बदइंतजामी, विवादित दावे और प्रचार, यही है रामदेव का कोविड केयर सेंटर

कोविड केयर सेंटर को लेकर उन्होंने कई ऐसी जानकरियां दीं, जिसे पढ़कर-सुनकर लोग यहां इलाज के लिए आ रहे हैं मगर इलाज नहीं मिल रहा है.

बदइंतजामी, विवादित दावे और प्रचार, यही है रामदेव का कोविड केयर सेंटर
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‘आईसीयू बेड तो है पर चलाने वाला कोई नहीं’

न्यूजलॉन्ड्री ने यहां के चीफ मेडिकल अधीक्षक (सीएमओ) एसके सोनी द्वारा मंडल अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सात मई को लिखा पत्र हासिल किया. इस पत्र में अस्पताल के लिए कई मांग की गई हैं.

पत्र में लिखा है, इस चिकित्सालय में आईसीयू टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं हैं. अतः आईसीयू वार्ड का संचालन बाधित है. इसीलिए आईसीयू में मरीजों को भर्ती करने में तब तक असमर्थ रहेंगे जब तक की समुचित विशेषज्ञ व ट्रेंड स्टाफ उपलब्ध न हो जाए.

न्यूज़लॉन्ड्री ने सोनी से अस्पताल के हालात को लेकर सवाल किया तो वे कहते हैं, ‘‘हमारे पास 50 ऑक्सीजन बेड और 10 आईसीयू बेड हैं, लेकिन यहां काम करने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है. एक मरीज को अगर आईसीयू बेड पर ले जाया जाता है तो 24 घंटे उसके पास एक तकनीशियन होना चाहिए. हमारे पास लोग नहीं हैं ऐसे में हम एकाध आईसीयू बेड को सिर्फ उतनी देर के लिए चलाते हैं जब तक मरीज को किसी और अस्पताल में शिफ्ट नहीं कर दिया जाता है. इसके अलावा अभी हम आईसीयू चला नहीं पा रहे हैं.’’

सात मई को सीएमएस सोनी ने आईसीयू चलाने के साथ-साथ दूसरे कामों के लिए तकनीशियन की मांग को लेकर पत्र लिखा था. 10 मई को न्यूजलॉन्ड्री ने सोनी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया, ‘‘अभी तक मेनपावर में कोई वृद्धि नहीं हुई है. जिस कारण आईसीयू और वेंटिलेटर चल नहीं रहे हैं.’’

यह अस्पताल सामान्य मरीजों के लिए बना था, लेकिन अचानक से इसे कोविड अस्पताल बना दिया गया. ऐसे में सीएमओ ने अपने पत्र में अलग वार्डस को छत कवर कराने की मांग की है ताकि संक्रमित एवं असंक्रमित क्षेत्र को अलग-अलग सुरक्षित किया जाए. पत्र में पीपीई किट पहनने के लिए अलग कमरा बनाने की मांग के साथ-साथ कुंभ मेला के दौरान यहां बने शौचालयों की सफाई करने के लिए सफाई कर्मी लगाने की मांग की है. साथ ही यह भी कहा गया है कि अस्पताल में 24 घंटे पानी उपलब्ध कराया जाए.

‘इलाज नहीं मिला तो हमने अपने मरीज को डिस्चार्ज करा लिया’

अस्पताल के गेट पर हम स्वामी देव से बात कर रहे होते हैं तभी वहां एक महिला पर हमारी नजर पड़ती है. जो परेशान होकर रो रही होती हैं. हरिद्वार की रहने वाली कविता गुप्ता अपने 32 वर्षीय बेटे सुनील गुप्ता को सुबह 9 बजे यहां भर्ती कराने के लिए लेकर आई थीं लेकिन इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी.

कोविड सेंटर के बाहर कविता गुप्ता.

कोविड सेंटर के बाहर कविता गुप्ता.

न्यूजलॉन्ड्री से बात करते हुए कविता बताती हैं, ‘‘मेरे बेटे को सुबह से कोई देखने तक नहीं गया है. बस उसे ऑक्सीजन लगा दिया है. ना कोई दवाई दी और ना किसी ने हालचाल लिया. उसको कोरोना है या नहीं ये मालूम नहीं चला. सिटी स्कैन कराने पर उसके फेंफड़ों पर इंफेक्शन दिखा तो हम यहां लेकर आए हैं.’’

