वकील दुष्यंत दवे: क्या केरल सरकार यूपी से सिद्दीकी कप्पन के स्‍थानांतरण की मांग कर सकती है?

"मुख्तार अंसारी को यूपी स्थानांतरित कर दिया गया, तो उनके जीवन को खतरा हो सकता है, इसलिए उन्हें दिल्ली भेजा जाए."

वकील दुष्यंत दवे: क्या केरल सरकार यूपी से सिद्दीकी कप्पन के स्‍थानांतरण की मांग कर सकती है?
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मुख्तार अंसारी मामले में पंजाब राज्य और जेल अधीक्षक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई में दलील दी है. दायर याचिका में पंजाब की रोपड़ जेल से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील दुष्यंत दवे ने मुख्तार अंसारी के स्‍थानांतरण मुद्दे पर यह तर्क दिया कि क्या इसी तरह से केरल सरकार उत्तर प्रदेश सरकार से सिद्दीकी कप्पन के स्‍थानांतरण की मांग कर सकती है.

मुख्तार अंसारी मामले में दुष्यंत दवे ने कहा, "क्या केरल सरकार यूपी से सिद्दीकी कप्पन के स्‍थानांतरण की मांग कर सकती है, एक राज्य दूसरे राज्य के खिलाफ अनुच्छेद 32 का आह्वान नहीं कर सकता है"

लाइल लॉ की खबर के मुताबकि मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश कीं. जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए. यह मामला गुरुवार को भी जारी रहेगा.

बहस के दौरान रोहतगी ने तबादले के लिए आवेदन किया था. इस पर कोर्ट ने कहा स्थानांतरण आवश्यक नहीं है, अंसारी वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग कर सकते हैं. उन्होंने खंडपीठ से अनुरोध किया कि यूपी स्थानांतरित कर दिया गया, तो उनके जीवन को खतरा हो सकता है, इसलिए उन्हें दिल्ली भेजा जाए.

गौरतलब है कि हाथरस मामले की रिपोर्टिंग के लिए जा रहे केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य को मथुरा पुलिस ने पांच अक्तूबर को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया था, जब वे दलित लड़की के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए हाथरस जिले में स्थित उसके गांव जा रहे थे.

बता दें कि हाथरस में एक दलित लड़की से सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी और बाद में उसकी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद इस मामले ने दुनिया भर में तूल पकड़ लिया था. तब पत्रकार कम्पन की गिरफ्तारी की काफी कड़ी आलोचना हुई थी.

खबर शाम 8:03 बजे अपडेट की गई है.

Also Read : राज्य सरकारें नए सोशल मीडिया कानून के तहत नोटिस जारी नहीं कर सकती हैं- केंद्र सरकार
Also Read : डिजीपब: डिजिटल मीडिया की नियमावली स्वतंत्र मीडिया के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ

मुख्तार अंसारी मामले में पंजाब राज्य और जेल अधीक्षक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई में दलील दी है. दायर याचिका में पंजाब की रोपड़ जेल से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जेल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील दुष्यंत दवे ने मुख्तार अंसारी के स्‍थानांतरण मुद्दे पर यह तर्क दिया कि क्या इसी तरह से केरल सरकार उत्तर प्रदेश सरकार से सिद्दीकी कप्पन के स्‍थानांतरण की मांग कर सकती है.

मुख्तार अंसारी मामले में दुष्यंत दवे ने कहा, "क्या केरल सरकार यूपी से सिद्दीकी कप्पन के स्‍थानांतरण की मांग कर सकती है, एक राज्य दूसरे राज्य के खिलाफ अनुच्छेद 32 का आह्वान नहीं कर सकता है"

लाइल लॉ की खबर के मुताबकि मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश कीं. जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश हुए. यह मामला गुरुवार को भी जारी रहेगा.

बहस के दौरान रोहतगी ने तबादले के लिए आवेदन किया था. इस पर कोर्ट ने कहा स्थानांतरण आवश्यक नहीं है, अंसारी वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग कर सकते हैं. उन्होंने खंडपीठ से अनुरोध किया कि यूपी स्थानांतरित कर दिया गया, तो उनके जीवन को खतरा हो सकता है, इसलिए उन्हें दिल्ली भेजा जाए.

गौरतलब है कि हाथरस मामले की रिपोर्टिंग के लिए जा रहे केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन और तीन अन्य को मथुरा पुलिस ने पांच अक्तूबर को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया था, जब वे दलित लड़की के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए हाथरस जिले में स्थित उसके गांव जा रहे थे.

बता दें कि हाथरस में एक दलित लड़की से सामूहिक बलात्कार की घटना हुई थी और बाद में उसकी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद इस मामले ने दुनिया भर में तूल पकड़ लिया था. तब पत्रकार कम्पन की गिरफ्तारी की काफी कड़ी आलोचना हुई थी.

खबर शाम 8:03 बजे अपडेट की गई है.

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