दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.
पिछले हफ्ते मोदीजी ने झालमुड़ी क्या खाया दरबारी हुड़कचुल्लुओं ने टीआरपी के ठेले पर ब्रेकिंग न्यूज़ की चाट ही सजा दी. उनकी बकलोली सुनकर कार्ल मार्क्स भी आज ज़िंदा होते तो ‘दास कैपिटल’ छोड़कर ‘दास झालमुड़ी’ लिख डालते.
वहीं, देश का एक राज्य मणिपुर पिछले तीन साल से हिंसा की आग में जल रहा है लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बंगाल के चुनाव में व्यस्त हैं. दूसरी तरफ रामभक्त पार्टी के नेता अनुराग ठाकुर और हिमंता बिस्वा सरमा मछली खाने के कंपटीशन में लगे हैं.
इस बीच विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला हमारा देश भारत लुढ़ककर छठे पायदान पर पहुंच गया. दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के जिन राज्यसभा सांसदों को ये मालूम नहीं कि विद्रोह के ‘वि’ में बड़ी ‘ई’ की मात्रा लगती है या छोटी ‘इ’ की, वे सब राघव चड्ढा के साथ विद्रोही हो गए.
देखिए इस हफ्ते की टिप्पणी.