हिंदी पॉडकास्ट जहां हम हफ्तेभर के बवालों और सवालों पर चर्चा करते हैं.
एनएल चर्चा के इस अंक में मुख्य रूप से यूरोप से लेकर दुनिया भर में पनप रहे सामाजिक व राजनीतिक असंतोष और विरोध प्रदर्शन, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे और उद्योगपतियों से उनकी मुलाकातों, कुख्यात जेफरी एपस्टीन के साथ केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की तस्वीर सामने आने पर खड़ा हुआ राजनीतिक विवाद और दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-1) पर विस्तार से चर्चा की गई.
वहीं, कांग्रेस द्वारा उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16,000 नाम हटाने की धांधली के आरोपों के बाद चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों पर एक्शन, सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहा होने के बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का समन, अर्थशास्त्री प्रभाकर, प्रकाश राज और नेहा बोरा का 23 अक्टूबर को देशव्यापी एंटी-एसआईआर प्रदर्शनों में शामिल होना, और मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी और इसके अलावा मणिपुर में ताजा हिंसा में तीन लोगों की मौत और मुख्यमंत्री आवास के बाहर शव छोड़े जाने की घटना, उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसों में शुक्रवार की छुट्टी खत्म करने का फैसला, बीकानेर हाउस से प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की विरोध प्रदर्शन वाली तस्वीरों को हटाना, सिंगर दिलजीत दोसांझ के दिल्ली कॉन्सर्ट को पुलिस द्वारा अनुमति न देना, बिहार में म्यांमार के रास्ते तस्करी कर लाए जा रहे 'कोटा' ड्रग्स का बढ़ता जाल, सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट पर हमले में एक भारतीय की मौत, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूक्रेन व पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को समर्थन देने का बयान आदि ख़बरें भी हफ्ते भर चर्चा में रहीं.
इस हफ्ते चर्चा में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता शाहरुख आलम, वरिष्ठ पत्रकार मीतू जैन और न्यूज़लॉन्ड्री टीम से वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी और विकास जांगड़ा ने हिस्सा लिया. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “यह जो सीजेपी की बेल की प्रक्रिया हमने देखी, सौरव दास और आशुतोष रांका की बेल और बांड को लेकर जो देरी हुई क्या यह ऐसा मामला था, संगीन मामला था जिसमें इतनी देरी की ज़रूरत थी और दिल्ली पुलिस की जो भूमिका रही दो बार एक्सटेंशन मांगा गया यह कितना ज़रूरी था?”
इस सवाल के जवाब में शाहरुख़ कहती हैं, “पर्सनल बांड मांग क्यों रहे हैं और सवाल यह भी है कि भारतीय लोकतंत्र में यह कब हुआ की विरोध करना लॉ एंड आर्डर की समस्या बन गई? मेरे नज़दीक विरोध प्रदर्शन राजनीतिक समस्या है, यह मूलभूत अधिकारों का मुद्दा है. इसको आप लॉ एंड आर्डर का प्रॉब्लम कब से मानने लगे? 2012 में जब रामलीला मैदान वाला मामला सुप्रीम कोर्ट गया तब यह लॉ एंड आर्डर का प्रॉब्लम नहीं माना गया था.”
सुनिए पूरी चर्चा -
टाइमकोड्स:
00:00 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना
5:56 - सुर्खियां
07:45 - विरोध लोकतांत्रिक अधिकार
53:48 - सब्सक्राइबर्स के पत्र
01:05:37 - दिल्ली में GRAP-1
01:25:33 - सलाह और सुझाव
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पत्रकारों की राय-क्या देखा, पढ़ा और सुना जाए
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किताब - अवर काइंड ऑफ़ गेम्स
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डॉक्यूमेंट्री - हिटलर
लेख - प्रसार भारती इज़ नॉट अ पब्लिक ब्रॉडकास्टर
अतुल चौरसिया
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ट्रांसक्रिप्शन: तस्नीम फातिमा
प्रोडक्शन : हसन बिलाल
संपादन: हसन बिलाल
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