इन 16 कंपनियों पर सवा लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया था. लेकिन सिर्फ 33 हजार करोड़ रुपये के बदले अडाणी समूह को ये कंपनियां मिल गई. तो क्या अडाणी ग्रुप ने ऐसा करने के लिए कोई कानून तोड़ा?
किसी कंपनी का दिवाला निकल जाए और वो अपना कर्ज़ न चुका पाए तो क्या होगा? तो जाहिर सी बात है कि कंपनी को बेचने की प्रक्रिया शुरू होगी. जिसे दिवालिया अदालत मंजूरी देगी. और आखिरकार कंपनी का सौदा पूरा हो जाएगा.
भारत में इस दिवालिया अदालत को एनसीएलटी यानि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के नाम से जानते हैं.
मेरी साथी आस्था सब्यसाची ने पाया कि साल 2018 से अब तक अडाणी ग्रुप ने करीब 26 कंपनियों को खरीदने के लिए बोली लगाई और इनमें से 16 उन्होंने हासिल कर ली. इन 16 कंपनियों पर सवा लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया था. लेकिन सिर्फ 33 हजार करोड़ रुपये के बदले अडाणी समूह को ये कंपनियां मिल गई. तो क्या अडाणी ग्रुप ने ऐसा करने के लिए कोई कानून तोड़ा?
जवाब है नहीं. लेकिन इस मामले की तह में थोड़ा और घुसने पर कई ऐसी चीजें सामने आती हैं जो नियम और प्रक्रियाओं की अनदेखी की ओर इशारा करती हैं.
मेरी साथी आस्था सव्यासाची की यह रिपोर्ट ऐसे ही 26 मामलों की पड़ताल करती है.
देखिए यह वीडियो.
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