ग्राउंड रिपोर्ट: चांदनी चौक में मंदिर पर हमले से पहले और उसके बाद क्या हुआ?

पार्किंग का फ़साद, मंदिर पर पथराव और बाहरी लोगों की आमदरफ्त ने बनाया चांदनी चौक को सांप्रदायिकता की भट्टी.

WrittenBy:बसंत कुमार
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अपने थोक बाजारों के लिए मशहूर चांदनी चौक का चावड़ी बाज़ार इलाका अक्सर देर रात तक ट्रॉली, ई-रिक्शा, मजदूरों और व्यापारियों की चहल-पहल से गुलजार रहता है, लेकिन रविवार की रात से यहां का नज़ारा बदला हुआ है. फिलहाल यहां की सड़कें दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों से भरी पड़ी हैं. सोमवार की शाम तक यहां रह-रहकर नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु-अकबर और जय श्रीराम के नारे सुनाई देते रहे. जहां ठेले-रिक्शे की आपाधापी मची रहती थी, वहां पुलिस के सायरन बज रहे हैं.

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रविवार की देर रात चावड़ी बाज़ार के लाल कुआं इलाके में हुई एक छोटी सी घटना ने मज़हबी रूप ले लिया है. रविवार की रात 11:30 के करीब 22 वर्षीय आस मोहम्मद और 45 वर्षीय संजीव कुमार के बीच मोटरसाइकिल खड़ी करने को लेकर कहासुनी हो गयी, और मारपीट में बदल गयी.  मारपीट की घटना देखते-देखते दो मज़हबों की लड़ाई बन गयी. जब हम घटनास्थल पर पहुंचे उस समय भी वहां कुछ टूटी-फूटी ईंटे पड़ी हुई थीं, मंदिर के शीशे टूटे हुए थे, परदे जले हुए थे, हालांकि मूर्तियां सुरक्षित थीं.

क्या हुआ था रविवार की रात 

जामा मस्जिद से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित लाल कुआं मुस्लिम बहुल इलाका है. यहां हिंदुओं के सिर्फ 30-40 परिवार रहते हैं. 80 वर्षीय बुजुर्ग इरशाद अहमद बताते हैं, “भले ही यहां हिन्दू कम हों, लेकिन हमारे बीच भाईचारा रहता है. रविवार की घटना इतनी बड़ी नहीं थी कि उसे धार्मिक रंग दिया जाये.”

यहां हमें जितने भी प्रत्यक्षदर्शी मिले, ज़्यादातर की राय उनके धर्म के दबाव से प्रभावित दिखी.

स्थानीय निवासी सिद्दीकी बताते हैं, ”आस मोहम्मद रात को कहीं से लौटा था. वह अपनी मोटरसाइकिल संजीव गुप्ता के घर के सामने खड़ी करने लगा. घर के सामने मोटरसाइकिल लगाने पर संजीव गुप्ता ने विरोध किया. आस मोहम्मद ने कहा कि वह थोड़ी देर में हटा लेगा, लेकिन संजीव गुप्ता और उसके कुछ साथी नहीं माने. उन्होंने आस मोहम्मद से मारपीट शुरू कर दी. उसे काफी चोटे आयी हैं. यह देखकर वहां दूसरे समाज (मुस्लिम) के लोग भी इकट्ठा होने लगे. हम आस मोहम्मद को लेकर थाने गये और मामला दर्ज़ कर वापस लौटने लगे. पुलिस के कुछ जवान भी हमारे साथ थे. अचानक से ऊपर (उनका इशारा हिंदुओं के घरों की तरफ था) से पथराव शुरू हो गया. इसके बाद हालात हमारे हाथ से निकल गयेे. हमारे साथ मौजूद कुछ लड़कों ने पलट कर ईंट-पत्थर मारना शुरू कर दिया. इसी दौरान कुछ लड़के मंदिर वाली गली में घुस गये और मंदिर में भी तोड़फोड़ की.”

