 31 जुलाई 2024 के बीच 22 राष्ट्रीय अखबारों को किए गए विज्ञापन भुगतान की सूची दी गई है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को सबसे ज्यादा 21.27 करोड़ रुपये मिले. इसके बाद ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को 12.14 करोड़ रुपये और ‘दैनिक जागरण’ को 10.72 करोड़ रुपये मिले.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ को 7.01 करोड़ रुपये और ‘द हिंदू’ को 6.92 करोड़ रुपये मिले. अन्य प्राप्तकर्ताओं में ‘अमर उजाला’ (3.61 करोड़), ‘दैनिक भास्कर’ (करीब 2 करोड़), ‘आनंद बाजार पत्रिका’ (1.66 करोड़), ‘द टेलीग्राफ’ (1.60 करोड़), ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (1.19 करोड़), ‘पंजाब केसरी’ (59.48 लाख), ‘डेक्कन हेराल्ड’ (36.59 लाख), ‘हिंदुस्तान’ हिंदी को 35.70 लाख, ‘वर्तमान’ (28.83 लाख), ‘प्रमेया’ (16.80 लाख), ‘नवभारत टाइम्स’ (12.81 लाख), ‘संदेश’ (42.84 लाख) और ‘हिंद समाचार’ (57 हजार 898) शामिल हैं.
मई 2021 से 31 जुलाई 2024 के बीच विज्ञापन पाने वाले टीवी चैनलों और रेडियो की बात करें तो सबसे ज्यादा भुगतान पाने वालों में ‘प्रतिदिन टाइम’ (4.15 करोड़), ‘DY365’ (4.02 करोड़), ‘प्रग न्यूज़’ (3.84 करोड़), ‘ND24’ (3.64 करोड़), ‘NK TV’ (3.55 करोड़) और ‘न्यूज़ लाइव’ (3.45 करोड़) शामिल हैं.
इस स्टेटमेंट में दूसरे क्षेत्रीय आउटलेट्स को किए गए बड़े भुगतान का भी जिक्र है. इनमें ‘NE न्यूज़’ (1.91 करोड़), ‘न्यूज़18’ (3.16 करोड़), ‘रंग’ (1.30 करोड़), ‘असम टॉक्स’ (1.38 करोड़) और ‘प्रथम खबर’ (1.32 करोड़) शामिल हैं.
खर्च के रिकॉर्ड में राष्ट्रीय टेलीविजन नेटवर्क भी शामिल हैं. ‘आज तक’ को 1.45 करोड़ रुपये मिले, जबकि ‘टाइम्स नाउ’ को 1.04 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. अन्य भुगतानों में ‘इंडिया टीवी’ (52.10 लाख), ‘ज़ी टीवी’ (55.22 लाख), ‘ABP न्यूज़’ (40.61 लाख), ‘रिपब्लिक टीवी’ (35.78 लाख), ‘इंडिया टुडे’ (33.34 लाख) और ‘TV9 भारतवर्ष’ (26.33 लाख) शामिल हैं.
जवाब में ‘ऑल इंडिया रेडियो’ (प्रसार भारती) को 49.93 लाख रुपये और ‘रेडियो मिर्ची’ को 46.35 लाख रुपये का भुगतान भी शामिल है. इसके अलावा ‘रेड FM’, ‘बिग FM’, ‘रेडियो सिटी’ और ‘फीवर FM’ को भी भुगतान किया गया.
आउटडोर एडवरटाइजिंग होर्डिंग्स
विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने 2021-22 से 2023-24 तक के तीन वित्त वर्षों में आउटडोर एडवरटाइजिंग होर्डिंग्स पर 22.15 करोड़ रुपये खर्च किए.
सबसे ज्यादा खर्च 2021-22 में 10.50 करोड़ रुपये हुआ. यह 2022-23 में घटकर 4.42 करोड़ रुपये हो गया और फिर 2023-24 में बढ़कर 7.22 करोड़ रुपये पहुंच गया.
एक्सिस माई इंडिया के फाउंडर और CMD प्रदीप गुप्ता एक जाने-माने पोलस्टर हैं. आपको शायद ‘इंडिया टुडे’ पर उनका वह जश्न वाला डांस याद हो, जो एजेंसी के एग्जिट पोल में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी के बाद हुआ था.
दिलचस्प बात यह है कि एक्सिस माई इंडिया भी सरकारी विज्ञापन भुगतान पाने वालों की सूची में शामिल था. उसे 2022-23 में 1.20 करोड़ रुपये और 2023-24 में 2.41 करोड़ रुपये मिले. यानी कुल मिलाकर लगभग 3.61 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ.
2021-22 में ART एंटरटेनमेंट एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को सबसे ज्यादा 5.41 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इसके बाद आउटरीच एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड को 1.90 करोड़ रुपये और फास्ट ट्रैक इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सर्विस को 1.49 करोड़ रुपये मिले.
अन्य भुगतानों में प्रिया कम्युनिकेशन को 99.97 लाख रुपये, एक्मे इवेंट एंड एम्पो को 32.62 लाख रुपये, मार्कॉम मीडिया को 21.57 लाख रुपये और M/S उर्वशी रिफ्लेक्शन एंड कंपनी को 14.52 लाख रुपये शामिल थे. इन सभी भुगतानों का कुल योग 10.50 करोड़ रुपये था.
2022-23 में आउटरीच एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड को 3.22 करोड़ रुपये मिले, जबकि एक्सिस माई इंडिया को 1.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. दोनों भुगतानों को मिलाकर 4.43 करोड़ रुपये हुए, जो उस साल के दर्ज खर्च के बराबर थे.
2023-24 में आउटरीच एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड को फिर से सबसे ज्यादा 4.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इसके बाद एक्सिस माई इंडिया को 2.41 करोड़ रुपये और M/S उर्वशी रिफ्लेक्शन एंड कंपनी को 59.94 लाख रुपये मिले.
सूची में शामिल अन्य भुगतानों में एक्सक्लूसिव एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड को 9.79 लाख रुपये, ART एंटरटेनमेंट एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को 8.70 लाख रुपये, रेजोनेंस ब्रांड कम्युनिकेशन को 1.30 लाख रुपये और तुलिका आर्ट को 48,000 रुपये दिए गए. इन भुगतानों का कुल योग 7.22 करोड़ रुपये था.
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