मथुरा पुलिस ने पत्रकार पीयूष राय समेत 9 के खिलाफ दर्ज की एफआईआर, जानिए क्या है पूरा मामला

पुलिस का कहना है कि पीयूष और बाकी लोगों ने पुराने वीडियो को ऐसा बताकर शेयर किया है कि मानो वह मथुरा, वृंदावन का कोई ताजा वीडियो हो. इस एफआईआर को लेकर पत्रकारों ने नाराजगी जताई है.

पीयूष राय और मथुरा पुलिस के ट्वीट का स्क्रीनशॉट.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पत्रकार पीयूष राय के खिलाफ एक वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने को लेकर एफआईआर दर्ज की है. मथुरा जिले के बरसाना थाना में 28 फरवरी को ये एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर के अनुसार, 26 और 27 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स) पर वीडियो शेयर किया गया था. यह वीडियो पुराना है, जिसे हालिया घटना का बताकर वायरल किया जा रहा है, जिससे भ्रम, तनाव और महिलाओं में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है.

एफआईआर में पीयूष समेत कुल 9 सोशल मीडिया हैंडल्स का जिक्र है.

बताते चलें कि पत्रकार पीयूष राय ने 27 फरवरी को अपने एक्स हैंडल पर ये वीडियो शेयर किया और लिखा “मुझे भीड़-भाड़ वाली जगहें पसंद नहीं हैं, और मैं दूसरों को भी वहां जाने से रोकने की कोशिश करता हूं. मेरे हिसाब से लोगों की जान बचाने का यही तरीका है.”

पीयूष राय के इस ट्वीट पर मथुरा पुलिस ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि, “यह वीडियो पुराना है. इस साल अभी तक ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है. अगर इस तरह की कोई घटना सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.”

पुलिस ने आगे कार्रवाई की चेतावनी देते हुए लिखा, “मथुरा पुलिस द्वारा जनता से अपील की जाती है कि पिछले वर्ष के वीडियो या फोटो लगाकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न ना करें, अफवाहें ना फैलाएं अन्यथा अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध भी आवश्यक विधिक कार्यवाही की जायेगी.”

इसके बाद यूपी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196 (2) और 353 (2) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और 67(अ) के तहत केस दर्ज किया गया है.

पत्रकारों ने जताई नाराजगी

पीयूष के वीडियो शेयर करने पर एफआईआर को लेकर कई लोगों ने पुलिस के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है. पत्रकार रोहिणी सिंह एक एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा, “क्या उत्तर प्रदेश में सारे अपराध खत्म हो गए हैं, जो आप इस तरह की कार्यवाही कर रहे हैं. पत्रकारों को डराने की बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भीड़ के कारण कोई हादसा न हो.” 

द रेड माइक के पत्रकार सौरभ शुक्ला ने एक्स पर पीयूष राय के समर्थन में पोस्ट किया, “पीयूष राय पर एफआईआर करके पुलिस ने अपनी कमज़ोरी जाहिर की है, पीयूष ने वही तस्वीरें शेयर की जो सच है, आप अपने राज्य में महिलाओं को सुरक्षा दे नहीं पा रहे हैं और सच बताने वालों पर एफआईआर कर रहे हैं, क्योंकि आपके हाथ में चाबुक है, इसलिए आप चला सकते हैं, चलाइये.” 

पत्रकार सचिन गुप्ता ने भी पीयूष राय के समर्थन में पोस्ट करते हुए लिखा, “ये अधिकारी खुद के परिवारों के लिए ग्रीन कॉरिडोर बना देते हैं, लेकिन आमजन से पूछिए कि बरसाना/वृंदावन में भीड़ के वाकई क्या हालात होते हैं? हो सकता है कि वीडियो पुरानी हो पर साल–दर–साल हालात ऐसे ही रहते हैं. तमाम सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर मथुरा में होली कवर करने गए हुए हैं. वो हर रोज इस विश्व प्रसिद्ध होली के दोनों पहलू दिखा रहे हैं. लेकिन सिर्फ एक–दो पुरानी वीडियो को आधार बनाकर होली की सभी वीडियो को पुरानी बता दिया गया है. जैसा प्रयागराज महाकुंभ भगदड़ के वक्त कहा था कि कोई भगदड़ नहीं हुई, कोई मौत नहीं हुई, सब अफवाह है. जिम्मेदार लोगों को अपनी जिम्मेदारी से बचने की बजाय उन वीडियो का संज्ञान लेकर मैनेजमेंट और बेहतर करना चाहिए. जो अधिकारी सामान्य वीकेंड पर वृंदावन की ट्रैफिक व्यवस्था नहीं बना पाते हों, वो कुछ न कहें तो ही बेहतर होगा.”  

क्या कहती है पुलिस और पीयूष 

इस मामले पर एसएसपी श्लोक कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “पीयूष ने अपना पक्ष दिया है. उनका पोस्ट भीड़ को लेकर था. हालांकि, उन्होंने भी पुराना ही वीडियो साझा किया था. वहीं बाक़ी अन्य लोगों ने ऐसे वीडियो साझा किए हैं जैसे वो वीडियो वर्तमान समय की हो और मथुरा, वृंदावन में होली के दौरान माहौल खराब रहा हो. फिलहाल जानकारी सामने आ रही है. इस मामले की आगे जांच के बाद ही कार्रवाई होगी.”

वहीं, पत्रकार पीयूष ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में कहा, “चाहे कुंभ के दौरान हुआ हादसा हो या आरसीबी के आईपीएल जीतने के बाद का हादसा. ऐसे हादसे अनियंत्रित भीड़ के कारण होते है. जब भी ऐसा मौका आता है तो मैं लोगों को आगाह करने के लिए ट्वीट करता हूं कि भीड़ का हिस्सा ना बने. इस बार भी मेरा उद्देश्य यही था. हालांकि, पुलिस ने अलग तरह से ले लिया है.” 

मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.

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