जोशीमठ: चार महीने बाद दरारों वाले घरों में ही क्यों लौटने लगे लोग?

उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धंसाव के बाद जनवरी में राहत शिविरों में भेजे गए कई परिवार वापस उन्हीं घरों में लौटने लगे हैं.

WrittenBy:वर्षा सिंह
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“30 अप्रैल को होटल वाले आए और मुझसे चाबी ले ली. उन्होंने मुझसे होटल खाली करने को कहा. मुझे भी उनकी बातें दस बार क्यों सुननी थी. हम पति-पत्नी और दो बच्चे. मेरे भाई के परिवार के पांच सदस्य भी वहीं दूसरे कमरे में रह रहे थे. हमारा खाना भी ढंग से नहीं हो रहा था. पर्यटक आते और खूब हल्ला-गुल्ला होता था. बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे. मेरे भाई के बेटे का बोर्ड का इम्तिहान था. वह भी बिगड़ गया. वैसे भी यहां लगातार बारिश हो रही है. बर्फ गिर रही है. होटल में हीटर भी नहीं लगाने देते थे. आग जलाने का कोई साधन नहीं था. अपना घर ही ठीक होता है.”

इस वर्ष जनवरी में आपदाग्रस्त घोषित किए गए चमोली के जोशीमठ के सुनील गांव के निवासी पीपी सकलानी यह सब बताते हैं. 30 अप्रैल को वह परिवार समेत अपने घर वापस लौट आए. वही घर, जिसे दरारों के चलते जनवरी में जोखिमभरा घोषित किया गया और होटल के एक कमरे में रहने की व्यवस्था की गई. 

सकलानी कहते हैं, “हम अपने घर में पड़ी दरारें खुद ही दुरुस्त कर रहे हैं और इसे रहने लायक बना रहे हैं. दरार के चलते बारिश का पानी कमरे में आ रहा था तो मैंने तिरपाल से ढंक दिया. यहां मेरी परचून और चाय की दुकान है. हमें अपना रोजगार भी चलाना है.”

अक्टूबर 2021 से भू-धंसाव झेल रहे जोशीमठ की स्थिति जनवरी 2023 में बेहद चिंताजनक हो गई. दरारें चौड़ी और गहरी हो गईं. जगह-जगह पानी के रिसाव के चलते यहां के सभी नौ वार्ड के 868 भवनों में दरारें दिखने लगीं. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इनमें से चार वार्ड के 181 भवनों को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किया.

सुनील गांव में रह रहे पीपी सकलानी का भवन भी इनमें से एक था. जनवरी में 278 परिवारों को उनके घरों से निकालकर होटलों, विद्यालयों और अन्य सुरक्षित भवनों में शिफ्ट किया गया था. हालांकि, चार महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और ये लोग असमंजस में अपना समय गुजार रहे हैं.

तारीख पर तारीख!

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती कहते हैं, “विस्थापित कर होटल, विद्यालय, धर्मशालाओं और अन्य भवनों में लाए गए लोगों को पहले 31 मार्च को कमरे खाली करने को कहा गया. हमने इसका विरोध किया तो ये अवधि 30 अप्रैल तक बढ़ा दी गई. फिर लोगों को राहत शिविर खाली करने के आदेश दे दिए गए.”

अतुल कहते हैं, “जनवरी में जो घर असुरक्षित थे, उन्हें भारत सरकार की प्रमुख संस्था केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान और राज्य सरकार ने असुरक्षित करार दिया था. लोगों को उन घरों को तत्काल खाली करने का फरमान जारी किया गया. जिन लोगों ने घर स्वेच्छा से खाली नहीं किए, उनसे जबरन खाली करवाया गया. कहीं-कहीं तो पुलिस के जोर पर भवन खाली करवाए गए. क्या चार महीने बाद 30 अप्रैल 2023 से अब वही असुरक्षित घर सुरक्षित हो गए. होटल मालिक कमरे खाली करवा रहे थे क्योंकि प्रशासन के ऐसे ही आदेश थे.”

इस समय बद्रीनाथ यात्रा भी चल रही है. जिसके लिए यात्री जोशीमठ होते हुए जाते हैं. एक बार फिर राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध हुआ तो 30 अप्रैल तक राहत शिविरों में रहने की दी गई मियाद 31 मई तक के लिए बढ़ा दी गई. अतुल कहते हैं कि यात्रा के समय राज्य सरकार किसी तरह का विरोध नहीं उठने देना चाहती.

