आरएसएस के सदस्यों ने नितिन गडकरी के ऊपर आरोप लगाया कि उन्होंने कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन अवैध तरीके से ट्रांसफर करके उस पर करोड़ों का लोन अपने बेटों की कंपनी को दिलाया.
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर उनके ही मूल संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया है. आरोप है कि नितिन गडकरी ने अपने बच्चों को 42.83 करोड़ का लोन दिलवाने के लिए नागपुर स्थित सहकारी समिति (जिसके वह स्वयं प्रोमोटर थे) की जमीन गिरवी रखी और उन्होंने संस्था के सदस्यों को इसके बारे में जानकारी तक नहीं दी.
यह जमीन पोलिसेक औद्योगिक सहकारी समिति (पीसीएसएल) की है, जिसे कथित तौर पर धांधली के जरिए जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड नामक कंपनी के लिए अधिगृहीत किया गया. यह कंपनी नितिन गडकरी के दोनों पुत्र निखिल और सारंग गडकरी के मालिकाने में हैं. यह आरोप तब सामने आए जब आरएसएस के सदस्य घनश्याम दास राठी, जो कि पीसीएसएल के शेयरहोल्डर भी हैं, ने पाया कि सहकारी समिति की जमीन पूर्ति सोलर सिस्टम लिमिटेड ने ले ली है. राठी को इस बात की जानकारी तब मिली जब वे महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) के नागपुर कार्यालय गए. पूर्ति सोलर सिस्टम लिमिटेड किशोर टोटड़े की कंपनी है जो कि नितिन गडकरी के साले हैं.
आगे की जांच में खुलासा हुआ कि पीसीएसएल की जमीन, सारस्वत बैंक में गिरवी रख दी गई है, जिससे जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड को इसके आधार पर कई करोड़ का लोन मिला.
थोड़ा पीछे चलते हैं: गडकरी और उनके रिश्तेदारों ने सबसे पहले कथित तौर पर पीसीएसएल की ज़मीन, जिसके वह सदस्य थे, को पूर्ति सोलर सिस्टम लिमिटेड (जो उनके संबंधियों से जुड़ी एक कंपनी है) को हस्तांतरित की. जिसके बारे में न तो पीसीएसएल के शेयरधारकों को जानकारी दी गयी और न ही उनसे जरूरी सहमति ली गई. इसके बाद गडकरी और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर जमीन को गिरवी रखकर 42.83 करोड़ का लोन, जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड के लिए लिया. इसके निदेशक पद पर नितिन गडकरी के दोनों बेटे हैं.

यह पहली बार नहीं है, जब गडकरी का नाम किसी संदिग्ध समझौते में ऊपर आया हो. 2015 में, कैग की रिपोर्ट ने राज्य संचालित इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड ने अवैध तरीके से 48.65 करोड़ रुपये का लोन पूर्ति शक्कर कारख़ाना लिमिटेड को दिया. गडकरी इस कंपनी के प्रोमोटर और निर्देशक थे.
न्यूज़लॉन्ड्री को मिले दस्तावेज़ों के अनुसार, पीसीएसएल एक सहकारी संस्था थी, जिसकी स्थापना पीवीसी पाइप्स के निर्माण के लिए हुआ था. इसका रजिस्ट्रेशन साल 1988 में, महाराष्ट्र सहकारी समिति एक्ट, 1960 के अंतर्गत हुआ था. इसका उद्घाटन वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने किया था. पीसीएसएल को भूमि का आवंटन गडकरी के प्रोमोटरशिप में हुआ, जिसका प्रीमियम 99,000 रुपये भरा गया और आवंटित भूमि का 1 रुपये सालाना किराया रखा गया.
आवंटित भूमि प्लॉट न. 17, हिंगना एमआईडीसी नागपुर में थी, जिसकी माप 4950 वर्ग मीटर था. पीसीएसएल को महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी 24.77 लाख रुपये दिये गए. यही वह ज़मीन है जो कि गडकरी और उनके रिशतेदारों ने कथित तौर पर अधिगृहीत की, जिसे बाद में जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड के लिए लोन लिया गया. हालांकि पीसीएसएल ने अपना काम 2003 तक जारी रखा, और उसके बाद इसने किसी भी तरह की जनरल बॉडी मीटिंग अपने सदस्यों की नहीं बुलाई, ना ही इसके सदस्यों को भूमि हस्तांतरण के बारे में जानकारी दी.

