ग्रामीण भारत में 50 फीसदी से अधिक कृषि परिवारों पर कर्ज का भार

औसत बकाया ऋण के मामले में कुल 28 राज्यों में आंध्र प्रदेश पर सबसे अधिक औसत बकाया 2.45 लाख रुपये का ऋण था.

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ग्रामीण भारत में 50 फीसदी से अधिक कृषि परिवारों पर कर्ज का भार
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एनएसओ के 77वें सर्वेक्षण में कृषि वर्ष जुलाई 2018- जून 2019 के दो हिस्सों की प्रासंगिक जानकारी एकत्र करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपल हाउसहोल्ड के एक ही सेट से दो यात्राओं में जानकारी एकत्र की गई थी. पहली यात्रा जनवरी-अगस्त 2019 के दौरान और दूसरी सितंबर-दिसंबर 2019 के दौरान की गई.

सर्वेक्षण के लिए एक कृषि परिवार को कृषि गतिविधियों से उपज के मूल्य के रूप में 4000 रुपये से अधिक प्राप्त करने वाले परिवार के रूप में परिभाषित किया गया था (उदाहरण के लिए, खेत की फसलों की खेती, बागवानी फसलों, चारा फसलों, वृक्षारोपण, पशुपालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, सुअर पालन , मधुमक्खी पालन, वर्मीकल्चर, सेरीकल्चर, आदि) और पिछले 365 दिनों के दौरान कृषि में कम से कम एक सदस्य स्व-नियोजित या तो प्रमुख स्थिति में या सहायक स्थिति में रहा हो.

रिपोर्ट के मुताबिक कृषि परिवारों की औसत आय 2013 में 6,426 रुपये से बढ़कर 2019 में 10,218 रुपये हो गई. कुल औसत आय में सबसे अधिक हिस्सा 4,063 रुपये की मजदूरी से आय का था. सर्वेक्षण के अनुसार कृषि वर्ष जुलाई 2018- जून 2019 के दौरान अनुमानित कृषि परिवारों की संख्या 9.3 करोड़ (93.09 मिलियन) थी.

(साभार- डाउन टू अर्थ)

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