उत्तर प्रदेश: आखिर जब लड़की-लड़का पक्ष राजी थे तो क्यों रुकवाई गई शादी?

लड़का और लड़की दोनों पक्षों की रजामंदी के बावजूद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा इलाके में अंतर्धार्मिक शादी को हिंदूवादी संगठनों के दबाव में पुलिस ने रुकवा दिया था. प्रदेश में धर्मांतरण कानून आने के बाद यह शादी रुकवाने का पहला मामला था. आखिर ऐसा क्यों हुआ? अब किस हाल में है परिवार?

WrittenBy:बसंत कुमार
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‘नजीर नहीं बनना चाहिए’

न्यूज़लॉन्ड्री ने जब हिन्दू महासभा के लखनऊ जिला अध्यक्ष बृजेश कुमार शुक्ला से इस मामले में बात की तो उन्होंने बताया, ‘‘स्थानीय लोगों ने हमारे महनगर अध्यक्ष से संपर्क किया था. वहां के लोगों में इसको लेकर नाराजगी थी. वे इस तरह का नजीर नहीं बनने देना चाहते थे.’’

शुक्ला अपनी बातों में नजीर शब्द का कई बार इस्तेमाल करते हैं. वे कहते हैं, ‘‘जब हमारे संज्ञान में यह मामला आया तो हमने पारा थानाध्यक्ष को पत्र लिखा. पहले थानाध्यक्ष ने कहा कि जब लड़का-लड़की राजी है तो क्या करना. फिर हमें बताया गया कि लड़की का जो पिता है वो सौतेला है. वो नशे का भी आदी है. उन्हें नए कानून के बारे में बताया गया. फिर थानाध्यक्ष को लगा कि कहीं ना कहीं आगे चलकर इसपर विवाद होगा. कई मुस्लिम संगठनों ने भी इस शादी का विरोध किया था. ’’

लड़के या लड़की के परिवार से कोई आपके पास आया था. इस सवाल के जवाब में शुक्ला कहते हैं, ‘‘वे क्यों आएंगे. आसपास के लोग आए थे. वे इस मामले को नजीर नहीं बनने देना चाहते थे. वे जंगल में तो रहते नहीं है. समाज में रहते हैं. वहां के हिन्दू बच्चों में यह बात जाती की ऐसे शादी कर रहे हैं. कोई रोक नहीं रहा है. हम इसे नजीर नहीं बनने देना चाहते थे.’’

क्या यह लव जिहाद का मामला था. इस सवाल पर शुक्ला कहते हैं, ‘‘लोग तो ऐसा ही कह रहे हैं. जिस तरह से यह शादी हो रही थी समान्यत: ऐसा होता नहीं है. आज तक लव जिहाद को किसी ने साबित नहीं किया लेकिन लव जिहाद तो होता है. हमारी कोशिश है कि जो भी हो कानून सम्मत हो. हमारे सनातन धर्म पर भी असर न हो. अधिकारी से इजाज़त लेकर वो शादी करें हमें कोई दिक्क्त नहीं होगी.’’

राष्ट्रीय युवा वाहिनी और हिंदू महासभा दोनों का मकसद इसे नजीर यानी उदाहरण नहीं बनने देना था.

दैनिक जागरण समेत कई अख़बारों ने इसमें धर्मांतरण होने की बात लिखी थी. जब हमने इसको लेकर विजय से सवाल किए तो इससे इंकार करते नजर आए. वहीं आस पास के नौजवान लड़कों ने भी बताया कि दोनों अपना-अपना मजहब जीने की बात करते हैं. इस पूरे विवाद पर शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग करने वाले फ्रीलांस पत्रकार असद रिजवी की लड़के के परिवार और लड़की की मां से बात हुई थी. वे बताते हैं उन्हें किसी ने धर्मांतरण कराने की बात नहीं बताई थी. लड़का और उसका परिवार भी नहीं चाहता था कि लड़की मुस्लिम बने और लड़की का परिवार भी नहीं चाहता था कि वो लड़का हिन्दू बने. दोनों अपना-अपना मजहब जीने की बात कर रहे थे. ये लोग शादी, समाज की मान्यता को मानने के लिए कर रहे थे.’’