घनश्याम दास राठी, एक निष्ठावान स्वयंसेवक और पीसीएसएल के पहले सदस्य जिन्हें इस कथित धोखाधड़ी के बारे में पता चला. वह कहते हैं, “गडकरी और उनके रिश्तेदारों ने 1330 शेयरधारकों के साथ धोखा किया. बिना उन्हें (शेयरधारकों) सूचित किए, उन्होंने समिति की जमीन को पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित कर दी, जिसके निर्देशक किशोर टोटड़े (नितिन गडकरी के साले) हैं. पूर्ति सोलर सिस्टम को जमीन हस्तांतरित करने के बाद, उन्होंने यह उल्लेख किया कि जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड इसकी ही एक शाखा है. और फिर इस प्लॉट को गिरवी रखकर 43 करोड़ का लोन इसके लिए लिया गया.”
राठी ने आगे बताया कि सहकारी समिति के रजिस्ट्रार को इस भूमि हस्तांतरण के मामले में अंधेरे में रखा गया. “उन लोगों ने न केवल सोसाइटी के सदस्यों को अंधेरे में रखा बल्कि रजिस्ट्रार को भी इस बारे में नहीं बताया. उन्होंने रजिस्ट्रार से जमीन के खरीद या हस्तांतरण के बारे में कोई आज्ञा नहीं ली. यहां तक कि सहकारी विभाग को भी जमीन गिरवी रखने की कोई जानकारी नहीं थी. राठी के दावे का आधार एक आरटीआई से मिला जवाब है. 8 मार्च, 2017 को जिला सहकारी समिति उपरजिस्ट्रार, नागपुर के कार्यालय से यह जवाब आया है.
आरटीआई जवाब में लिखा गया है- “न तो सहकारी विभाग को इस प्लॉट के, जो पीसीएसएल से पूर्ति सोलर सिस्टम को हस्तांतरण किया गया, के बारे में जानकारी है और न ही इस बारे में यहां से कोई संस्तुति ली गयी है.” इसमें आगे लिखा है कि सहकारी विभाग के इस प्लॉट को सारस्वत बैंक के पास गिरवी रख कर 42.83 करोड़ रुपये लोन लिया गया, जो कि जीएमटी माइनिंग एवं पावर प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया गया. इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है. आगे यह भी लिखा है कि पीसीएसएल की फ़ैक्ट्री मार्च 2013 से बंद पड़ी है. और तब से पीसीएसएल की कोई भी सालाना रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है.

पीसीएसएल के एक और शेयरधारक अजय महाजन कहते हैं- “यह गडकरी और उनके रिश्तेदारों की उनकी कंपनी की खरीददारी बढ़ाने की योजनाबद्ध साजिश है. गडकरी, उनके दोनों बेटे और टोटड़े ने मिलकर पहले से ही ज़मीन हथियाने की योजना बनाई थी. उनके इरादे इस बात से ही पता चल जाते हैं कि 2011 में उन्होंने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें हिंगना के एक प्लॉट को गिरवी रखने का उल्लेख किया गया. हालांकि पीसीएसएल के मलिकाने वाली जमीन को पूर्ति सोलर को हस्तांतरण करने का पहला आवेदन एमआईडीसी के ऑफिस में 2012 में दिया गया था. जिसका मतलब है कि उन्होंने ज़मीन ट्रान्सफर होने से पहले ही फसे गिरवी रख दिया.”
महाजन ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि सितंबर 2016 में, शेयरधारकों ने इस डील की जानकारी के लिए आरटीआई के जरिये पहली बार सवाल किए. महाजन कहते हैं कि सहकारी विभाग में से किसी ने राजेश बागड़ी (पीसीएसएल के सचिव) को इस आरटीआई के बारे में जानकारी दी. तब बागड़ी ने कथित तौर पर पिछली तारीख की एक ऑडिट रिपोर्ट तैयार की, जिसमें पूर्ति सोलार सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को बेची ज़मीन को सही ठहराया जा सके. पिछली तारीख में बनाई गयी ऑडिट रिपोर्ट को सामान्य दिखाने के लिए, डिप्टी रजिस्ट्रार के ऑफिस में अंदर-बाहर आने-जाने के रजिस्टर से भी छेड़छाड़ की गयी.
राठी और महाजन, दोनों ने गडकरी और उनके बेटों के खिलाफ़ नागपुर जिला न्यायालय में इसी साल अगस्त में एक आपराधिक मुकदमा दायर किया है. साथ ही अपील कि है कि तीनों के खिलाफ़ इस मामले में प्राथमिकी दर्ज़ की जाए.
