तेलुगू समाचार चैनलों ने कैसे की नागराजू की हत्या पर रिपोर्टिंग?

चैनलों पर अधिकतर भाषा अतिशयोक्ति पूर्ण थी, पूछे जाने वाले प्रश्न भी संवेदनहीन थे.

तेलुगू समाचार चैनलों ने कैसे की नागराजू की हत्या पर रिपोर्टिंग?
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4 मई को हैदराबाद के सरूर नगर में बिल्ली पुरम नागराजू की खुलेआम पीटकर और चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई.

नागराजू दलित थे. इसी साल जनवरी के महीने में उन्होंने सैयद अशरीन सुल्ताना से विवाह किया था. सुल्ताना के भाई और एक अन्य रिश्तेदार नागराजू की हत्या के आरोपियों में शामिल हैं, बताया जाता है कि सुल्ताना के परिवार को इस शादी से आपत्ति थी.

"ऑनर किलिंग" या "सम्मान के लिए की गई हत्या" के रूप में देखे जा रहे इस कत्ल ने तेलंगाना में रोष की एक लहर ला दी है. भारतीय जनता पार्टी ने सत्ताधारी दल तेलंगाना राष्ट्र समिति के ऊपर इस मामले पर चुप्पी साधने और कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी हत्या की भर्त्सना की है, उन्होंने कहा, "उस महिला ने अपनी मर्जी से शादी की थी और उसके भाई को उसके पति की हत्या करने का कोई हक नहीं था. यह संविधान के नजरिए से एक आपराधिक कृत्य है और इस्लाम के हिसाब से सबसे जघन्य अपराध है."

यह हत्या अनेक प्राइम टाइम शो और टीवी चर्चाओं पर भी छाई रही. मीडिया का नजरिया 4 मई के घटनाक्रम से संक्षिप्त में समझा जा सकता है जब पुलिस स्टेशन पर सुल्ताना को टीवी पत्रकारों ने घेर लिया. उन्हें थोड़ी देर पहले ही अपने पति की हत्या की सूचना मिली थी और वह सदमे में थीं. इसके बावजूद एक पत्रकार चीखते हुए बोला, "तुम्हें बोलना पड़ेगा! अगर नहीं बोलोगी, तो तुम्हें न्याय नहीं मिलेगा."

हमने कुछ प्रमुख तेलुगू न्यूज़ चैनलों पर इस घटना के कवरेज की पड़ताल की.

उदाहरण के लिए, एनटीवी ने 6 मई को अपने कार्यक्रम "बी एलर्ट" पर इस हत्या की चर्चा की. कार्यक्रम की एंकर सौजन्या सिम्हाद्री ने घटना में अपनी तरफ से भी मिर्च मसाला लगा दिया, उन्होंने कहा, "इस बहन का भाई, उसके पति की हत्या करने के मौके का इंतजार कर रहा था." साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस जुनून में उसकी "नींद और भूख भी उड़ गई" थी.

तेलुगू में उन्होंने कहा, "वह उसे तब तक मारते रहे जब तक उनका आपा ठंडा नहीं हो गया. उसका खून हैदराबाद की सड़कों पर बहा." एक अन्य बुलेटिन में एनटीवी ने इस बात को दोहराया कि, “हैदराबाद में जोड़ों को उनकी जाति के आधार पर निशाना बनाया और मारा जा रहा है."

एनटीवी ने उसी दिन नागराजू की पत्नी का इंटरव्यू भी लिया. सुल्ताना ने कहा, "मेरे पिता को नागराजू पसंद था लेकिन मेरा भाई हमेशा गालियां देता था और हमारे रिश्ते के खिलाफ था."

इंटरव्यू के अंत में, सुल्ताना के साथ मौजूद भाजपा के सभासद श्रीवाणी अंजन भी बोल पड़े, "उनकी खुलेआम किसी की हत्या करने की हिम्मत कैसे हुई? क्या ऐसा इसलिए कि किसी हिंदू की हत्या करने पर उनसे कोई सवाल नहीं पूछेगा? लड़का क्योंकि अनुसूचित जाति से आता है, इसलिए सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही."

उधर वी6 न्यूज़ तेलुगू चैनल पर एंकर पद्मा का ध्यान ओवैसी की टिप्पणी, "चाहे कोई किसी भी जाति या संप्रदाय से हो, हत्या गलत है." पर विशिष्ट रूप से केंद्रित था.

