कट मनी और तोलाबाजी: तृणमूल के खिलाफ लोगों में कितना गुस्सा है?

एक समय पर यह राजनैतिक एजेंटों द्वारा कोई काम करने के लिए 'सदस्यता शुल्क' के रूप में वसूला जाता था. आज यह व्यापक है और बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा है.

WrittenBy:मेघनाद एस
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मई 2020 में अम्फन चक्रवात ने बंगाल में भरी तबाही मचाई थी, जिसके बाद कट मनी को लेकर सरकार का भारी विरोध हुआ था. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि तृणमूल ने आपदा राहत पैकेज का एक हिस्सा हड़प लिया जो चक्रवात प्रभावित लोगों के लिए था, यहां तक कि लॉकडाउन के समय बांटे जाने वाले राशन से भी उन्होंने अपना हिस्सा लिया. तृणमूल कार्यकर्ताओं के विरुद्ध लोगों से ऐसी 2,100 शिकायतें आने के बाद बंगाल सरकार ने इसकी जांच के लिए एक समिति बनाई और उसे पारदर्शिता के बड़े उदहारण के रूप में प्रस्तुत किया.

जब हमने दिलीप से पूछा कि क्या उनसे लिया गया पैसा वापस आया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा नहीं. "वह कैसे वापस करेंगे? जिस महिला ने पैसे लिए उसने बड़ा दोमंजिला मकान बना लिया है. सालों तक उसने जिन लोगों से पैसे लिए हैं उन सबको वापस देने के लिए उसे अपना घर बेचना पड़ेगा."

इस बारे में और पता करने के लिए हम कोलकाता के चेतला गए. हमने इस इलाके का चुनाव शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर मिले बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं की सूची से जुड़े एक दस्तावेज़ के आधार पर किया.

सूची से जुड़ा एक दस्तावेज़

हम यह पता करना चाहते थे की क्या परियोजना पूरी हो चुकी है और क्या उसके क्रियान्वन में कट मनी या जबरन वसूली की घटनाएं शामिल थीं. क्योंकि वह निर्माण कार्य और सरकारी वित्तपोषण का सबसे बढ़िया संगम था.

हम उस हाउसिंग यूनिट पर पहुंचे जहां एक बोर्ड लगा था जिसके अनुसार कोलकाता के महापौर फिरहाद हाकिम ने उसका उद्घाटन किया था. बिल्डिंग का नाम था 'बांग्ला'र बारी', यानी 'बंगाल का घर'.

कोलकाता के महापौर फिरहाद हाकिम द्वारा किया गया उद्घाटन
बांग्ला'र बारी', यानी 'बंगाल का घर' कोलकाता के चेतला क्षेत्र में आवास परिसर

हमने वहां के निवासियों से बात की और उन्होंने बताया कि वह बिल्डिंग राज्य सरकार ने बनाई है. हमने पूछा कि क्या वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी है तो उन्होंने कहा नहीं.

"बॉबी दा ने सुनिश्चित किया कि हमें घर मिले. इस से पहले इस पूरे इलाके में झुग्गियां थीं, लेकिन उन्हें तोड़कर एक साल में यह काम्प्लेक्स तैयार किया गया," एक निवासी मिठू मित्रा ने बताया. उन्हें भी वहां घर मिला है.

फिरहाद को नगर के लोग प्रेम से बॉबी बुलाते हैं.

हमने मिठू से पूछा कि क्या उनसे किसी तरह की वसूली की गयी. "हमसे एक पैसा भी नहीं लिया गया," उन्होंने बताया. "जब यह घर बन रहा था तो उन्होंने सुनिश्चित किया कि हमें सभी तरह की सुविधाएं मिलें. इसके लिए भी कोई पैसा नहीं लिया गया."

'बांग्ला'र बारी' के निवासी

फिरहाद ने 'बांग्ला'र बारी' की घोषणा 2017 में राज्य के शहरी विकास मंत्री रहते हुए की थी. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 'बांग्ला'र बारी' में एक फ्लैट के लिए परिवारों को 50,000 रुपए देने पड़े. लेकिन हमने जिनसे बात की उन्होंने बताया कि उन्हें घर मुफ्त में मिले हैं.

कुछ मीटर दूर हम सुलेखा मैती से मिले जो एक गृहणी हैं. उन्होंने बताया कि उस इलाके में जबरन वसूली की कोई घटना नहीं हुई है. "हम दादा और दीदी के बीच में रहते हैं. यहां कोई वसूली करने की हिम्मत नहीं कर सकता. हम बहुत सुरक्षित महसूस करते हैं," उन्होंने कहा.

उन्होंने बताया कि उनकी बहन वंदना मैती का विवाह 2019 में हुआ था और फिरहाद के लोगों ने उन्हें रूपश्री योजना के 25,000 रुपए दिलवाने में मदद की. "हमें पैसे शादी के 3-4 दिन बाद ही मिल गए. उन्होंने हमें योजना के बारे में सब बताया और कागजी कार्रवाई भी की. सब कुछ बहुत सरल था," सुलेखा ने कहा.

जब हमने दिलीप के अनुभव के बारे में बताया तो एक अन्य गृहणी मिली कांजी ने कहा कि और जगहों पर ऐसा हो सकता है, लेकिन यहां नहीं. "मैंने अपने गृहनगर आम्ताला में ऐसी घटनाओं के बारे में सुना है," उन्होंने कहा. "सीपीएम के समय से ही सभी दलों के लोग पैसे लेते हैं वहां. लेकिन कोलकाता की स्थिति भिन्न है."

उनका संकेत लेकर हम कट मनी के बारे में अपनी जांच जारी रखेंगे. इस हफ्ते हम ग्रामीण बंगाल का रुख करेंगे जिससे शायद तस्वीर और साफ़ हो जाएगी. हम वहां की स्थिति जानेंगे और यह भी पता लगाएंगे कि क्या भाजपा का ममता सरकार के विरुद्ध यह प्रचार इस चुनाव में काम आएगा.

पर एक बात साफ़ है कि लोग विशेष रूप से कट मनी और आम तौर पर सरकार के बारे में बात करने से झिझक रहे हैं. जब हमने सड़कों पर लोगों से सरकार के बारे में उनकी राय पूछी तो उन्होंने अधिकृत तौर पर कुछ भी कहने से मना कर दिया.

लेकिन बिना कैमरे के ऑफ द रिकॉर्ड बात करने पर वह सरकार और तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध बोले. हम देखते हैं कि क्या यही हाल ग्रामीण बंगाल में भी होगा.

सुरक्षा कारणों से पहचान छुपाने के लिए कुछ नाम बदल दिए गए हैं.

बंगाल में भ्रष्टाचार और उस पर मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर यह हमारी श्रृंखला की पहली कड़ी है.

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

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