जेएनयू में ताजा विवाद: जानिए क्या है एबीवीपी और लेफ्ट के छात्रों में भिड़ंत का पूरा मामला

जेएनयू घटना में एबीवीपी और वामपंथी संगठनों ने एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगाया. न्यूज़लॉन्ड्री की टीम ने घटना को जानने के लिए ग्राउंड पर पहुंची और दोनों पक्षों के घायल छात्रों के साथ बातचीत की.

जेएनयू में ताजा विवाद: जानिए क्या है एबीवीपी और लेफ्ट के छात्रों में भिड़ंत का पूरा मामला
Shambhavi Thakur
  • whatsapp
  • copy

विवेक ने कहा, “जैसे ही शिवम चौरसिया ने मुझे देखा, उन्होंने मेरी तरफ इशारा किया और लोगों से कहा कि मुझे पीटें. मुझे दस मिनट तक पीटने के बाद, उन्होंने मुझे एक लोहे की अलमारी और एक कुर्सी के बीच दबा दिया."

विवेक ने आगे कहा कि उसे पहले भी निशाना बनाया गया था क्योंकि "एबीवीपी किसी भी संगठन के एक्टिव छात्रों के साथ मारपीट करते है, ताकि नए एक्टिविस्ट आगे आने से डरें."

हंड्रेड फ्लावर्स की लता ने कहा कि जेएनयू की राजनीतिक संस्कृति को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है. यह कहते हुए कि 2016 के कैंपस हिंसा और कोविड के लगभग दो वर्षों के बाद से कैंपस बंद रहा, सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए छात्रों के लिए बहुत कम कैंपस स्पेस बचा है. उन्होंने कहा की छात्रावास के मेस में कार्यक्रम आयोजन करने के लिए रोक लगा दी गई और महामारी में राजनीतिक आयोजनों के लिए ऐसे स्थानों को बंद कर दिया गया.

"लेकिन एबीवीपी को अभी भी मेस में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिलती है.” ताप्ती और माही मंडावी छात्रावास के मेस का उपयोग हाल ही में एबीवीपी के कार्यक्रमों के लिए किया गया.

लता ने कहा, एबीवीपी "नए छात्रों के मन में डर पैदा करना चाहती है," कैंपस में लोकतांत्रिक और वामपंथी संस्कृति, बहस और चर्चा खत्म करना चाहती है. "यदि बीए और एमए के छात्र देखते हैं कि छात्रों को पीटा जा रहा है तो वे इस तरह के आयोजनों के लिए आना बंद कर सकते हैं."

नायक के अनुसार, “2016 के बाद से, कंपनी साइक्लोप्स से सुरक्षा गार्ड की तैनाती की गई है, जिसमें केवल पूर्व सैनिकों को गार्ड के रूप में नियुक्त किया जाता है. इससे परिसर के "सैन्यीकरण" और भय का माहौल बनता है.”

"हम शांति से बैठे थे"

न्यूज़लॉन्ड्री ने जेएनयू के एबीवीपी कैंपस अध्यक्ष शिवम चौरसिया से बातचीत की. उन्होंने कहा, "एबीवीपी के 40 से 45 छात्र पहले से ही अपनी नियमित इकाई की बैठक के लिए जेएनयूएसयू कार्यालय के अंदर बैठे थे. तब कुछ छात्र आए और हमें कमरा खाली करने के लिए कहने लगे क्योंकि वे अपना इवेंट करना चाहते थे."

उन्होंने कहा, "जब हम आए तो कोई अंदर नहीं था, अन्यथा हम रूम में नहीं जाते." उन्होंने कहा कि एबीवीपी के सदस्यों ने हाल ही में कमरा उस वक्त खाली कर दिया था जब उसमें पहले से ही एक बैठक चल रही थी. उन्होंने कहा “मुझे नहीं पता कि इसे जेएनयूएसयू कार्यालय क्यों कहा जाता है, यह छात्र गतिविधि केंद्र है.”

चौरसिया ने कहा, "पहले वह पचास लोग थे, जो जल्द ही बढ़कर 150 हो गए, जिसमें बाहरी लोग भी शामिल थे, जो छात्र नहीं थे.” फिर इन लोगों ने एबीवीपी और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाना शुरू कर दिया और "अपमानजनक" टिप्पणी करना शुरू कर दिया.

एबीवीपी अध्यक्ष ने कहा, उनके छात्र संगठन के नेताओं ने केवल भारत समर्थक नारे लगाए. "गोली मारो" का नारा नहीं लगाया. “जब एबीवीपी के छात्र कार्यक्रम स्थल से बाहर जाने लगे, तो एसएफआई, आइसा और बाहरी लोगों ने उन्हें धक्का देना शुरू कर दिया, जिसमें छात्र घायल हो गए और एक छात्रा को प्रताड़ित भी किया गया.”

उन्होंने कहा "हमने उन्हें अपनी बैठक के लिए कैंपस के मुख्य सुरक्षा अधिकारी से लिखित में अनुमति ली, लेकिन उन्होंने नहीं सुना." न्यूज़लॉन्ड्री ने अनुमति पत्र को देखा जिसपर ना कोई तारीख थी और ना ही किसी के हस्ताक्षर.