तीनमार वार्थलू नाम के कार्यक्रम में एंकर ने कहा, "वे कहते हैं कि जाति और संप्रदाय मायने नहीं रखते. लेकिन वह मायने रखते हैं, खासतौर पर जहां प्रेम और शादियों की बात आती है." इस कार्यक्रम में भाजपा के विवेक वेंकटास्वामी और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला का नागराजू के परिवार से मिलने का फुटेज भी चलाया गया था.

ईटीवी तेलंगाना ने 5 मई को हुई हत्या के खिलाफ भाजपा के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित रखा. सरूरनगर पुलिस थाने के सामने हुए इस प्रदर्शन में भाजपा कार्यकर्ताओं को "जिहादियों खबरदार" का नारा लगाते हुए देखा जा सकता था.

ईटीवी ने उसी दिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बांदी संजय कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी प्रसारित किया. नागराजू की मृत्यु को "सांप्रदायिक आतंक" बताते हुए कुमार ने कहा, "आज एक हिंदू लड़के की हत्या पर सब चुप क्यों हैं, कहां हैं वह सब लोग जो मुसलमानों के मारे जाने पर आवाज उठाते हैं?"

5 मई को ईटीवी तेलंगाना के शो प्रतिध्वनि में एंकर स्वप्ना प्रिया ने मनोचिकित्सक यमुना पाठक और ऑल इंडिया महिला संस्कृतिका संघम की राज्य संयोजक सीएच प्रमिला के साथ इस घटना पर चर्चा की. कार्यक्रम के टिकर पर "पागा…सेगा" अर्थात क्रोधित प्रतिशोध लिखा था.

हालांकि बातचीत ऑनर किलिंग पर शुरू हुई थी, लेकिन जल्द ही वह एक नैतिकता के प्रवचन में बदल गई जहां एंकर के प्रश्न कुछ इस तरह के थे, "आजकल, चाहे वह प्रेम विवाह हो या परिवार की पसंद से हुई शादी हो, शादीशुदा जोड़ों के बीच काफी गुस्सा और आक्रामकता है जो उन्हें एक दूसरे को मारने की तरफ धकेल रहा है. आपके हिसाब से ऐसा क्यों है?"

प्रमिला ने उत्तर दिया, "पहले ऐसे मामले बिल्कुल नहीं होते थे. ये हत्याएं, हिंसा और ऐसे अतिशयोक्तिपूर्ण कदम हमारी संस्कृति के खिलाफ हैं. आजकल, यह प्रदूषित संस्कृति बहुत बढ़ गई है."

इस पर पाठक की राय थी, "आजकल तलाक के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि आज की पीढ़ी भौतिकतावादी बन गई है, उनमें एक दूसरे के लिए कोई आस्था, कोई विश्वास और कोई सम्मान नहीं है. वह संबंधों को हल्के में लेते हैं."

कार्यक्रम के अंत में एंकर पूछती हैं, "जिन्हें वह प्यार करते हैं, उनसे शादी करने के बारे में बच्चे अपने माता-पिता को कैसे बताएं? आज सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए कि ऐसी घटनाएं फिर से न हों?"

प्रमिला ने कहा, "आजकल की युवा पीढ़ी के सामने हिंसक सामग्री आ चुकी है. सेक्स, वीडियो गेम, पोर्नोग्राफी, हिंसक साहित्य और फिल्मों जैसी चीजों पर प्रतिबंध होना चाहिए. आजकल के युवा, वे केवल अपने दोस्तों के साथ ही समय बिताते हैं. लेकिन उन्हें पारंपरिक साहित्य और अच्छी सामग्री देख व पढ़ कर खुद को शिक्षित करना चाहिए."

आईड्रीम तेलुगू न्यूज़ नाम के चैनल ने 5 मई को अपने शो टू द प्वाइंट पर नागराजू की हत्या पर चर्चा की, इसकी एंकर स्वप्न सुंदरी थीं. कार्यक्रम के टिकर पर लिखा था, "प्रेमिस्ते चम्पेसारू" - उन्होंने प्रेम किया, और वे मारे गए.

इस कार्यक्रम के पैनल पर प्रोग्रेसिव ऑर्गेनाइजेशन ऑफ विमेन की अध्यक्ष वी संध्या, जन विज्ञान वेदिका के सदस्य एसएम रमेश और मरेदू मोहन, जिनका परिचय एक दलित एक्टिविस्ट के रूप में कराया गया, मौजूद थे.

मोहन का दावा था कि भारतीय हर दिन "कहीं ज्यादा चरमपंथी" होते जा रहे हैं, और उनकी इस बात पर एंकर सहमति में गर्दन हिला रही थीं. उनका यह भी कहना था कि यह कोई ऑनर किलिंग नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हत्या थी.

