सिद्दीकी कप्पन केस: क्या कहता है एक साल से जेल में बंद कैब ड्राइवर आलम का परिवार

हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिवार से मिलने जा रहे पत्रकार सिद्दीकी कप्पन व अन्य लोगों के साथ यूपी पुलिस ने यूएपीए की संगीन धाराओं के तहत मोहम्मद आलम को भी गिरफ्तार कर लिया था.

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मेरे पति जेल में हैं, क्योंकि वह एक मुसलमान हैं

बुशरा कहती हैं, "क्या किसी के पास इस सवाल का जवाब है कि मेरे पति एक साल से जेल में क्यों हैं, नहीं, क्योंकि उन्होंने कोई गुनाह किया ही नहीं है, हां, मेरे पति के जेल में होने का एकमात्र कारण है कि वह मुसलमान हैं, अगर इस देश में मुसलमान होना गुनाह है, तो जो मुसलमान हैं उन सब पर यूएपीए लगाओ, फिर सारे मुसलमानों को जेल में भर दो, सब पर यूएपीए लगाओ."

"मेरी ज़िंदगी का मतलब ही बदल गया है, जिस इंसान का स्वभाव एक दम खुशमिजाज़ था, जिसने आज तक कोई क्राइम तक नहीं किया उसे यूएपीए जैसे संगीन आरोपों में कैद कर लिया जाना कैसा कानून और इंसाफ है? मेरी मां, अब्बू, सब इस ही फिक्र में रहते हैं, पूरा परिवार सदमे में है कि ये हमारे साथ क्यों हो रहा है?" उन्होंने कहा.

मोहम्मद आलम के वकील मधुवन ने 3 अप्रेल को दायर हुई चार्जशीट के संबंध में बात करते हुए कहा की चार्जशीट के जिस हिस्से में आलम पर लगाए गए आरोपों का हवाला है वे सब बेबुनियाद हैं. वह कहते हैं, "3 अप्रेल को इस मामले में जो चार्जशीट दायर की गयी उसके जिस हिस्से में आलम को लेकर चर्चा की गयी है वहां नज़र आ रहा हर आरोप निराधार है, आलम एक साल जेल में इसलिए है क्योंकि उसके ऊपर यूएपीए और देशद्रोह जैसी गंभीर धाराएं लगाई गयी हैं"

मधुवन दत्त आलम के पीएफआई और उसके छात्र संगठन सीएफएआई से उसके संबंध पर कहते हैं, "आलम पर पॉपुलर फ्रंट से संबध के मामले में चार्जशीट में कोई जिक्र नहीं है, आलम किसी एक्टिविटी में शामिल रहा हो या सोशल मीडिया के माध्यम से किसी अजेंडे को आगे बढ़ाया हो ऐसा भी कोई जिक्र नहीं है. पुलिस ने आलम पर लॉकडाउन के दौरान फंडिंग के जरिए गाड़ी खरीदे जाने का शक जाहिर किया है. पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, आलम सिर्फ देशद्रोह और यूएपीए जैसी धराओं के भारीपन के रहते जेल में है"

मधुवन दत्त आगे कहते हैं, "आलम की बेल एप्लिकेशन हाईकोर्ट में लंबित है और जल्द सुनवाई के बाद आलम रिहा हो जाएंगे ऐसी उम्मीद है. पुलिस कोर्ट में ये साबित करने में नाकाम होगी की आलम किसी षड्यंत्र या इन धाराओं के खांचे में फिट बैठते हैं."

वहीं बुशरा मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाती हैं. वह कहती हैं, "मीडिया ने कभी नहीं बताया की वे ड्राइवर हैं, उन्हें जब कोर्ट में लाया जाता है तो उनके हाथ किसी बड़े मुजरिम की तरह हथकड़ी से बंधे होते है. एक बेसकूर इंसान को आखिर इतने वक्त तक जेल में कैसे रखा जा सकता है? कोई तो हो जो उनकी बात करे और उन्हें बाहर लाने में हमारी मदद करे"

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