नए साल की पहली टिप्पणी.
अमेरिका को फिर से महान बनाने निकले ट्रंप रास्ते में पूरी दुनिया को रेलते जा रहे हैं. आए दिन यह आदमी किसी न किसी देश को गरियाता या धमकाता नज़र आता है. रूस और चीन जैसे बड़े और मज़बूत देश हुए तो बस गरियाकर कलेजे पर नवरत्न की मालिश कर लेते हैं, और कहीं वेनुजुएला या डेनमार्क जैसा छोटा और कमज़ोर देश दिख जाए तो उनका हौसला अचानक हॉलिवुड की एक्शन फ़िल्म बन जाता है.
खैर भारतीयों के पास मोदी जी हैं, ये उनके विदेशी दौरों का ही करिश्मा है कि हम अमेरिका के 50 फ़ीसदी टैरिफ़ से बाल-बाल बच गए. पड़ोसी नेपाल, बांग्लादेश से लेकर चीन तक से भारत के रिश्ते अपने सबसे खूबसूरत दौर से गुज़र रहे हैं. पाकिस्तान तो कब का मोदी जी के आगे सरेंडर कर चुका है. रियली थैंक्यू मोदी जी.
नैतिकता की मौत हो और गोदी मीडिया का ज़िक्र न आए, ऐसा हो नहीं सकता. दुनिया में कहीं भी कैसी भी आग लगी हो, हमारे प्राइम टाइम के हुड़कचुल्लू एंकरों को बस एक ही सवाल सूझता है, इसमें मुसलमान कहां से घुसाएं?
देखिए नए साल की यह पहली टिप्पणी.
बीते पच्चीस सालों ने ख़बरें पढ़ने के हमारे तरीके को बदल दिया है, लेकिन इस मूल सत्य को नहीं बदला है कि लोकतंत्र को विज्ञापनदाताओं और सत्ता से मुक्त प्रेस की ज़रूरत है. एनएल-टीएनएम को सब्स्क्राइब करें और उस स्वतंत्रता की रक्षा में मदद करें.