न्यूज़लॉन्ड्री के पास मौजूद दस्तावेज़ों से साफ होता है कि साल 2011 में पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड ने एक प्रस्ताव पास किया. इसमें जिक्र है कि बताए गए हिंगना प्लॉट को सारस्वत बैंक में गिरवी रखा जाय ताकि जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड के लिए लोन उठाया जा सके. जबकि पीसीएसएल की हिंगना वाली जमीन को ट्रान्सफर करने का पहला आवेदन ही 7 मई, 2012 में एमआईडीसी नागपुर के क्षेत्रीय कार्यालय में दिया गया. यह आवेदन पीसीएसएल के सचिव राजेश बागड़ी ने और किशोर टोटड़े (निर्देशक, पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड) ने दिया था. निगम ने जमीन ट्रान्सफर करने की अनुमति 22 जून, 2012 में दे दी.
18 अक्टूबर, 2011 को पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के लेटरहेड पर जारी एक दस्तावेज के मुताबिक उपरोक्त प्रस्ताव बोर्ड ऑफ डायरेक्टेर्स ने मान्यता दी. इस पर कंपनी के एक निदेशक सागर कोतवालीवाले का दस्तखत है. पत्र कहता है, “इस बात की सहमति दी जाती है कि कंपनी की अचल संपत्ति जो कि हिंगना रोड, नागपुर पर स्थित है, उसे बतौर गिरवी, सारस्वत कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड जो कि जीएमटी माइनिंग एवं पॉवर प्राइवेट लिमिटेड का बैंकर है, के पास रख दिया जाय. बदले में फंड लोन लिया जाय. सैंक्शन लेटर नंबर SCB/20-VI/11-12/AVP/23 dated 28.08.2011 and SCB /20-VI/11-12/AVP/34 तारीख 10.10.2011.”

ज़मीन तो ट्रान्सफर हो गई लेकिन यह उस उद्देश्य की ख़ातिर उपयोग में नहीं लाई गई जिसके लिए इसका ट्रान्सफर किया गया था. एमआईडीसी ने पीसीएसएल को लिखे अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि “निगम ने आपके अनुरोध की जांच की है और निर्णय लिया है कि यह ज़मीन पूर्ति सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को उनकी ईकाई लगाने के लिए ट्रान्सफर की जाएगी, जिसमें सोलर पैनल, सोलर पम्प और एलईडी लाइट्स का निर्माण होगा.”
हालांकि जमीन कभी भी सोलर पैनल और एलईडी लाइट्स के उत्पादन ईकाई के लिए उपयोग नहीं की गयी. बल्कि इसे इसे गिरवी रख कर जीएमटी माइनिंग एवं पावर लिमिटेड, जो कि बायोमास उद्यम है, के लिए 42.83 करोड़ रुपये का लोन लिया गया. ताकि यह अपना 10 मेगावाट का पावर प्लांट नागपुर में कुही तालुका के सावरखांडा गांव में लगा सके.
जीएमटी माइनिंग एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को अपने प्रोजेक्ट में देरी की वजह से 31 मार्च, 2015 (महाराष्ट्र सरकार) के समाप्त होने वाले साल के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर भारत के कैग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया था. रिपोर्ट में लिखा था कि “…पाया गया है कि प्रावधान के विपरीत, महाराष्ट्र ऊर्जा विकास एजेन्सी ने 9.54 करोड़ (5 लाख प्रति मेगावाट की दर से) का प्रतिबद्धता शुल्क नहीं वसूला है, जिसमें 103 में से 13 (जीएमटी माइनिंग एवं पावर भी शामिल) बायोमास से, जिन्हें एमईडीए से आईसीसी शुल्क देने के बाद कमीशन किया गया था. दो गैर-बैगज प्रोजेक्ट्स में से, जीएमटी माइनिंग एवं पावर का यह प्रोजेक्ट 19 महीने की देरी से था और प्रतिबद्धता नियम के अनुसार इसे एमईडीए के द्वारा जब्त किया जाना चाहिए था.” दस्तावेज़ में उल्लेख है कि जमीन को एक साल एडवांस में गिरवी रखा गया था, जिसकी इज़ाजत एमआईडीसी से नहीं ली गयी. जिससे यही ज़ाहिर होता है कि पीसीएसएल, पूर्ति सोलर और जीएमटी माइनिंग के निर्देशक, प्रोमोटर्स के इरादे धोखाधड़ी के थे, ताकि जमीन को अधिग्रहित कर 42.83 करोड़ का लोन