चौरसिया ने बताया "उस रात एबीवीपी के कई छात्र बुरी तरह घायल हो गए और उन्हें एम्स ले जाया गया.” उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत वसंत कुंज उत्तर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है.

सोमवार को लगभग शाम 4 बजे, एबीवीपी द्वारा वामपंथी समूहों के खिलाफ एक विरोध मार्च का आयोजन किया गया. न्यूज़लॉन्ड्री ने कथित रूप से घायल एबीवीपी सदस्यों से बात की, जो सभी मार्च में मौजूद थे.

25 वर्षीय एबीवीपी कार्यकर्ता और पीएचडी की छात्रा श्रीदेवी की शिकायत में हमलावरों की पहचान उमेश यादव, पुल्की और विवेक पांडे के तौर पर की गई है. वह न्यूज़लॉन्ड्री से कहती हैं कि “उन्हें नहीं पता उन पर किसने हमला किया था.”

उन्होंने कहा, "हम अपनी बैठक के लिए शांति से बैठे थे, जब लेफ्ट समूह के एक के बाद एक छात्र आए और हम पर चिल्लाने लगे. इस दौरान इन लोगों ने "नारे लगाए" और "बहस" करने लगे, साथ ही मांग की कि एबीवीपी कमरा खाली कर दे.

श्रीदेवी ने कहा कि "अराजकता" में उसकी गर्दन पर चोट लग गई जिसके बाद उसे चक्कर आ गया. "मैं सफदरजंग अस्पताल गई और जहां मुझे ग्लूकोज चढ़ाया गया."

दो अन्य छात्र, अभिषेक और कन्हैया कुमार, जिन्होंने अपनी चोटों के बारे में लिखित शिकायत दर्ज की. वह बैनर लेकर विरोध मार्च में आगे चल रहे थे. अभिषेक, जो मेडिकल पट्टी लगाए हुए थे उन्होंने अपनी लिखित शिकायत में उल्लेख किया है कि उन्हें आइसा के दो छात्रों द्वारा ‘पीटा गया’. जिसके कारण ‘उनके सिर और हाथ’ में गंभीर चोटें आई हैं.

अभिषेक ने अपनी शिकायत में कहा है, "उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकियों के साथ-साथ जातिवादी गालियां भी दीं."

एबीवीपी कार्यकर्ता और छात्र कन्हैया कुमार ने अपनी शिकायत में कहा कि जेएनयू छात्र लता और विवेक पांडे सहित अन्य ने उन पर "हमला" किया, जिससे उन्हें "उनके दाहिने हाथ की उंगली" पर "गंभीर" चोट लगी है.

अपनी शिकायत के विपरीत, कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि वह यह नहीं पहचान सके कि उनकी उंगली में चोट किसके द्वारा लगी. उन्होंने कहा कि ‘रणनीति’ के तहत लेफ्ट छात्र यूनियन ने महिला छात्रों को आगे तैनात कर दिया, ताकि एबीवीपी छात्रों को जाने से रोक जा सके.

"अगर हमने छात्राओं के बीच जाने की कोशिश की होती तो वह हमारे खिलाफ शारीरिक शोषण का केस दर्ज करवा देतीं.”

सोमवार को एबीवीपी कैंपस में मार्च निकाला गया जिसमें कथित रूप से घायल हुईं तीन छात्रों ने भी भाग लिया

सोमवार को एबीवीपी कैंपस में मार्च निकाला गया जिसमें कथित रूप से घायल हुईं तीन छात्रों ने भी भाग लिया

बाद में सोमवार को जेएनयूएसयू और वामपंथी छात्र दलों ने भी एबीवीपी और रविवार के कार्यक्रमों के खिलाफ विरोध मार्च निकाला.

साउथ-वेस्ट दिल्ली के डीसीपी गौरव शर्मा ने बताया, “हमें जेएनयू में हिंसा होने की जानकारी मिली थी. कल शाम एक संगोष्ठी आयोजित किए जाने पर वहां दो गुटों में भिड़ंत हुई थी. एबीवीपी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है, वहीं एक शिकायत लेफ्ट से जुड़े छात्र की भी आई है. दोनों गुटों के सदस्यों ने एक-दूसरे पर मारपीट का आरोप लगाया है. अभी तक जेएनयूएसयू की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है. हम मामले की जांच-पड़ताल कर रहे हैं.”

द टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा कि उन्हें शिकायतकर्ताओं से चार मेडिको लीगल सर्टिफिकेट मिले हैं, जिससे पता चलता है कि कोई भी घायल नहीं हुआ है.

Also Read :
पीयूडीआर और जेएनयू के प्रकाशनों की बुनियाद पर यूपी पुलिस ने सिद्दिकी कप्पन को सिमी से जोड़ा
जेएनयू हिंसा: नौ महीने बाद कहां पहुंची जांच
newslaundry logo

Pay to keep news free

Complaining about the media is easy and often justified. But hey, it’s the model that’s flawed.

You may also like