किस तरह से पहलवान बेटियों के संघर्ष को नकारने में जुटा है मीडिया, प्राइम टाइम विश्लेषण

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों का धरना जारी है. लेकिन देश का तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया उनके इस संघर्ष को राजनीतिक रंग देने और आरोपी बृजभूषण को पाक-साफ बताने में जुटा है. 

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शुक्रवार का दिन धरनारत पहलवानों के लिए काफी अहम रहा. पहलवानों को धरने पर बैठे हुए छह दिन हो चुके थे. छह दिन बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जीत मिली और दिल्ली पुलिस बृजभूषण शरण सिंह पर एफआईआर लिखने के लिए तैयार हो गई. इसके बाद देर शाम बृजभूषण के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गईं. इनमें से एक पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज की गई. 

वहीं, एफआईआर के बाद भी पहलवानों ने साफ ऐलान किया कि वे धरना खत्म नहीं करेंगे और बृजभूषण की गिरफ्तारी होने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे. ऐसे में हमने ये जानना चाहा कि आखिर देश के प्रमुख हिंदी चैनलों ने पहलवानों के इस मुद्दे को किस तरह से जनता के सामने रखा है. क्या वे चैनल अपने प्राइम टाइम में पहलवानों के इस संघर्ष को जगह भी दे रहे हैं या नहीं?

न्यूज़ 18

न्यूज़ 18 पर सीनियर एंकर अमीश देवगन ने अपने प्राइम टाइम शो ‘आर पार’ में धरनारत पहलवानों के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की. अमीश का शो कर्नाटक चुनाव में नेताओं की बिगड़ती भाषा पर केंद्रित था. जिसका विषय “गाली से भरेगी वोट की झोली” रखा गया था. शो की शुरुआत में अमीश कहते हैं, “क्या आप अपना जन-प्रतिनिधि गालियों का वजन देखकर चुनते हैं या फिर उनके वचन देखकर?” उनका पूरा कार्यक्रम कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक स्पर्धा में भाषा के गिरते स्तर पर रहा.  

ज़ी न्यूज़

ज़ी न्यूज पर दीपक चौरसिया के प्राइम टाइम शो ‘कसम संविधान की’ में भी पहलवानों का मुद्दा पूरी तरह गायब रहा. चौरसिया ने अपने शो में अतीक अहमद की हत्या को लेकर चर्चा की. उन्होंने अतीक अहमद की हत्या में कहां चूक हुई पर चर्चा रखी. इस दौरान शो में एआईएमआईएम के प्रवक्ता आदिल हसन ने चौरसिया पर तंज भी कसा कि कैसे वो पिछले 14 दिनों से अतीक पर तो चर्चा कर रहे हैं लेकिन 6 दिन से धरनारत पहलवानों पर मौन हैं. इसके बाद दीपक चौरसिया एक ब्रेक लेते हैं और आदिल हसन चर्चा से बाहर हो जाते हैं. 

इंडिया टीवी

यहां रजत शर्मा अपने शो ‘आज की बात’ में महिला पहलवानों के मुद्दे को उठाते हैं. वे कहते हैं पहलवानों को पहली जीत तो मिल गई है अब आगे क्या होगा? इस दौरान उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि “क्या अब रेसलर्स धरना प्रदर्शन बंद कर देंगे?” वे शो की  शुरुआत बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी से करते हैं. 

शर्मा अपने शो में पहलवानों को ठीक-ठाक तवज्जो देते हैं और अपने शो में संतुलित से नजर आते हैं. साथ ही वे ये भी कहते हैं कि अगर भाजपा बृजभूषण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है तो उसे चुनावों में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसके बाद वे शो में बाकी मुद्दों जैसे कर्नाटक चुनाव और बाहुबली आनंद मोहन की रिहाई पर भी चर्चा करते हैं. 

टाइम्स नाऊ नवभारत 

यहां नविका कुमार के शो ‘सवाल पब्लिक का’ से पहलवानों का मुद्दा नदारद था. नाविका अपना कार्यक्रम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के नवीनीकरण पर खर्च हुए करोड़ों रुपे को मुद्दा बनाती हैं. वे पूरे शो में एक बार भी धरनारत पहलवानों का जिक्र नहीं करती हैं.  

एबीपी न्यूज़ 

यहां रुबिका लियाकत अपने प्राइम टाइम शो मास्टर स्ट्रोक में पहलवानों के मुद्दे को बस छूकर आगे बढ़ जाती हैं. वो अपने शो में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों को सुप्रीम कोर्ट का साथ मिल गया है पर बस थोड़ी सी चर्चा करती हैं. साथ ही रुबिका इस दौरान ये भी बताने की कोशिश करती नजर आती हैं कि  पहलवानों को राजनीतिक समर्थन मिल रहा है और राजनीतिक दलों ने पहलवानों के मुद्दे को हाईजैक कर लिया है. 

आज तक 

आज तक के दो बड़े स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप और सुधीर चौधरी दोनों ही अपने-अपने शो में पहलवानों के मुद्दे को उठाते हैं. अंजना जहां अपने शो में जंतर-मंतर पर धरनारत पहलवानों के साथ लाइव करती हैं और दूसरी ओर सुधीर अपने शो में बृजभूषण का इंटरव्यू दिखाते हैं. 

यहां अंजना अपने शो में ये कहती हैं कि वे किसी की तरफदारी के लिए पहलवानों को नहीं दिखा रहे हैं बल्कि इसीलिए दिखा रहे हैं कि देश को ये जानकारी हो कि कैसे बेटियों को इंसाफ के लिए जंतर-मंतर पर धरना करना पड़ रहा है. 

हालांकि, सुधीर चौधरी अगले ही शो में पहलवानों के धरने को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश करते हैं और बृजभूषण का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू चलाते हैं. इस दौरान वे कहते हैं कि इस धरने में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी शामिल हैं, जिससे कि भारत की छवि विदेशों में भी खराब हो रही है. 

चौधरी इस दौरान पप्पू यादव के धरने पर पहुंचने और सीएम योगी पर राजनीतिक हमले को भी मुद्दा बनाते हैं. वे कहते हैं कि उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था. सभी नेता आंदोलन के इस मंच का अपनी राजनीति के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. ये लोग यहां आकर मोदी को कोसना चाहते हैं.

टाइम्स नाउ नवभारत 

यहां सुशांत सिन्हा ने ‘न्यूज़ की पाठशाला’ में प्रदर्शनकारी खिलाड़ियों का कोई जिक्र नहीं किया. सुशांत ने केजरीवाल के घर को शीशमहल कहते हुए उसकी तुलना ताजमहल से की है. साथ ही अतीक अहमद के बारे में कहा कि पत्नी शाइस्ता प्रवीन के अलावा भी एक महिला से उनके संबंध थे. 

बता दें कि मीडिया पहले दिन से ही पहलवानों के प्रदर्शन को तवज्जों नहीं दे रहा है. देखा जाए तो मीडिया इन पहलवानों से ज्यादा आरोपी ब्रजभूषण शरण सिंह की कवरेज कर रहा है. ज्यादातर मीडिया संस्थानों ने पहलवानों की परेशानी जानने की बजाय सिंह का इंटरव्यू करना जरूरी समझा.  

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