दिल्ली की सड़कों पर आज पुलिस पूरी तरह धरपकड़ के मूड में नजर आई. प्रदर्शनकारियों से लेकर पत्रकारों तक सबको एक सिरे से उठाया गया.
दिल्ली की सड़कों पर आज पुलिस पूरी तरह धरपकड़ के मूड में नजर आई. प्रदर्शनकारियों से लेकर पत्रकारों तक सबको एक सिरे से उठाया गया. साथ ही रिपोर्टिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले फोन जब्त किए गए. इस तरह आज का दिन बड़े पैमाने पर हिरासत की कार्रवाई के नाम रहा.
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग और चुनाव आयोग की ओर से जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में होने वाले प्रदर्शन से पहले जंतर-मंतर तक पहुंचने के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था. दिल्ली आ रहे लोगों ने ट्रेनों में हिरासत में लिए जाने की बात कही, वहीं बसों के रास्ते बदले गए और छात्रों को प्रदर्शन में शामिल न होने की चेतावनी दिए जाने की खबरें भी सामने आईं.
मौके पर रिपोर्टिंग कर रहे न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया और उनके काम के लिए इस्तेमाल होने वाले फोन जब्त कर लिए गए. घंटों बाद उन्हें रिहा किया गया, लेकिन इस अपडेट के समय तक दूसरे पत्रकार और यूट्यूबर्स हिरासत में थे.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि अगर आप प्रदर्शन स्थल तक पहुंच ही नहीं सकते, तो विरोध करने के अधिकार का क्या मतलब रह जाता है? और जब पत्रकारों को भी हिरासत में लेकर बसों में बैठा दिया जाए, तो वे आपको वहां की स्थिति कैसे दिखाएंगे?
राजधानी में पुलिस की व्यापक कार्रवाई के दिन की हमारी ग्राउंड रिपोर्ट्स देखिए.
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