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सिद्दीकी आगे कहते हैं, “किसी भी मज़हब की इबादतगाह को नुकसान पहुंचाना जायज़ नहीं है. हम इसके लिए दुखी हैं और वहां खड़े होकर मंदिर के निर्माण में भूमिका निभाने को तैयार हैं. लेकिन मारपीट की शुरुआत उधर से हुई थी.”

मंदिर पर क्यों किया हमला

दूसरी तरफ हिंदुओं का पक्ष इस बात पर उग्र है कि मंदिर में तोड़फोड़ क्यों की गयी. इन लोगों की असली नाराज़गी की वजह मंदिर पर किया गया हमला है.

लाल कुआं रोड पर बना सालों पुराना दुर्गा मंदिर, गली के मुहाने पर ही स्थित है. इस गली का नाम भी ‘गली दुर्गा मंदिर’ है. इसी गली में यहां के ज़्यादातर हिंदू परिवार रहते हैं. मंदिर के पुजारी पंडित अनिल कुमार यहां 26 साल से पूजा पाठ करते आ रहे हैं. न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए अनिल कुमार कहते हैं, “रात 12 बजकर 25 मिनट पर अचानक से तेज़ शोर होने लगा. मैं अभी खाकर आराम ही कर रहा था. तभी गली में सैकड़ों की संख्या में उपद्रवी घुस आये. गंदी-गंदी गालियां देते हुए उन्होंने मंदिर पर पत्थर मारना शुरू कर दिया. मंदिर के शीशे तोड़ दिये. आग लगा दी. भगवान की मूर्ति बिखेर दी. वे यहीं नहीं रुके. आगे सौ मीटर लंबी गली है. जिसमें सारे घर हिंदुओं के हैं. उन्होंने गली में खड़ी गाड़ियों को भी तोड़ दिया.”

आप हंगामा करने वाले युवाओं को पहचानते हैं? इस सवाल के जवाब में अनिल कुमार कहते हैं, “डर का ऐसा माहौल बना कि हम कमरे से बाहर ही नहीं निकले. इस दौरान हमने चार दफ़ा सौ नंबर (पुलिस) को फोन किया लेकिन कोई भी मदद के लिए नहीं आया. थोड़ी देर में उपद्रवी शांत हो गये. पुलिस स्टेशन हौज़ क़ाज़ी यहां से महज आधे किलोमीटर की दूरी पर है. अगर वो लोग समय पर आ जाते तो मामला इस हद तक नहीं बिगड़ता.”

मंदिर के पुजारी से हमारी बातचीत के दौरान ही एक युवा हमारे बीच से गुज़रता है. उसके मुंह से शराब की गंध आ रही थी. इस रिपोर्ट के लिए साथ में मौजूद महिला सहकर्मी की तरफ देखते हुए वो बोला, “अब हिंदू चुप नहीं रहेगा. बदला लिया जायेगा. इनका (मुसलमानों का) मन काफी बढ़ गया है.”

हालांकि पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी पुजारी अनिल कुमार के आरोप से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते है. न्यूज़लॉन्ड्री को उन्होंने बताया, “कल रात से तो मैं खुद यहां मौजूद हूं. भीड़ ने जो कुछ भी किया वो पांच-दस मिनट में हुआ. तब तक पुलिस यहां पहुंच गयी थी. पुलिस के आने के बाद से सब कुछ कंट्रोल में हो गया था.”

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दुर्गा मंदिर गली में रहने वाले 35 वर्षीय मनोज सक्सेना की यहां किराने की दुकान है. मुस्लिम समुदाय से नाराज़ मनोज सक्सेना कहते हैं, “हमने डीसीपी साहब से कह दिया कि आप हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी लीजिये या फिर हम ये जिम्मेदारी खुद उठायेंगे. हम अपने घरों में बंदूक और दूसरे हथियार रखेंगे.”

