एनसीपी में विभाजन के बाद महाराष्ट्र का यह पहला विधानसभा चुनाव है, और अजित पवार कठिन चुनावी लड़ाई का सामना कर रहे हैं.
एनसीपी में विभाजन के बाद महाराष्ट्र का यह पहला विधानसभा चुनाव है, और एनसीपी अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री अजित पवार एक कठिन चुनौती का सामना कर रहे हैं, जिसमें उन्हें अपनी राजनीतिक विरासत साबित करनी होगी. उनकी पार्टी ने 56 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से कई का सीधा मुकाबला एनसीपी (शरद पवार) गुट से है, जिसने 87 उम्मीदवारों को टिकट दिया है.
इस विशेष बातचीत में, श्रीनिवासन जैन से बात करते हुए अजित पवार महायुति गठबंधन की कमजोर कड़ी कहे जाने के सभी दावों को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने पांच साल पहले एक भी लोकसभा सीट नहीं जीती थी...क्या आप सब भूल गए हैं?”
पार्टी की स्पष्ट विचारधारा न होने के आरोपों पर उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में विचारधारा के बारे में मत पूछिए. राज्य की पूरी राजनीति बदल चुकी है. यहां हर कोई सत्ता चाहता है. सत्ता के लिए विचारधारा को किनारे कर दिया गया है.”
जब उनसे पूछा गया कि शरद पवार भाजपा खेमे में क्यों नहीं गए, तो एनसीपी प्रमुख ने कहा, “पवार साहब के दिमाग में क्या है, यह कोई नहीं जान सकता. न आंटी, न ही सुप्रिया (सुले).”
उपमुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि बारामती लोकसभा सीट पर अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले के खिलाफ उतारना गलती थी. “मुझे अपनी पत्नी को नहीं उतारना चाहिए था. लोगों को यह पसंद नहीं आया.”
अजित पवार ने यह भी कहा कि उन्हें उन नेताओं की वापसी की कोई चिंता नहीं है जो उनके चाचा के खेमे में जा रहे हैं. “जिसे जाना है, वो जा सकता है. जो मेरे पास आता है, उसे मैं ले लेता हूं.”
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