कविता से जब हम बात कर रहे थे इसी बीच हरिद्वार के सीएमओ डॉक्टर एसके झा पहुंचे. कविता उनसे बेटे के इलाज की गुहार लगा रही थीं तो सीएमओ ने साफ शब्दों में कहा, ‘‘जो डॉक्टर इलाज कर रहे हैं उन पर भी भरोसा रखिए.’’ इतना कहकर वे अस्पताल के अंदर चले गए.

इलाज नहीं मिलने की स्थिति में देर रात को कविता अपने बेटे को यहां से डिस्चार्ज कर एक प्राइवेट अस्पताल लेकर चली गईं, जहां उनकी हालत अब स्थिर है.

कविता के साथ यहां पहुंचे सुनील के साले गौरव अग्रवाल ने न्यूजलॉन्ड्री को बताया, ‘‘हमारे मरीज को वहां कोई सर्विस नहीं मिल रही थी तो हमने उन्हें डिस्चार्ज कर रुड़की के क्वाड्रा अस्पताल ले गए. अब उनकी स्थिति थोड़ी ठीक है.’’

पतंजलि और सरकार द्वारा चलाए जा रहे कोविड केयर सेंटर अस्पताल में क्या हुआ इस सवाल के जवाब में गौरव बताते हैं, ‘‘उनकी हालत गंभीर होती जा रही थी, लेकिन डॉक्टर इलाज करने को राजी नहीं थे. सबसे बड़ी बात दवाई देने को कोई राजी नहीं था. वे ऑक्सीजन भी नहीं दे रहे थे. खाली सिलेंडर लगा रखा था. वहां ऑक्सीजन की कमी है. पूरे दिन में एक इंजेक्शन दिया गया था. हमने इस अस्पताल के बारे में देखा-सुना बहुत था जिसके कारण उसपर विश्वास था, लेकिन उस हिसाब से वहां काम नहीं हो पा रहा है.’’

गौरव के जीजा सुनील को इलाज कैसे मिलता क्योंकि यहां अभी पर्याप्त मात्रा में ना डॉक्टर उपलब्ध है और ना ही वार्ड बॉय. कुंभ मेला में छोटी-मोटी बीमारियों के लिए बने इस अस्थायी अस्पताल को आनन फानन में कोविड अस्पताल घोषित कर दिया गया. रामदेव ने अलग-अलग टेलीविजन चैनलों पर जाकर प्रचार करना शुरू कर दिया. जिसका नतीजा यह हुआ कि यहां मरीजों का आना जारी है, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है. सोनी बताते हैं, ‘‘यहां अब तक (सात मई) पांच से छह मरीजों की मौत हुई है.’’

जिन डॉक्टरों की ड्यूटी यहां पर लगाई गई हैं, इसकी जानकारी अस्पताल के गेट पर लगे एक कागज पर दी गई है. इसके मुताबिक यहां डॉक्टर की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगी है जहां इमरजेंसी वार्ड में सिर्फ एक डॉक्टर है. यहां कोरोना को लेकर अलग-अलग वार्ड बने हुए हैं. जिसमें एक से दो ही डॉक्टर उपलब्ध हैं. यानी अभी जितने मरीज यहां भर्ती हैं उस हिसाब से 25 मरीजों को देखने के लिए सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध है. ऐसे में सुनील या नरेंद्र की मां को इलाज कैसे मिल जाता.

इस पूरे मामले में न्यूजलॉन्ड्री ने हरिद्वार के सीएमओ एसके झा से सवाल किया तो उन्होंने व्यस्त बताकर सवालों का जवाब नहीं दिया. हालांकि उनके दफ्तर में आधे घंटे बैठकर उनसे बात करने के इंतज़ार के दौरान हमने पाया कि वे जिले में मेन पावर कम होने को लेकर परेशान होते नजर आए. वे नहीं चाह रहे थे कि कुंभ के दौरान जो डॉक्टर उत्तर प्रदेश से यहां आए थे वे अभी वापस जाएं.

हमने पतंजलि के पीआरओ एसके तिजारावाला से बात की. उन्होंने हमें सवाल भेजने के लिए कहा. हमने उन्हें सवाल भेज दिए लेकिन हमें उनका अभी तक कोई जवाब नहीं आया. अगर जवाब आता है तो उन्हें इस खबर में जोड़ दिया जाएगा.

भले ही इस अस्पताल में लोगों को इलाज ना मिल रहा हो, लेकिन इस अस्थायी अस्पताल के बाहर एक बड़ा सा पोस्टर लगा है. जिस पर एक तरफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत की और दूसरी तरफ आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव की तस्वीर है.

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