रविवार की रात जो कुछ हुआ उसका ज़िक्र करते हुए मनोज बताते हैं, “दो लोगों के बीच हुई लड़ाई के बाद गली में घुसकर मंदिर को नुकसान पहुंचाने के पीछे क्या मकसद हो सकता है इनका. वे हमारे घरों पर, गाड़ियों पर ईंट मार रहे थे. दरअसल ये चाहते हैं कि यहां जो बचे-खुचे हिंदू हैं, वो भी अपना घर-बार बेचकर चले जायें. वैसे भी यहां 30-40 घर ही हिंदू बचे हैं. ये हमारे मन में डर भरना चाहते हैं.”

सोमवार को क्या हुआ

इस घटना के कुछ कथित वीडियो और इससे जुड़ी खबरें दक्षिणपंथी मीडिया में छपने के साथ ही यह मामला सोशल मीडिया में उछल गया. दिल्ली के अलग-अलग हिस्से से हिंदूवादी संगठन के लोग चावड़ी बाज़ार पहुंचने लगे. इनमें सनातन धर्म, विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल आदि शामिल हैं.

हमारी मुलाकात यहां हिंदू-मुस्लिम दोनों वर्ग के कुछ ऐसे युवाओं से हुई जो यहां के रहने वाले नहीं थे. पुलिस के रोकने के बावजूद ये लोग दोपहर से देर रात तक जय श्री राम और अल्लाहु-अकबर के नारे लगाकर मामले को बिगाड़ने की कोशिश करते रहे.

सोमवार की सुबह से ही यहां अलग-अलग जगहों से लोग पहुंचने लगे थे. ऐसे ही एक युवक उपेंद्र कुमार से हमारी मुलाकात हुई. उपेंद्र नव युवा बजरंगी संगठन नाम की एक अनजान सी संस्था से जुड़े हैं. इस संस्था के करीब 15 युवक चावड़ी बाजार पहुंचे थे. उपेंद्र कहते हैं, “जिसने भी मंदिर पर हमला किया है, उसे जल्द से जल्द गिरफ़्तार किया जाये तभी हम शांत होंगे. सनातन धर्म पर हमला हमारा संगठन बर्दाश्त नहीं करेगा.” हमारी उनसे बातचीत के दौरान उनके संगठन के लोग लगातार जय श्रीराम के नारे लगाते रहे. पुलिस के रोकने पर भी ये लोग शांत नहीं हुए. राजनीतिक दलों के लोगों की आमदरफ्त देखकर दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है.

विश्व हिंदु परिषद भी इस मामले में कूद पड़ा है. मंगलवार को विश्व हिंदु परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार के नेतृत्व में ‘ओल्ड डेल्ही रेजिडेंट ट्रेडर्स एंड रिलीजियस इंस्टिट्यूशन’ नामक संस्था के लोगों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की.

जब आमने सामने आ गये दोनों समुदाय के लोग

इस बीच सोमवार की शाम सात बजे के करीब दोनों मज़हब के लोग फिर से आमने आमने आ गये. दरअसल मंदिर पर हमला करने वालों को गिरफ़्तार करने के लिए डीसीपी (सेंट्रल) मनदीप रंधावा ने शाम छह बजे तक का वक़्त दिया था. सात बजे तक जब कोई गिरफ़्तारी नहीं हुई तो लोग खफ़ा होकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे.

मामले को बिगड़ते देख डीसीपी मनदीप रंधावा खुद वहां पहुंचे और लोगों को बताया, “सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की शिनाख्त की जा रही है. हमने कइयों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज़ किया है. अभी वो फरार हैं. लेकिन जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जायेगा. कोई भी आरोपी बचेगा नहीं.”

डीसीपी मनदीप रंधावा लोगों को समझा रहे थे. उनके साथ इलाके के कुछ मुस्लिम भी मौजूद थे. उनमें से एक मुस्लिम युवक ने कहा, “हम सब बिजनेस करते हैं. जितने दिनों तक ये सब चलेगा हम लोगों को ही नुकसान होगा. कोशिश करके इसे ख़त्म करना चाहिए.”

