सीएम धामी के चार साल: 1800 से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं पर तीन सौ पंद्रह करोड़ का खर्च

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के दस्तावेजों से पता चलता है कि धामी सरकार ने बीते चार सालों में किस तरह विज्ञापनों के नाम पर प्रिंट मीडिया पर पैसों की बारिश की है.

WrittenBy:बसंत कुमार
Date:
Article image

न्यूज़लॉन्ड्री की पहली रिपोर्ट में अब तक आपने यह जाना कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने टेलीविज़न चैनलों को विज्ञापन देने और विज्ञापन तैयार कराने पर कितना व्यय किया.

इस रिपोर्ट में हम समाचार पत्र- पत्रिकाओं, सरकार की ओर से प्रचार के लिए प्रकाशित करवाई गई पुस्तकों एवं बुकलेट्स पर हुए व्यय का विश्लेषण विस्तार से प्रस्तुत करेंगे. लेकिन उससे पहले आपको एक पत्रिका की कहानी बताते हैं. जिसने दिल्ली से लेकर उत्तराखंड और खुद मुख्यमंत्री कार्यालय तक हलचल मचा दी. 

दरअसल, जनवरी, 2022 में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने दिल्ली की एक पत्रिका ख़बर मानक  को विज्ञापन के बदले 71.99 लाख रुपये जारी करने का फ़ैसला लिया. दिलचस्प बात यह है कि यह पत्रिका उस वक्त तक ‘आधिकारिक तौर पर अस्तित्व’ में ही नहीं थी. प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (पूर्व में आरएनआई) के रिकॉर्ड के मुताबिक, ख़बर मानक  का आधिकारिक पंजीकरण जुलाई, 2022 में हुआ.

ख़बर मानक की ओर से सरकार को दिए दस्तावेज़ों में अर्चना राजहंस का मोबाइल नंबर मिला. जो तब इस पत्रिका की प्रधान संपादक थीं. फिलहाल वह खुद को "पूर्व पत्रकार" बताती हैं. उनके सोशल मीडिया पर अक्सर मुख्यमंत्री धामी के बारे में की गई पोस्ट नजर आती हैं. 

न्यूज़लॉन्ड्री ने जब उनसे ख़बर मानक को लेकर बात की तो उन्होंने इस पत्रिका से कोई संबंध होने से ही इनकार कर दिया. राजहंस ने बातचीत में कहा, “मैंने 25 जगहों पर काम किया है, उनमें से एक खबर मानक भी थी. अब मैं वहां की किसी चीज़ की ज़िम्मेदार नहीं हूं.” इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका क्योंकि उन्होंने रिपोर्टर का नंबर ब्लॉक कर दिया. 

पत्रिका के मालिक के तौर पर जनार्दन कुमार का नाम दर्ज है. हालांकि, जनार्दन या पत्रिका का कोई ऑनलाइन निशान नहीं मिलता. सिवाय एक फेसबुक पेज- क्राइम दस्तक रिपोर्टर्स के. सितंबर 2024 में बने इस पेज पर फिलहाल 5 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. इस पेज के कवर पर चार लोगो नज़र आते हैं- क्राइम दस्तक, ख़बर मानक, वर्तमान क्रांति, क्राइम दस्तक रिपोर्टर्स.

हालांकि, इस पेज पर खबर मानक के नाम से जो पोस्ट किए गए हैं, वे समाचार नहीं बल्कि पत्रिका के आईडी कार्ड और प्रशस्ती पत्र हैं. यहां ख़बर मानक के संपादक के तौर पर अब संदीप चौबे का नाम दर्ज है. 

न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में चौबे ने कहा कि वे जनार्दन कुमार से संपर्क करवाएंगे. इसके बाद उन्होंने एक शख्स से कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात करवाई. जो खुद को कपिल साहू और जनार्दन कुमार का पीए बता रहे थे. जब उत्तराखंड के विज्ञापन पर सवाल पूछे तो उन्होंने जनार्दन की बजाए लालचंद से संपर्क करवाया. जब हमने लालचंद से बात की तो उन्होंने खुद को खबर मानक में “फ्रीलांसर” बताया. उनसे हमने जनार्दन कुमार का नंबर मांगा तो नंबर नहीं होने की बात कह कर उन्होंने फोन रख दिया. इस तरह काफी प्रयासों के बावजूद जनार्दन तक नहीं पहुंचा जा सका. 

जनवरी 2022 में जब खबर आई कि इस पत्रिका को लगभग 72 लाख रुपए विज्ञापन के बदले दिए जा रहे है तब उत्तराखंड में इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था. नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य अशोक नवरत्न ने सवाल उठाए थे. नवरत्न ने इस विज्ञापन भुगतान को लेकर उत्तराखंड के लोकायुक्त को पत्र लिखा था, जिसकी एक प्रति राज्यपाल और नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई थी. वहीं यूनियन ने भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री धामी को पत्र लिखा था. इसके बाद फरवरी, 2022 में राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद यह भुगतान अस्थायी रूप से रोक दिया गया.  हालांकि, न्यूज़लॉन्ड्री के पास मौजूद उत्तराखंड सूचना विभाग के दस्तावेज के मुताबिक ख़बर मानक को यह राशि अंततः वित्त वर्ष 2022-23 में जारी कर दी गई. 

ख़बर मानक की कहानी ये बताने के लिए काफी है कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने पिछले चार वित्तीय वर्षों में विज्ञापनों पर कितनी संजीदगी से खर्च किया होगा. बीते पांच सालों में प्रिंट मीडिया के जरिए विज्ञापनों पर 355.37 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. जिसमें से 314.37 करोड़ धामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद खर्च हुए. 

