21 मौतों के बीच उम्मीद की कहानी: लाखों का नुकसान उठाकर दुकानदार ने ऐसे बचाईं कई जानें

मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग अभी भी जिंदगी मौत से अस्पतालों में जंग लड़ रहे हैं.

WrittenBy:अवधेश कुमार
Date:
रियाजुद्दीन की तस्वीर. पृष्ठभूमि में लोगों की जान बचाने के लिए बिछाए गए उनकी दुकान के गद्दे.

मालवीय नगर के फ्लोरिश स्टे बी एंड बी होटल में बुधवार सुबह करीब 9 बजे लगी आग ने दर्जनों परिवारों को मातम में डुबो दिया. छह मंजिला इमारत में फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर नीचे कूद रहे थे, जबकि कई लोग धुएं से बचने के लिए बाथरूम में छिप गए, जहां दम घुटने से उनकी मौत हो गई. इस भयावह मंजर के बीच होटल के सामने गद्दों की दुकान चलाने वाला एक परिवार कई लोगों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बनकर सामने आया. आग की लपटें उठते ही उन्होंने अपनी दुकान के गद्दे सड़क पर बिछा दिए और लोगों से उन पर कूदने की अपील की. स्थानीय लोगों के मुताबिक, उनकी इस सूझबूझ और बहादुरी से छह से करीब आठ लोगों की जान बच सकी. इस घटना में अब तक 21 लोगों के मारे जाने की खबर है. 

गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन बताते हैं, "जैसे ही होटल में आग लगी हमने अपनी दुकान के गद्दे सड़क पर बिछा दिए. आप समझिए की जितनी भी डेड बॉडी बाहर निकाली गई हैं उसके प्रयोग में ली गई सभी चादरें भी हमारी ही दुकान की थीं. होटल के भीतर से घायलों को भी हमने अपनी ही चादरों में रखकर बाहर निकाला. 21 से ज्यादा गद्दे हमने नीचे बिछा दिए. हमारा डेढ़ से दो लाख का नुकसान हुआ है. उन गद्दों पर 7-8 लोग कूदे, जिनमें सभी की जान बच गई. हल्की चोटें आई हैं लेकिन जान सबकी बच गई. कूदने वालों में दो महिलाएं और बाकी पुरूष थे." 

वह आगे कहते हैं, "यह घटना सुबह करीब 8 से साढ़े बजे के बीच की है. तब मैं अपनी दुकान पर ही था. अचानक भगदड़ और शोर की आवाज आने लगी. हमने देखा कि आग लगी थी. तुरंत ही फायर ब्रिगेड को कॉल किया. उन्होंने भी काफी बचाव किया. हालांकि, थोड़ा पहले आते तो शायद मृतकों की संख्या इतनी नहीं होती.” 

गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन

रियाजुद्दीन कहते हैं, “45 सालों से मैं यहां अपनी गद्दों की दुकान चला रहा हूं. यह होटल करीब यहां 5 सालों से है. लेकिन ये बिल्डिंग काफी पुरानी है. करीब 1970 की. होटल से पहले यहां खादी भंडार चलता था. और उससे पहले यहां सीमेंट का गोदाम था. अभी दुकान दूसरे मालिक के पास है. हादसे का शिकार सभी लोग मैक्स में अपनों का इलाज करवाने आए थे." 

उनके बेटे अरमान मंसूरी कहते हैं, "हमारी दुकान पूरी भरी रहती थी, आज पूरी तरह से खाली है. एक-एक खांचा, एक-एक रैक, किसी में कुछ भी नहीं है. मैंने कुछ नहीं देखा सिर्फ सामान निकाला और जान बचाने के लिए दे दिया. यह रेस्क्यू करीब तीन से चार घंटे तक जारी रहा. हमारा डेढ़ से दो लाख का नुकसान है. लेकिन हमने जान बचाने में कोई परवाह नहीं की." 

वह आगे बताते हैं कि उनके पिता करीब 45 साल पहले दिल्ली आए थे. वे मूल रूप से अमरोहा जिले के गांव नारंगपुर के हैं. गांव में अक्सर आना जाना रहता है. 

रियाजुद्दीन के बेटे अरमान अंसारी.

वो जो मौत के मुंह में समा गए

मरने वालों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, फ्लोरिश स्टे बी एंड बी नाम के इस होटल में ज्यादातर वही लोग रुकते थे, जो मैक्स हॉस्पिटल में अपनों का इलाज कराने आते थे. 

दिल्ली पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा कि घटना के वक्त करीब 40 से अधिक व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. जिन्हें उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया है. 

इसके अलावा पुलिस ने 21 लोगों की मौत की पुष्टि की है. जानकारी के मुताबिक, मरने वालों में 10 भारतीय और 11 विदेशी नागरिक हैं. इनमें 9 अफ्रीकी और 2 तुर्कमेनिस्तान के हैं. वहीं, भारतीयों में 5 गुरुग्राम, 3 राजस्थान व अन्य हैं. यह सभी आठों आपस में रिश्तेदार भी हैं.