पूरा दिन गांव में, रात होटल में

सुनील गांव की निवासी अंजू सकलानी का परिवार अब भी होटल के एक कमरे में रह रहा है. वह बताती हैं, “6 जनवरी की रात 11 बजे हमें हमारे घर से उठाया गया था. हम सब सो रहे थे और पुलिस-प्रशासन के लोग हमारे घर पर आए कि यहां खतरा है, यहां से चलो. हमें जबरन होटल ले गए. क्या अब खतरा नहीं है. इतनी बारिश हो रही है. हमें बार-बार होटल खाली करने को बोलते हैं. पहले 30 मार्च को निकालने की कोशिश की. फिर 30 अप्रैल को आ गए. अब 30 मई को आ जाएंगे. होटल से निकलना पड़ा तो हम फिर उसी टूटे-फूटे मकान में लौटेंगे. और कहां जाएंगे?”

अंजू बताती हैं कि वह परिवार समेत सारा दिन अपने उसी दरारों वाले घर में रहती हैं और रात को सिर्फ सोने के लिए होटल जाती हैं. गांव के कई परिवार ऐसा ही कर रहे हैं. 

वह कहती हैं, “पति और बेटी के साथ हम सुबह-सुबह गांव आ जाते हैं. खेतीबाड़ी करते हैं. गाय की देखभाल करते हैं. उसका दूध बेचकर ही हमारा गुजारा चलता है. खाना भी हम अपने घर पर ही बनाते हैं. होटल में दो महीने खाना मिला. उसके बाद खाना देना बंद कर दिया.”

लाखों खर्च

जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 1 मई के बुलेटिन के मुताबिक जोशीमठ में 132 परिवार के 502 सदस्य राहत शिविरों में रह रहे हैं. जबकि 164 परिवार के 493 सदस्य रिश्तेदार या किराए पर रहने के लिए चले गए हैं. पुनर्वास पैकेज के तहत 53 प्रभावित परिवारों को 14.39 करोड़ रुपए बतौर मुआवजा दिया जा चुका है. 

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के प्रवक्ता कमल रतूड़ी कहते हैं, “राज्य सरकार इस पूरी आपदा को सही तरह से संभाल नहीं पा रही. हमने शुरुआत में ही मांग की थी कि प्रति परिवार पांच लाख रुपए एकमुश्त दे दीजिए ताकि वे अपने रहने की अस्थायी व्यवस्था खुद ही कर सकें. साथ ही उनके भवन और जमीन दोनों का मुआवजा दीजिए ताकि वे स्थायी बंदोबस्त कर सकें. लोगों को उनके भवन का पैसा दिया जा रहा है लेकिन जमीन को लेकर कुछ भी तय नहीं है.”

रतूड़ी कहते हैं कि अब तक लाखों रुपए होटलों व राहत शिविर के अन्य भवनों पर खर्च किए जा चुके हैं. यही रकम प्रभावित लोगों पर खर्च की जा सकती थी. 

वे कहते हैं, “सरकार का पैसा व्यर्थ खर्च हो रहा है. होटल या अन्य भवन के एक कमरे का किराया 900 रुपए प्रति दिन है. खाने का खर्च एक सदस्य का एक समय का 400 रुपए है यानी तीन समय के भोजन का खर्च प्रति व्यक्ति 1200 रुपए. तो आपने एक परिवार पर पहले ही 4-5 लाख रुपए खर्च कर दिया. इस दौरान होटल वालों को एक महीने में लाखों रुपए दिए. इन पैसों का सही इस्तेमाल नहीं किया.”

रतूड़ी कहते हैं कि अब यात्रा का समय है. एक कमरे का एक दिन का किराया 3-5 हजार रुपए तक मिल जाता है. इसलिए अब कमरे खाली कराना चाह रहे हैं. चार महीने बीत चुके हैं, अभी तक मात्र 53 परिवारों को ही मुआवजा दिया जा सका है.

राहत शिविरों में कब तक रहेंगे?

एसडीएम कुमकुम जोशी जोशीमठ में आपदा से जुड़े कार्यों का जिम्मा संभाल रही हैं. इसके अलावा बद्रीनाथ यात्रा, 20 मई से शुरू हो रही हेमकुंड साहिब यात्रा, 1 जून से फूलों की घाटी की यात्रा, बद्रीनाथ धाम में वीवीआईपी मूवमेंट्स समेत क्षेत्र के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर है.

न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में वह प्रभावित लोगों के दरारों वाले भवनों में वापस लौटने से इंकार करती हैं. 

वे बताती हैं, “हमारी जानकारी में 3-4 ऐसे परिवार आए थे, जो उन्हीं घरों में लौट गए थे लेकिन हमने उन्हें वापस होटल बुला लिया. ज्यादातर लोग किराए पर या फिर रिश्तेदारों के यहां रहने चले गए हैं. ये भ्रम हुआ था कि 30 अप्रैल तक होटल में रहने की अनुमति है. हमने होटल एसोसिएशन को भी सख्ती से बोला है कि लोगों को नहीं हटाया जाएगा. रात में लोग राहत शिविरों में रहने आ रहे हैं.”