प्रिंट मीडिया में जो खर्च हुआ है, वह मुख्य रूप से तीन तरह से हुआ है. एक- अख़बारों और पत्रिकाओं को सीधे विज्ञापन देना, दूसरा- एजेंसियों के माध्यम से अख़बारों को विज्ञापन देना और तीसरा- सरकार द्वारा बुकलेट्स का प्रकाशन.

वित्त वर्ष 2020-21 जब प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत थे. तब अख़बारों, पत्र-पत्रिकाओं और बुकलेट्स के जरिए विज्ञापन पर 41 करोड़ रुपये खर्च हुए. इन 41 में से 27 करोड़ तो समाचार पत्र-पत्रिकाओं को सीधे भुगतान किए गए. वहीं, 9.07 करोड़ एजेंसियों के माध्यम से और 4.86 करोड़ बुकलेट्स छपवाने पर खर्च हुए. 

त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद तक़रीबन सौ दिन के लिए तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री बने. उनके इस्तीफा देने के बाद 4 जुलाई, 2021 से पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के सीएम हैं. 

Ads to all entities belonging the organisation.
imageby :

इन्हें मिला सबसे ज्यादा विज्ञापन

प्रिंट विज्ञापन नियमावली, 2016 के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने प्रकाशनों को तीन श्रेणियों में बांटा है. राष्ट्रीय श्रेणी- इन प्रकाशनों को तीन संस्करण प्रकाशित करने होंगे: एक दिल्ली से और दो अन्य राज्यों से. कम से कम एक संस्करण की न्यूनतम प्रसार संख्या 75,000 प्रति (कॉपियां) होनी चाहिए और उनमें से किन्हीं दो की संयुक्त प्रसारित प्रतियां कम से कम 1.25 लाख होनी चाहिए. राज्य श्रेणी- यह कम से कम दो संभागों से प्रकाशित होने चाहिए. वहीं कम से कम एक संस्करण की प्रसारित प्रतियां 50,000 होनी चाहिए और सभी संस्करणों की संयुक्त प्रसार संख्या न्यूनतम 75,000 होनी चाहिए. क्षेत्रीय श्रेणी- इसके अंतर्गत 2,000 प्रतियों की प्रसार संख्या अनिवार्य है. हालांकि, अगर प्रकाशन पहाड़ी क्षेत्रों में है तो कम से कम 1,000 प्रतियों का मानदंड रखा गया है. 

सीएम धामी के कार्यकाल की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर दैनिक जागरण 6 करोड़ रुपये के विज्ञापनों के साथ शीर्ष पर रहा. वहीं अमर उजाला 4.59 करोड़ रुपये के विज्ञापनों के साथ दूसरे स्थान पर रहा. इसके बाद हिंदुस्तान (4.14 करोड़ रुपये), इंडिया टुडे (4.02 करोड़ रुपये) और पाञ्चजन्य को 1.91 करोड़ रुपये मिले हैं. 

सूचना विभाग के दस्तावेजों में हमें पंजाब केसरी को कुल 2.09 करोड़ रुपये दिए जाने का जिक्र मिलता हैं. हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि ये पंजाब केसरी के किस समूह को गए हैं. मालूम हो कि पंजाब केसरी समूह सालों पहले दो हिस्सों में बंट चुका है. केसरी समूह के बंटवारे की कहानी आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

उत्तराखंड से प्रकाशित क्षेत्रीय-राज्य-स्तरीय प्रकाशनों में द संडे पोस्ट 1.26 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर है. उसके बाद न्यूज़ वायरस (70.62 लाख रुपये), दैनिक हॉक (70.13 लाख रुपये), गढ़वाल पोस्ट  (57.74 लाख रुपये) और क्राइम स्टोरी (55.94 लाख रुपये) का नंबर आता है. 

उत्तराखंड से प्रकाशित न होने वाले कई समाचार पत्र-पत्रिकाओं ने भी सरकारी विज्ञापनों का एक बड़ा हिस्सा हासिल किया. लखनऊ से प्रकाशित दस्तक टाइम्स पत्रिका को सबसे ज्यादा 93.67 लाख रुपये का भुगतान किया गया. इसके बाद दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका हिल मेल (83.47 लाख), खबर मानक (71.99 लाख) ,  अमर भारती (64.08 लाख) और दैनिक टॉप स्टोरी को 54.33  लाख रुपये का विज्ञापन मिला है. 

इनके अलावा लखनऊ स्थित राष्ट्रीय स्वरूप को 52.8 लाख रुपये, कानपुर से प्रकाशित उर्दू दैनिक मता-ए-आखिरत को 39.61 लाख रुपये, मुंबई से प्रकाशित हिंदी विवेक को 35.45 लाख रुपये, गाजियाबाद के दैनिक हिन्ट को 33.24 लाख रुपये और राजस्थान बाल कल्याण समिति की स्मारिका को 26.24 लाख रुपये का भुगतान उत्तराखंड सरकार ने किया है.  

imageby :

Subscribe now to unlock the story


paywall image

Why should I pay for news?

Independent journalism is not possible until you pitch in. We have seen what happens in ad-funded models: Journalism takes a backseat and gets sacrificed at the altar of clicks and TRPs.

Stories like these cost perseverance, time, and resources. Subscribe now to power our journalism.

  • Paywall stories on both Newslaundry and The News Minute
  • Priority access to all meet ups and events, including The Media Rumble
  • All subscriber-only interaction – NL Chatbox and monthly editorial call with the team
  • Stronger together merch – Fridge magnets and laptop stickers on annual plan

500

Monthly

4999

Annual
1001 off

Already a subscriber? Login

You may also like