तालिबानी सरकार देश चलाने के लिए चीन पर निर्भर!

अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए व्यापक निवेश की आवश्यकता है. इसके लिए तालिबानी मुख्य रूप से चीन पर निर्भर है और चीन की मदद से वे देश का आर्थिक पुनर्निर्माण करेंगे.

WrittenBy:प्रकाश के रे
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14वीं सदी में मिंग राजवंश के दौर में समुद्र में चीन का एकछत्र साम्राज्य था, लेकिन अचानक उस राजवंश ने चीन को एक दीवार के दायरे में बंद कर दिया और फिर यूरोपीय पाइरेटों ने लहरों पर कब्जा कर लिया और दुनिया ने भोगा गुलामों का कारोबार और उपनिवेशवाद. चीन मिंग राजवंश की भूल को दोहराना नहीं चाहेगा और पिछले साल राष्ट्रपति शी जिनपिंग कह भी चुके हैं कि वे दुनिया से मुंह नहीं मोड़ेंगे.

इससे जुड़ी एक और बात अहम है. मिंग राजवंश ने समुद्र से और अन्य तरह से दुनिया से ज़रूर चीन को अलग कर लिया था, पर दुनिया ने चीन को अकेला नहीं छोड़ा और 19वीं व 20वीं सदी में लंबे समय तक हर ताकतवर देश- ब्रिटेन, अमेरिका, रूस, जापान, कोरिया आदि- ने चीन को रौंदा. चीनी इतिहास में वह दौर ‘अपमान की सदी’ के नाम से जाना जाता है. वह दौर बहुत हद तक अफगानिस्तान के बीते 50 साल की तरह था. उसी दौर में चीनी आबादी को अफीम का आदी बनाकर कंगाल और बदहाल कर दिया गया, जिससे उबरने के लिए चीन को 20वीं सदी के 60 के दशक तक इंतजार करना पड़ा.

चीन अफीम के कहर को दुनिया के किसी भी देश से अधिक जानता-समझता है, अमेरिका से भी अधिक, जहां हर साल 70 हज़ार लोग अफीम से बने मादक पदार्थों व दवाओं के अत्यधिक सेवन से मारे जाते हैं. अफीम ही नहीं, चीन हिंसा, युद्ध, अकाल, अशिक्षा, बीमारी आदि के उस अवसाद और पिछड़ेपन को भी 50-60 के दशक में देख चुका है, जिससे अफगानिस्तान आज गुजर रहा है. जैसा कि कुछ विश्लेषकों ने रेखांकित किया है, वे दिन मौजूदा चीनी नेताओं की अपनी यादों में हैं. वे चाहेंगे कि अफगान इस दुर्दशा से निकलें.

वे यह भी जानते हैं कि इससे निकलने की राह शिक्षा ही है. इसलिए, तालिबान की शिक्षा नीति को लेकर चाहे जो आशंकाएं हों, नयी सरकार को शिक्षा पर ध्यान देना ही होगा, अन्यथा कोई निवेश कारगर नहीं होगा. चीन को भी मिंग राजवंश के अनुभव के साथ सातवीं-आठवीं सदी के तांग राजवंश के अनुभव को भी याद करना होगा, जब आज के अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर उसका शासन था और चीन की समृद्धि में इस क्षेत्र के साथ इस क्षेत्र से गुजरने वाले सिल्क रूट का बड़ा योगदान था. लेकिन अब्बासी खिलाफत से जंग हारकर तांग राजवंश को ये इलाके छोड़ने पड़े और कुछ समय बाद मिंग राजवंश की तरह तांग राजवंश का भी खात्मा हो गया. साम्राज्यों की कब्रगाह में खेमा लगाते हुए थोड़ा सिहरना और सतर्क रहना बीजिंग के लिए भी अच्छा रहेगा. वैसे चीनी बहुत धैर्यवान होते हैं.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

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