मरने वालों में 48 वर्षीय विवेक अग्रावल, उनकी 45 वर्षीय पत्नी तर्जनी अग्रवाल, उनकी दो बेटियां, 20 वर्षीय जुबिशा उर्फ एंजल और 15 वर्षीय वारिया उर्फ पर्ल हैं. इनके अलावा विवेक अग्रवाल की 52 वर्षीय मां कमला देवी की भी मृत्यु हो गई. 

मृतक तर्जनी अग्रवाल के मामा अजय गुप्ता बताते हैं, "तर्जनी के ससुर का मैक्स हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. जिन्हें देखने के लिए यह लोग अस्पताल आए थे. वहीं इनके अलावा तीन लोग जो कि इनके रिश्तेदार थे, वे भी इनसे मिलने सुबह ही राजस्थान से दिल्ली पहुंचे थे. ये तीनों विवेक के पिता के भाई और साले थे. हमारे परिवार में कोई नहीं बचा है."

विवेक के पिता मैक्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं. उन्हें देखने के लिए ही ये सभी लोग दिल्ली आए थे. जिनकी इस हादसे में मौत हो गई.

वहीं, घायल विशाल के भाई सागर कहते हैं कि मेरा भाई 8-10 दिन से उसी होटल में रह रहे थे. वे यहां रहकर मैक्स अस्पताल में अपने कंधे के दर्द का इलाज करवा रहे थे. आग लगने के दौरान भी वे अस्पताल में थे. अस्पताल के कमरे का शीशा तोड़कर उपर से ही कूद गए. उनको काफी चोटें आई हैं. कमर की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया है. इलाज चल रहा है. हाथों में टांके आए हैं. 

वह आगे कहते हैं कि भाई के इलाज का डॉक्टरों ने 92 हजार का बिल बनाया है. हालांकि, हमने जमा नहीं किया है. हम मूल रूप से बिहार के हैं. लेकिन पंजाब के लुधियाना में रहकर कपड़े का काम करते हैं. हमें जैसे ही घटना की जानकरी मिली हम दौड़कर लुधियाना से दिल्ली आ गए हैं. 

वहीं, विशाल के जीजा विजय कुमार कहते हैं कि हमें खुशी है कि वो बच गए. बिल का क्या है भर देंगे, मिडिल क्लास लोग हैं हम. पैसा आता जाता रहेगा उनका बचना जरूरी था.  

न्यूज़लॉन्ड्री की टीम से बात करते मोहम्मद अफजल

स्थानीय लोगों ने पीड़ितों को बचाने में काफी मदद की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ये लोग बचाने नहीं आते तो मृतकों की संख्या काफी बढ़ सकती थी. इन्हीं में से एक मोहम्मद अफजल से हमने बात की. 

अफजल बताते हैं, “साढ़े आठ बजे के आस- पास मुझे कॉल आया कि होटल में आग लग गई है. इसके बाद हम घर से भागकर आए और अपने चाचा-ताऊ के बच्चों को कॉल करके बुलाया. यहां भयंकर आग लगी थी. पहले हमने फायर ब्रिगेड और पुलिस को कॉल किया और उसके बाद हम 8-10 लड़के पुलिस के साथ अंदर गए. इससे पहले हमने गद्दों की दुकान से सड़क पर गद्दे बिछाए और लोगों से गद्दों पर कूदने की अपील की. हमने उपर से 7-8 लोगों को कुदाया था, जिनमें एक का पैर भी टूट गया है.”

अफजल अंदर का खौफनाक मंजर बयां करते हुए कहते हैं, “जब हम अंदर गए तो हालात ऐसे थे कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. लाइट गई हुई थी चारों ओर अंधेरा था. मोबाइल की टॉर्च से रोशनी करके हम अंदर पहुंचे थे. हमने दरवाजे तोड़-तोड़कर लोगों को बाहर निकाला था. उनमें कई मृतक शामिल थे. हमने यहां करीब 10 लोगों को सीपीआर भी दिया था. हमें एक कपल तो ऐसा मिला जो बाथरूम में बंद थे, एक दूसरे को गले लगाए थे और उनकी मौत हो चुकी थी.”

बिना विज्ञापन, बिना समझौते सिर्फ पाठकों के भरोसे चलने वाली पत्रकारिता को आपका समर्थन चाहिए. इस ‘प्रेस फ्रीडम’ माह खबरों को स्वतंत्र बनाए रखने में भागीदार बनें. 

Also see
article imageदिल्ली के मालवीय नगर में खौफनाक हादसा: 21 की मौत, मरने वालों में 11 विदेशी नागरिक 
article imageखराब हाइड्रोलिक और आग बुझाने में देरी बनी पालम में 9 लोगों की मौत का कारण?

Comments

We take comments from subscribers only!  Subscribe now to post comments! 
Already a subscriber?  Login


You may also like