केडी शर्मा इसको लेकर कहते हैं कि ऐसे कैसे मुमकिन है कि दो धर्म के लोग शादी करें और अलग-अलग धर्म माने. उनके बच्चे खान लिखेंगे या गुप्ता? गुप्ता तो नहीं ही लिखेंगे क्योंकि पिता से घर चलता है. देखिए ऐसा हो नहीं सकता. आज न कल लड़की का धर्मांतरण होता ही. इससे वह बच नहीं सकती थी.

इस पूरे विवाद में सबको कल की चिंता है. किसी को डर है कि हिंदू लड़कियों के लिए यह मामला उदाहरण बन जाएगा तो किसी को इनके होने वाले बच्चों की फ़िक्र नजर आती है.

लड़के के परिवार ने साधी चुप्पी

जब मामला सामने आया उस वक़्त लड़के का परिवार मीडिया से अपनी बात कह रहा था लेकिन अब परिवार ने चुप्पी साध रखी है. न्यूज़लॉन्ड्री ने लड़के और उसके परिवार से बात करने की कोशिश की लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य से हमारी मुलाकात नहीं हो पाई. घर पर महिलाएं मिलीं जो कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर देती हैं.

घटना के वक़्त मीडिया से बात करते हुए लड़के के भाई आशिफ शेख ने कहा था, ‘‘दोनों परिवार शादी के लिए तैयार हैं लेकिन नए कानून के सभी प्रावधानों की जानकारी नहीं थी इसलिए बिना नोटिस दिए शादी कर रहे थे. अब हम डीएम की इजाज़त के लिए अप्लाई करेंगे और फिर शादी होगी.’’

जिलाधिकारी से अनुमति मिलने के बाद शायद यह शादी हो जाए क्योंकि जिन लोगों ने ऐतराज किया उनकी भी मांग यही थी कि शादी के लिए इजाज़त नहीं ली गई. पत्रकार असद रिज़वी भी ऐसा ही मानते हैं. रिज़वी की माने तो जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ये संगठन शायद ही परेशान करेंगे क्योंकि पारा इलाके में इनकी कोई खास पकड़ नहीं है.

लड़की के पिता विजय ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि शादी के लिए उन्होंने जिलाधिकारी को आवेदन दे दिया है. जिलाधिकारी से अनुमति मिलने पर हम शादी करेंगे.

अब दोनों परिवारों को जिलाधिकारी से अनुमति मिलने का इंतज़ार है. क्या वे अब भी धूमधाम से शादी का आयोजन करेंगे, इस सवाल पर अभी कोई जवाब देने को तैयार नहीं है.

***

'लव जिहाद': मिथ वर्सेस रियलिटी एनएल सेना प्रोजेक्ट की यह तीसरी स्टोरी है. पहला और दूसरा पार्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें.

इस एनएल सेना प्रोजेक्ट में हमारे 138 पाठकों ने सहयोग किया है. यह मंयक गर्ग, राहुल कोहली और अन्य एनएल सेना के सदस्यों द्वारा संभव बनाया गया है. आप हमारे अगले एनएल लीगल फंड में सहयोग दे और गर्व से कहें मेरे ख़र्च पर आजाद हैं ख़बरें.

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‘नजीर नहीं बनना चाहिए’

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शुक्ला अपनी बातों में नजीर शब्द का कई बार इस्तेमाल करते हैं. वे कहते हैं, ‘‘जब हमारे संज्ञान में यह मामला आया तो हमने पारा थानाध्यक्ष को पत्र लिखा. पहले थानाध्यक्ष ने कहा कि जब लड़का-लड़की राजी है तो क्या करना. फिर हमें बताया गया कि लड़की का जो पिता है वो सौतेला है. वो नशे का भी आदी है. उन्हें नए कानून के बारे में बताया गया. फिर थानाध्यक्ष को लगा कि कहीं ना कहीं आगे चलकर इसपर विवाद होगा. कई मुस्लिम संगठनों ने भी इस शादी का विरोध किया था. ’’

लड़के या लड़की के परिवार से कोई आपके पास आया था. इस सवाल के जवाब में शुक्ला कहते हैं, ‘‘वे क्यों आएंगे. आसपास के लोग आए थे. वे इस मामले को नजीर नहीं बनने देना चाहते थे. वे जंगल में तो रहते नहीं है. समाज में रहते हैं. वहां के हिन्दू बच्चों में यह बात जाती की ऐसे शादी कर रहे हैं. कोई रोक नहीं रहा है. हम इसे नजीर नहीं बनने देना चाहते थे.’’