लिया जा सके. पीसीएसएल और पूर्ति सोलर ने ठीक उसी दिन एमआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय में जमीन ट्रान्सफर करने का आवेदन किया. राठी कहते हैं- ऐसा लगता कि सबकुछ पहले से योजनाबद्ध था. दिसंबर 2017 में, राठी ने एक शिकायत पुलिस डिप्टी कमिशनर ( आर्थिक अपराध शाखा), नागपुर पुलिस में दर्ज़ कराई. उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी दर्ज़ किया कि पीसीएसएल के मामले में एक जांच कराई जाये. पुलिस डिप्टी कमिश्नर (आर्थिक अपराध शाखा), ने इस आवेदन को जिला उप रजिस्ट्रार को इस मामले में सही कदम उठाने के लिए भेज दिया है. अनिल लंबड़े, पीसीएसएल के एक और शेयरहोल्डर कहते हैं कि गडकरी और उनके सहयोगियों ने 2003 के बाद कोई भी सालाना जनरल मीटिंग नहीं की और इसके सदस्यों से बिना इज़ाजत लिए ज़मीन को अपने आर्थिक फायदे के लिए ट्रान्सफर कर लिया. उन्होंने आगे कहा कि मैंने सहकारी विभाग के उप रजिस्ट्रार को इस बारे में शिकायत की है. मुझे पता है कि गडकरी एक शक्तिसंपन्न आदमी हैं लेकिन हम उन्हें उनके इस धोखाधड़ी के लिए नहीं छोड़ेंगे.
न्यूज़लॉन्ड्री ने जब पीसीएसएल के सचिव राजेश बागड़ी से इन आरोपों के बारे में बात की, जो कि शेयरधारकों ने लगाए हैं, मसलन जमीन हस्तांतरण के मामले में सहकारी विभाग से इज़ाजत नहीं ली गयी. राजेश बागड़ी ने कहा, “हमने एजीएम में हर किसी से इज़ाजत ली है और तब हमने जमीन का हस्तांतरण किया. पूर्ति सोलर ने इसके साथ क्या किया? यह मेरे सोचने का विषय नहीं है. और हमने सहकारी विभाग की भी इज़ाजत ली है. हालांकि तब से वहां कई लोग बदलते रहे, जिस कारण उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं हैं.”
यह 15 जून, 2018 तारीख़ के आरटीआई जवाब के बिलकुल उलट है. जिसमें सहकारी विभाग के उप रजिस्ट्रार के दस्तख़त हैं और शेयरधारक राठी के नाम है. आरटीआई जवाब कहता है कि सोसाइटी ने जमीन बेचने या ट्रान्सफर करने के संबंध में कोई भी इज़ाजत नहीं दी है और न ही इस मामले से जुड़ा कोई आवेदन उन्हें मिला है.
2016 की एक ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख है कि यह ज़मीन, जो पीसीएसएल के मालिकाने में है, पूर्ति सोलर सिस्टम को बाज़ार भाव के मुक़ाबले काफी कम दाम पर बेचा गया. इस प्लॉट का बाज़ार भाव 2,26,38,000 रुपये था, वहीं जारी टेंडर में इसे 73,74,000 रुपये में दिखाया गया.
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस मसले पर नितिन गडकरी के ऑफिस में फोन कर उनका पक्ष जाने की कोशिश की. उनका जवाब था- “हम इस बारे में कोई भी बयान नहीं दे सकते, पोलिसेक सहकारी समिति इस पर बात कर सकती है. यह राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला है.”
न्यूज़लॉन्ड्री ने पूर्ति सोलर एक डाइरेक्टर सागर कोतवालीवाले और निखिल एवं सारंग गडकरी से भी संपर्क किया लेकिन सबने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया.
न्यूज़लॉन्ड्री ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से भी संपर्क करने की कोशिश की, जो इस सहकारी समिति के सदस्य भी हैं. पर वो कुछ भी कहने के लिए उपलब्ध नहीं हो सके.
हालांकि, आशीष फड़नवीस जो कि देवेंद्र फड़नवीस के भाई और पीसीएसएल के सदस्य हैं, ने कहा, “हमें जमीन के हस्तांतरण के बारे में जानकारी थी लेकिन हम इसके कानूनी मामलों के बारे में अंजान हैं, जैसे सोसाइटी की इज़ाजत लेना. यह सब कानून की महत्वपूर्ण चीजें हैं और जैसे-जैसे लोग इसकी गहराई में जा रहे हैं, वैसे-वैसे नई चीजें बाहर आ रही हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वहां कोई ऐसा मामला है.