मोदी सरकार के आने बाद से नहीं हुआ किसानों की आमदनी का सर्वे

आखिरी बार साल 2013 में एनएसओ ने किसानों की आमदनी पर रिपोर्ट जारी की थी.

मोदी सरकार के आने बाद से नहीं हुआ किसानों की आमदनी का सर्वे
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क्या किसानों की आमदनी दोगुनी होगी?

एक तरफ जहां अशोक दलवाई का कहना है कि साल 2022-23 तक किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी. कमेटी के सुझाव में लगातार काम हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ आंकड़ें, किसानों की आत्महत्या, किसानों का आंदोलन और विशेषज्ञ इसको लेकर संशय की स्थिति में हैं.

न्यूजलॉन्ड्री समय-समय पर सरकार द्वारा किसानों की आमदनी दोगुनी करने को लेकर साल 2022 तक के दावे को लेकर रिपोर्ट करते रहा है. किसानों और विशेषज्ञों की माने तो सरकार भले दावे कर ले लेकिन किसानों की आमदनी बढ़ने के बजाय घटी ही है. आईसीएआर के पूर्व महानिदेशक डॉक्टर मंगल राय की माने तो कृषि में करीब 14-15 प्रतिशत कम्पाउंड ग्रोथ होता तब जाकर आमदनी दोगुनी होती, लेकिन आपकी ग्रोथ रेट तीन से साढ़े तीन प्रतिशत पर अटकी हुई है तो कैसे डबल हो जाएगा.’’

किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्रों को अपने कार्यक्षेत्र के दो गांवों को गोद लेकर वहां के किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए कहा. मार्च 2020 में स्थायी समिति द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक तीस राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 651 कृषि विज्ञान केंद्रों ने 1,416 गांवों को गोद लिया है. इन गोद लिए गांवों को नाम दिया गया ‘डबलिंग फार्मर्स इनकम विलेज’. सरकार का मकसद था कि इन गांवों के किसानों की आय दोगुनी कर यहां इसके लिए किए गए कामों को दूसरे गांवों में लागू करना हालांकि इन गांवों के किसानों की आमदनी बढ़ाने का टारगेट भी 2022 ही रखा गया. ऐसे में सवाल यह है कि जब खुद इन गांवों के किसानों की आमदनी 2022 तक होगी तो इसका उदाहरण दूसरे गांवों में कैसे लागू किया जाएगा.

न्यूजलॉन्ड्री ने बीते महीने ऐसे ही दो गांवों की पड़ताल की और जो सामने आया वो हैरान करने वाला था. हरियाणा के गुरुग्राम के इन गोद लिए गांवों के ज्यादातर किसानों को इसकी जानकारी ही नहीं है. यहां के किसानों की माने तो आमदनी बढ़ने के बजाय लगातार कम हो रही है. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें हरियाणा: किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए गोद लिए दो गांवों की कहानी

यहीं नहीं मोदी सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किए गए बाबूलाल दाहिया ने साल 2019 में न्यूजलॉन्ड्री को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि साल 2022 तक किसानों की आमदनी किसी भी हाल में दोगुनी नहीं हो पाएगी.

सरदार वीएम सिंह उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का उदाहरण देते हुए कहते हैं, ‘‘सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कर रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बीते तीन सालों से गन्ने की कीमतों में कोई इजाफा नहीं हुआ. पिछले चार सालों में डीजल का रेट 25 प्रतिशत बढ़ गया है, खाद का रेट बढ़ गया और उसका वजन कम कर दिया गया. बिजली के दरों में वृद्धि हुई है. जब योगी सरकार आई थी तब पहले साल इन्होंने 10 रुपए प्रति कुंतल बढ़ाए थे उसके बाद से एक पैसा नहीं बढ़ाया है. इस स्थिति में किसान कर्जा लेकर ही काम करेगा न. तो मैं इसलिए बार-बार कह रहा हूं कि किसानों की आमदनी नहीं उसपर कर्ज डबल हुआ है.’’

सरदार वीएम सिंह आगे बताते हैं, ‘‘किसानों की आमदनी कम होने के बजाय उसपर कर्ज बढ़ रहा है. जब सरकार ने किसानों को ऋण देने की शुरुआत की थी तो बजट में इसके लिए 5 लाख करोड़ रखा गया था अब यह बढ़कर 13 लाख करोड़ हो गया है. जब मोदी सरकार आई थी तब यह बजट मेरे ख्याल से 8.5 लाख करोड़ था. तो आप लोगों को ऋण बढ़ाकर दोगे तो किसान वो वापस कर नहीं पाएंगे. तो ऋण बढ़ेगा या आमदनी बढ़ेगी. आज तो किसानों की हालत खराब है. यह पूछना की आमदनी दोगुनी कब होगी यह तो मज़ाक है. यह तो जुमलों की बात है.’’

सरकारी दावे के मुताबिक साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी लेकिन जानकर इसको लेकर संशय की स्थिति में हैं. बीते पांच साल में किसानों की आय में क्या तब्दीली आई इसको लेकर अभी तक कोई सर्वे सामने नहीं आया है.

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