क्या यह लव जिहाद का मामला था. इस सवाल पर शुक्ला कहते हैं, ‘‘लोग तो ऐसा ही कह रहे हैं. जिस तरह से यह शादी हो रही थी समान्यत: ऐसा होता नहीं है. आज तक लव जिहाद को किसी ने साबित नहीं किया लेकिन लव जिहाद तो होता है. हमारी कोशिश है कि जो भी हो कानून सम्मत हो. हमारे सनातन धर्म पर भी असर न हो. अधिकारी से इजाज़त लेकर वो शादी करें हमें कोई दिक्क्त नहीं होगी.’’

राष्ट्रीय युवा वाहिनी और हिंदू महासभा दोनों का मकसद इसे नजीर यानी उदाहरण नहीं बनने देना था.

दैनिक जागरण समेत कई अख़बारों ने इसमें धर्मांतरण होने की बात लिखी थी. जब हमने इसको लेकर विजय से सवाल किए तो इससे इंकार करते नजर आए. वहीं आस पास के नौजवान लड़कों ने भी बताया कि दोनों अपना-अपना मजहब जीने की बात करते हैं. इस पूरे विवाद पर शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग करने वाले फ्रीलांस पत्रकार असद रिजवी की लड़के के परिवार और लड़की की मां से बात हुई थी. वे बताते हैं उन्हें किसी ने धर्मांतरण कराने की बात नहीं बताई थी. लड़का और उसका परिवार भी नहीं चाहता था कि लड़की मुस्लिम बने और लड़की का परिवार भी नहीं चाहता था कि वो लड़का हिन्दू बने. दोनों अपना-अपना मजहब जीने की बात कर रहे थे. ये लोग शादी, समाज की मान्यता को मानने के लिए कर रहे थे.’’

केडी शर्मा इसको लेकर कहते हैं कि ऐसे कैसे मुमकिन है कि दो धर्म के लोग शादी करें और अलग-अलग धर्म माने. उनके बच्चे खान लिखेंगे या गुप्ता? गुप्ता तो नहीं ही लिखेंगे क्योंकि पिता से घर चलता है. देखिए ऐसा हो नहीं सकता. आज न कल लड़की का धर्मांतरण होता ही. इससे वह बच नहीं सकती थी.

इस पूरे विवाद में सबको कल की चिंता है. किसी को डर है कि हिंदू लड़कियों के लिए यह मामला उदाहरण बन जाएगा तो किसी को इनके होने वाले बच्चों की फ़िक्र नजर आती है.

लड़के के परिवार ने साधी चुप्पी

जब मामला सामने आया उस वक़्त लड़के का परिवार मीडिया से अपनी बात कह रहा था लेकिन अब परिवार ने चुप्पी साध रखी है. न्यूज़लॉन्ड्री ने लड़के और उसके परिवार से बात करने की कोशिश की लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य से हमारी मुलाकात नहीं हो पाई. घर पर महिलाएं मिलीं जो कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर देती हैं.

घटना के वक़्त मीडिया से बात करते हुए लड़के के भाई आशिफ शेख ने कहा था, ‘‘दोनों परिवार शादी के लिए तैयार हैं लेकिन नए कानून के सभी प्रावधानों की जानकारी नहीं थी इसलिए बिना नोटिस दिए शादी कर रहे थे. अब हम डीएम की इजाज़त के लिए अप्लाई करेंगे और फिर शादी होगी.’’

जिलाधिकारी से अनुमति मिलने के बाद शायद यह शादी हो जाए क्योंकि जिन लोगों ने ऐतराज किया उनकी भी मांग यही थी कि शादी के लिए इजाज़त नहीं ली गई. पत्रकार असद रिज़वी भी ऐसा ही मानते हैं. रिज़वी की माने तो जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ये संगठन शायद ही परेशान करेंगे क्योंकि पारा इलाके में इनकी कोई खास पकड़ नहीं है.

लड़की के पिता विजय ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि शादी के लिए उन्होंने जिलाधिकारी को आवेदन दे दिया है. जिलाधिकारी से अनुमति मिलने पर हम शादी करेंगे.

अब दोनों परिवारों को जिलाधिकारी से अनुमति मिलने का इंतज़ार है. क्या वे अब भी धूमधाम से शादी का आयोजन करेंगे, इस सवाल पर अभी कोई जवाब देने को तैयार नहीं है.

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