जोशीमठ से 12 किलोमीटर दूर बनाए जा रहे प्री-फेब्रिकेटेड आवास में रहने के लिए प्रशासन के पास कोई आवेदन नहीं आए.

मनोहरबाग क्षेत्र के आपदा पीड़ित और जोशीमठ होटल एसोसिएशन के सदस्य सूरज कपरवाण मानते हैं कि राहत शिविरों में रह रहे कई परिवार लौट गए हैं. 

वह कहते हैं, “ये समय होटल वालों की आमदनी का है. पिछले छह महीने से आपदा के चलते स्थानीय होटल वालों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी. सरकार होटल के कमरों के बहुत अच्छे दाम नहीं दे रही थी. साथ ही होटल के कमरे पर्यटक के लिहाज से बनाए गए हैं. जिसमें सामान समेत एक परिवार का रहना आसान नहीं था. लोग दिक्कत में थे और होटल वाले भी. होटल के कमरों की स्थिति लगातार खराब हो रही थी.” 

वहीं, प्रभावित लोगों के रहने के लिए बनाए जा रहे 150 प्री-फेब्रिकेटेड आवास अब भी पूरी तरह तैयार नहीं हो सके हैं. अतुल सती कहते हैं, “मात्र 15 ऐसे आवास ही रहने लायक बन पाए हैं. लेकिन ये जोशीमठ से 12 किलोमीटर दूर नीती घाटी के ढाक क्षेत्र में हैं. वहां उतनी दूर जाने के लिए कोई तैयार नहीं है. लोगों के खेत, रोजगार, विद्यालय सब यहां है.”

एसडीएम कुमकुम जोशी भी कहती हैं कि प्री-फेब्रिकेटेड आवास के लिए कोई आवेदन नहीं आए. 

जोशीमठ पर वैज्ञानिक रिपोर्ट का लंबा होता इंतजार

अतुल सती कहते हैं, “अब ज्यादा निर्णायक समय है. बरसात आने वाली है. लोगों को सुरक्षा की ज्यादा जरूरत है. लोग कहां रहेंगे, कहां जाएंगे, कुछ भी स्पष्ट नहीं है. जोशीमठ भू-धंसाव को लेकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की वैज्ञानिक रिपोर्ट अब तक नहीं आई है. उसमें ऐसा क्या कहा गया है कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है. हमारा संदेह है कि उसमें जोशीमठ या एनटीपीसी की जलविद्युत परियोजना के बारे में कोई बहुत गंभीर बात कही गई हैं.”

23 अप्रैल को एनडीएमए की पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (आपदा के बाद उपजी आवश्यकताओं का मूल्यांकन) की 16 सदस्यीय टीम ने यहां निरीक्षण किया. इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से जोशीमठ के पुनर्निर्माण के लिए राज्य द्वारा मांगे गए 2942.99 करोड़ पर फैसला लिया जाएगा.

इन दोनों ही रिपोर्ट से जोशीमठ की स्थिति स्पष्ट होगी. 

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला कहते हैं, “कई बड़े वैज्ञानिक संस्थान ये रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. इसमें थोड़ा समय लगता है. इन रिपोर्ट्स के आने पर राज्य सरकार को ये पता चल जाएगा कि किन इलाकों को हमेशा के लिए खाली करना है. किस क्षेत्र में सुधार के उपाय किए जाने हैं. लोगों की इस शंका का समाधान भी हो जाएगा कि एनटीपीसी की सुरंग की वजह से ये भू-धंसाव हुआ है या नहीं.”

वहीं, भू-विज्ञानी और जोशीमठ का सर्वेक्षण कर चुके डॉ. एसपी सती भी जोशीमठ पर एनडीएमए की रिपोर्ट सार्वजनिक करने में हो रही देरी पर सवाल उठाते हैं. वे कहते हैं, “जनवरी में गठित समिति की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई. ऐसा क्या है जोशीमठ में, जो दिख नहीं रहा है; जिसे ढूंढ़ने में इतना समय लग रहा है.” वह आशंका जताते हैं कि चारधाम यात्रा चल रही है, मामला तूल न पकड़े, क्या पता इस वजह से रिपोर्ट रोकी गई हो. 

डॉ. सती कहते हैं कि या तो आप ये घोषणा करें कि जोशीमठ अब सुरक्षित हो गया है और इसका कारण बताएं, नहीं तो फिर उन्हीं घरों में लोगों को कैसे रहने दे रहे हैं?

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