झरिया कोलफील्ड की अंतहीन आग में फंसे लोगों की अंतहीन पीड़ा

झारखंड में धनबाद के बेलगड़िया में बसाए गए झरिया कोयला खनन क्षेत्र में भूमिगत आग व भू-धसान प्रभावित परिवारों के सामने रोजगार सबसे बड़ी समस्या है. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार पालने की है.

WrittenBy:राहुल सिंह
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झरिया कोलफील्ड का दृश्य.
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रोजगार के अलावा टाउनशिप में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. कई-कई दिनों तक पानी नहीं आना, टाउनशिप में गंदगी का बढ़ता अंबार, बजबजाती और कुछ जगहों पर सड़कों पर बहती नालियां, 5-10 सालों में ही भवन की दीवारों में दरार पड़ जाना और छत की झड़ती ढलाई को यहां के लोग दूसरी बड़ी समस्या मानते हैं. झरिया के घनुआडीह से यहां लाकर बसाए गए मनोहर शर्मा ने कहा, “इस कॉलोनी में पानी एक बड़ी दिक्कत है. एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई होती है.” इन दिक्कतों की वजह से बेलगड़िया टाउनशिप में बहुत सारे परिवार बबसना नहीं चाहते हैं.

झरिया मास्टर प्लान बनने की पृष्ठभूमि

झरिया देश के सबसे पुराने कोयला खनन क्षेत्र में एक है. यहां जमीन के अंदर आग की समस्या अंग्रेजों के जमाने से है. साल 1916 में यहां पहली बार आग की समस्या दर्ज की गई. धनबाद से सटे पश्चिम बंगाल के आसनसोल से सीपीएम से सांसद रहे हरदन राय एकीकृत बिहार व पश्चिम बंगाल की कोयला खदानों में लगी भूमिगत आग के मुद्दे पर काफी सक्रिय थे और उन्होंने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था और अदालतों में भी लेकर गए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर झरिया और पश्चिम बंगाल के रानीगंज कोयला क्षेत्र के असुरक्षित इलाके से लोगों के पुनर्वास की मांग की थी. इसका परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2003-04 में एक्शन प्लान बना और फिर 12 अगस्त 2009 को भारत सरकार ने उसे मंजूर किया.

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इस मास्टर प्लान में आग से निपटने और बीसीसीएल कर्मियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी बीसीसीएल को दी गई, जबकि भूतल पर सर्वे कराने और उस पर बने भवन व अन्य आधारभूत संरचना का डायवर्जन करने व गैर बीसीसीएल कर्मियों के पुनर्वास की जिम्मेवारी ज्रेडा यानी झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण को सौंपी गई. इस काम के लिए बीसीसीएल एवं ज्रेडा के लिए 7112.11 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया था. यह पैसा कोयल मंत्रालय की मुख्य कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड के द्वारा दिया जाता है.

गौरतलब है कि पिछले साल ही ज्रेडा का कार्य विस्तार समाप्त हो चुका है. जिला प्रशासन की ओर से नया प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है. एक अधिकारी ने बताया कि उक्त प्रस्ताव में यह प्रावधान शामिल है कि अगर कोई व्यक्ति आवास नहीं लेना चाहता है तो उसे उसके एवज में नकद राशि दे दी जाए. प्रस्ताव में यह बदलाव ऐसे हालात में किया गया है जब पूर्व में आवंटित मकानों को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं.

तीन गुना बढ़ी अवैध बसावट वाले परिवारों की संख्या

एक तरफ असुरक्षित क्षेत्रों से लोगों को हटाने की कोशिश हो रही है लेकिन दूसरी तरफ इन्हीं असुरक्षित क्षेत्रों में नए लोग बस भी रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2009 से 2019 के बीच अवैध बसावट वाले परिवारों की संख्या तीन गुना बढ़ी है.

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सांसद पशुपतिनाथ सिंह कहते हैं, “झरिया कोयला खनन क्षेत्र बहुत बड़ा है और इसमें कतरास, केंदुआ, सिजुआ जैसे कई इलाके हैं. बीसीसीएल के नोटिस के बाद भी अवैध रूप से लोग आ बसे हैं.” एक अधिकारी के मुताबिक बेलगड़िया में घर बनाने के लिए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण को 378 एकड़ जमीन मिली. संशोधित आकलन के बाद 15713 आवासों का निर्माण किया जाना है, जिनमें 7714 बन गए हैं. बाकी बचे 6321 आवास भी बन चुके हैं, लेकिन इनमें बुनियादी सुविधाओं को जोड़ा जाना बाकी है. 2019 से पहले इन आवासों में 3847 परिवारों और 2019 के बाद 338 परिवारों को शिफ्ट किया गया है. एक अधिकारी के अनुसार, जिन परिवारों को बेलगड़िया टाउनशिप में शिफ्ट किया गया है, उनमें करीब 2600 नॉन लीगल टाइटल होल्डर परिवार हैं. अब साल 2009 के बाद बसे नॉन लीगलटाइटल होल्डर को भी मानवीय आधार पर करीब कुल 4.13 लाख रुपए मुआवजा मिलना है. इसमें ढाई लाख मुआवजा, 500 दिनों का न्यूनतम पारिश्रमिक और करीब 16 हजार रुपए शिफ्टिंग अलाउंस शामिल है.

आग पर कुछ नियंत्रण, पर प्रदूषण विकराल

नए सर्वे के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि झरिया में आग पर काबू पाया जा रहा है. एक अधिकारी ने कहा कि शुरुआत में 595 साइटों को आग एवं भू-धसान प्रभावित माना गया था, वहीं नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के नए सर्वे के अनुसार यह संख्या 300 से कम हो गई है. वहीं आग नियंत्रण के लिए कई उपाय अपनाए जाते हैं. इसमें ट्रेंच कटिंग, सतह को रेत से भरना, आग वाले क्षेत्र में रेत की फ्लशिंग करना, इनर्ट गैस इन्फ्यूजन, रेत एवं बेंटोनाइट के मिक्सचर की फ्लशिंग करना, पानी के आवरण व तालाब के जरिए ठंडा करना, डिगिंग आउट करना आदि शामिल है. बीसीसीएल की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज में कहा गया है कि बीसीसीएल ने अपने अनुभव में डिगिंग आउट को आग बुझाने के लिए सबसे अच्छा विकल्प पाया और डीजीएमएस ने भी इसकी पुष्टि की है. बीसीसीएल के झरिया मास्टर प्लान के महाप्रबंधक पीयूष किशोर ने हमसे कहा, “बीसीसीएल की रणनीति अधिक से अधिक स्पॉट पर आग को नियंत्रित कर लेना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में 27 आग प्रभावित स्थलों को चिह्नित कर हम वहां पर फोकस काम कर रहे हैं.

विस्थापन एवं पुनर्वास के साथ झरिया में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है. धनबाद देश के वैसे प्रमुख शहरों में है, जहां वायु गुणवत्ता सबसे खराब है, लेकिन धनबाद में भी झरिया की वायु गुणवत्ता सबसे खराब है. झारखंड सरकार धनबाद में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया है. इस रिपोर्ट से यह पता चलता है कि 2012 से 2018 तक झरिया की वायु गुणवत्ता डेढ गुणा तक अधिक खराब हो गई. यहां पीएम10 धनबाद में सबसे अधिक 319.89 दर्ज किया गया था. अगर वर्तमान आंकड़े भी देखेंगे तो झरिया की वायु गुणवत्ता सेहत के लिए खराब है.

(साभार- MONGABAY हिंदी)

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