चापलूसी चलीसा, ईरानी थाली, ईएमआई वाली और न्यूज़क्लिक की बातें

दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.

WrittenBy:अतुल चौरसिया
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हमारा दरबारी मीडिया हर शाम प्राइम टाइम पर ऐसी-ऐसी कहानियां गढ़ता है मानो देश कोई प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि मार्वल यूनिवर्स का कोई सुपरहीरो चला रहा हो. लेकिन कैमरे की चमकती लाइटों और रील्स की दुनिया से बाहर निकलकर हकीकत का सामना करना भी जरूरी है. इसका ताजा उदाहरण ओमान की खाड़ी में अमेरिकी बमबारी के दौरान मारे गए तीन भारतीय नागरिक हैं. सवाल यह है कि जब ये भारतीय मारे गए तब मोदीजी क्या कर रहे थे?

बहन रुबिका ने नया ठिकाना खोज लिया है. जबकि सुशांत ने अपनी पाठशाला फिर से खोल ली है. इस भीड़ में न्यूज़ एटीन इंडिया पर अमन चोपड़ा ने भी अपने शो का एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग वर्जन लॉन्च कर दिया है. और भटकाओ अभियान की स्वयंभू एरिया कमांडर अंजना ओम कश्यप ने कैमरे पर आकर पूरे देश को बड़े गंभीर चेहरे से ज्ञान दिया कि ईरान में हालात इतने खराब हैं कि वहां के लोग अब रोटी भी ईएमआई पर खरीद रहे हैं.

वहीं न्यूज़क्लिक पर दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले ने टीवी स्टूडियो की अदालतों में बैठे उन तमाम स्वघोषित न्यायाधीशों के मुंह पर कानूनी तमाचा जड़ दिया है जिन्होंने तीन साल पहले न्यूज़क्लिक को चीन का एजेंट, अर्बन नक्सल और भारत विरोधी साजिश का केंद्र जैसी तमाम उपाधियां दे डाली थीं.

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