मुस्लिम समुदाय के युवा का यह कहना भारी पड़ गया. दूसरे पक्ष के लोग पुलिस के सामने ही उसे गालियां देने लगे. कुछ लड़के उसे मारने के लिए लपके. यह सब देख मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने भी हंगामा शुरू कर दिया. एक तरफ से जय श्रीराम के नारे लगने लगे, दूसरी तरफ से नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु-अकबर के. किसी तरह से पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत किया.

देर शाम तक इसी तरह दोनों तरफ से नारे उछलते रहे. पुलिस के हाथ-पैर फूले रहे, लेकिन वो पूरी तरह मुस्तैद दिखी.

कुछ युवाओं ने जगायी उम्मीद

जिस वक़्त दोनों पक्ष के कुछ युवा धार्मिक नारेबाजी कर रहे थे, उसी दौरान कुछ युवाओं ने शांति की पहल की. पुलिस बैरिकेट के पास कुछ युवक शांति की मांग के साथ धरने पर बैठ गये. उनके हाथों में मज़हबी तनाव को ख़त्म करने वाली तख़्तियां थी. यहां मौजूद एक युवक ज़ुबेर, जिसके हाथ में ‘नफऱत का धंधा बंद करो, हमारे पड़ोसी हमारे भाई हैं’ लिखी हुई तख़्ती थी, ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि जो कुछ हो रहा है उसमें बाहर से आये लोग शामिल हैं. बाहर से आये लोग आज आग लगाकर चले जायेंगे, लेकिन हमें यहीं रहना है. मामला अगर और बिगड़ता है तो हम लोगों के दरम्यान एक खाई बन जायेगी. हम शांति की अपील करते हैं.”

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क्या कहती है पुलिस

इस मामले की शुरुआत जिन दो लोगों के बीच लड़ाई से हुई उन्हें पुलिस ने सोमवार को छोड़ दिया था. एक-दूसरे पर मारपीट की धाराओं के तहत मामला दर्ज़ हुआ था. जिसमें ज़मानत लेने की ज़रूरत नहीं होती है. आस मोहम्मद और संजीव गुप्ता दोनों अपने घर पर मौजूद नहीं थे. यहां लोग आस मोहम्मद के घर का पता तक नहीं बताते, लेकिन संजीव गुप्ता का घर तो सड़क किनारे ही मौजूद है. उनके घर जब हम पहुंचे तो वहां ताला लगा हुआ था.

सोमवार शाम दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी (क्राइम) संदीप गोयल भी यहां जायज़ा लेने पहुंचे. न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में उन्होंने कहा, “स्थिति अब सामान्य है, लेकिन अभी पुलिस बल को यहां से हटाया नहीं जायेगा.”

चावड़ी बाजार में हुए इस विवाद पर नियंत्रण की जिम्मेदारी डीसीपी मनदीप रंधावा पर है. रंधवा न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत करते हुए बताते हैं, “स्थिति अब सामान्य है. बाहर से आये लोग धीरे-धीरे यहां से जा रहे हैं. बहुत जल्द स्थिति बिल्कुल सामान्य हो जायेगी.”

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डीसीपी मनदीप रंधावा मंदिर पर हुए हमले में जिन लोगों पर एफआईआर हुई है उनकी जानकारी देने से इनकार करते हैं. वो कहते हैं, “मामला बेहद संवेदनशील है, इसीलिए अभी हम एफआईआर की कॉपी किसी को भी नहीं दे सकते हैं.”

न मिटने वाला दाग

एक दौर था जब इस इलाके में साल में दो से तीन महीने कर्फ्यू ही लगा रहता था. 65 वर्षीय सिद्दीकी बताते हैं, “साल 1992 से पहले इस इलाके में आये दिन कर्फ्यू लगा रहता था. 1992 में यहां बलजीत सिंह नाम के डीसीपी आये. उनकी सख्ती की वजह से यहां बलवाइयों के हौसले टूटे और हालात सामान्य हुए. हमें डर है कि इस घटना की वजह से लाल कुआं फिर उसी दौर में जीने को मजबूर न हो जाये. जो भी हुआ, वो एक न मिटने वाला दाग है.”

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