दिन ब दिन की इंटरनेट बहसों और खबरिया चैनलों के रंगमंच पर संक्षिप्त टिप्पणी.
बुद्ध और गांधी का भारत सत्य और अहिंसा का कॉपीराइट सरेंडर कर चुका है. अब यह अपने माथे पर हर दिन भाईचारे, प्रेम और सौहार्द का नया सर्टीफिकेट चिपका कर घूम रहा है. जहां मुसलमानों को सड़कों पर नहीं चलने के इश्तेहार लिखे जा रहे हैं.
मोदीजी इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फ़ॉलोवर्स के साथ सबसे बड़े पॉलिटिकल इंफ़्ल्यूएंसर बन गए हैं. नतीजा खबरिया चैनलों पर भक्तिमय संध्या की बाढ़ आ गई है. वहीं, इज़राइल यात्रा पर गए मोदीजी भावनाओं में बह गए. जोश-जोश में इंडिया को मदरलैंड और इज़रायल को फ़ादरलैंड बता बैठे. अब इस बौद्धिक उवाच का क्या अर्थ था वह मोदीजी के दार्शनशास्त्र में ही डीकोड किया जा सकता है.
आप सबको होली की ढेर सारी शुभकामनाएं और साथ में एक प्यारा सा होली का नज़राना इस टिप्पणी में पेश है.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
गलगोटिया का ‘कुत्ता’ न घर का न घाट का और मोहन भागवत निकले हिंदू बचाने