लव जिहाद की सड़ी-गली व काल्पनिक साजिश की बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह मुसलमान जानबूझकर अपना नाम हिंदू महिलाओं को फंसाने के लिए बदल लेते हैं, और शादी के बाद उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करते हैं. जब हिंदू पुरुष मुस्लिम महिला से शादी करते हैं, तो हिंदू ही पीड़ित होता है और जब हिंदू महिलाएं मुस्लिम पुरुषों से शादी करती हैं, तब भी हिंदू ही भुक्तभोगी होता है. केवल हिंदू ही पीड़ित हैं और यह सांप्रदायिक रूप से निशाना बनाया जाना है."

संध्या ने इस बात से असहमति जताई और कहा कि यह एक लिंगभेद का मुद्दा है, उन्होंने कहा, "ऐसी भयंकर घटनाएं तभी होती हैं, जब महिलाएं सीमा रेखा को पार कर, जो उनका मन कहता है वो करती हैं."

टीवी-9 तेलुगू न्यूज़ ने 8 मई को इस घटना की कवरेज में मदर्स डे का तड़का भी लगा दिया, एंकर ने कहा, "आज जब सारी दुनिया मदर्स डे मना रही है, अपने बेटे को खोने की पीड़ा से मर रही इस मां को देखिए." चैनल ने, "भाजपा ने राज्यपाल से कहा, टीआरएस-एमआईएम ने साथ मिलकर लड़के की हत्या की", जैसी ब्रेकिंग न्यूज़ हैडलाइन भी चलाईं. भाजपा ने यह आरोप लगाया है कि जो आरोपी इस समय हिरासत में नहीं हैं, उनमें से एक टीआरएस का सदस्य है और दूसरा एआईएमआईएम का.

चैनल ने सुल्ताना की मां का इंटरव्यू भी लिया, और कार्यक्रम में उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए उन्हें वह इंटरव्यू दिखाने का निर्णय लिया. इंटरव्यू लेने वाले ने सुल्ताना से इस प्रकार के प्रश्न पूछे, "आपको कैसा महसूस हो रहा था जब जिसे आप सबसे ज्यादा प्यार करती हैं वह आपके सामने मर रहा था? क्या उसे उस समय पता था कि उस पर आपका भाई हमला कर रहा था? अगर आप अभी अपने भाई को देखें तो आप क्या करेंगी?"

स्टूडियो में बैठे एंकर ने कहा, "आज हम सब यह सोच रहे हैं कि काश उनके (लड़की) पिता जिंदा होते. उन्होंने ऐसा बिल्कुल नहीं होने दिया होता."

उसी दिन टीवी-9 तेलुगू ने हत्या पर भी एक चर्चा का कार्यक्रम रखा. इस कार्यक्रम में एंकर सत्य यल्ला के साथ सुल्ताना, प्रोग्रेसिव ऑर्गेनाइजेशन ऑफ वीमेन की अध्यक्ष वी संध्या, सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बुरहान, अधिवक्ता प्रसन्ना, एक्टिविस्ट सर्वथ, पूर्व पुलिस अधिकारी रेड्डी अन्ना और मनोवैज्ञानिक वीरेंद्र शामिल हुए.

इस वार्ता में एक अलग मोड़ लिया जब प्रसन्ना ने कहा, "यह समझा जा सकता है कि इस तरह की अतिरेक घटनाएं क्यों होती हैं. जब एक लड़की, जिसे मां बाप ने पूरी जिंदगी संरक्षण दिया है, घर छोड़ देती है तो माता पिता बदहवासी की हालत में आ जाते हैं. खासतौर पर जब मामला धर्म और सम्मान का हो, तो यह असहनीय हो जाता है."

बुरहान ने कहा, "इस तरह की जातियों का मूल कारण आर्थिक दर्जा है. इन निचले मध्यमवर्गीय लोगों की सोच बहुत छोटी है, उन्हें केवल इस बात की परवाह है कि समाज में ऊंचे दर्जे के लोगों के मुकाबले उनके बारे में क्या सोचा जाएगा. उन्हें अंतरजातीय शादियों से कोई दिक्कत नहीं है."

लेकिन यह चर्चा इससे भी कहीं निचले स्तर पर तब गिर गई जब एंकर ने देखा कि कार्यक्रम के दौरान सुल्ताना अपने होश खोती दिख रही हैं. लेकिन इसके बावजूद भी वह उन पर सवाल पर सवाल दागते रहे.

कार्यक्रम में पैनल पर कोई भी दलित मौजूद नहीं था.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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