दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.
इस हफ्ते टिप्पणी में धृतराष्ट्र-संजय संवाद की वापसी. दरबार का सेट एकदम रेडी था. आर्यावर्त के माथे पर कई किस्म की बकलोलियां एक साथ आन पड़ी थीं. और धृतराष्ट्र उन सबको साधने की फिक्र में गुमसुम थे. उन्होंने संजय से बीती रात का एक भयानक सपना साझा किया. धुप्प अंधेरे के बीच आसमान में एक बैनर लहरा रहा था. उस पर लिखा था- “नीट पेपर लीक: जब राष्ट्र अपने ही बच्चों का भविष्य बेच दे”. दूर-दूर से चीखें पहुंच रही थीं. कहीं कोई छात्र फूट-फूटकर रो रहा था, कहीं कोई पिता बैंक के बाहर कर्ज़ की पर्ची पकड़े खड़ा था, कहीं कोई मां मंदिर में बेटे की किताबों पर हाथ रखकर प्रार्थना कर रही थी.
इस बीच मोदीजी ने देशभक्ति साबित करने की नई लिस्ट जारी कर दी. लेकिन चौबीस घंटे के भीतर ही अपनी लिस्ट को ताक पर रखकर मोदीजी ने गुजरात में भव्य रोड शो निकला. फिर इस पाखंड से हुए डैमेज कंट्रोल के लिए दो गाड़ियों वाली नई पीआर रील मार्केट में उतारी गई. इधर रील जारी हुई और उधर दरबारी मीडिया के हुड़कचुल्लुओं ने मैदान संभाल लिया.
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