दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव से पहले कैंपस में पोस्टर्स और काफिलों के जरिए प्रचार की हलचल तेज है. सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक चुनावी रंग नजर आ रहा है. कहीं उम्मीदवार काफिलों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कहीं गानों और नारों के जरिए वोट मांगे जा रहे हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय में चुनाव से पहले का माहौल कैसा है और छात्रों के असल चुनावी मुद्दे क्या हैं?
दिल्ली विश्वविद्यालय में इन दिनों छात्रसंघ चुनावों की सरगर्मी बढ़ी हुई है. कैंपस के किसी न किसी हिस्से में आप संगठनों और उनके उम्मीदवारों को छात्रों से वादे करते और वोट मांगते नजर आ जाएंगे.
हालांकि, इस बार का चुनाव कुछ मायनों में अलग है. इस बार चुनाव से ठीक पहले दिल्ली में जंतर मंतर पर नीट के छात्रों का प्रदर्शन देखने को मिला. जिसकी परिणती शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के रूप में हुई. ऐसे में चुनाव से पहले विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच क्या माहौल है, इसे जानने के लिए हमने दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा किया.
कैंपस में हर तरफ उम्मीदवारों के नाम वाले पोस्टर और पर्चे नजर आए. ‘मनी और मसल पावर’ के लिए पहचाने जाने वाले कुछ छात्र संगठन अपने समर्थकों के साथ गाड़ियों के काफिले में रैली करते दिखे तो कुछ छात्र गाने गाकर अपने मुद्दों के लिए वोट मांगते नजर आए.
हर संगठन और उम्मीदवार के प्रचार का अपना तरीका था. विश्वविद्यालय की दीवारों से लेकर सड़कों तक, हर तरफ किसी न किसी उम्मीदवार के नाम के पोस्टर और पर्चे दिखाई दे रहे थे. तो इस बार दिल्ली विश्वविद्यालय में चुनावी माहौल कैसा है? छात्रों के मुद्दे क्या हैं और प्रचार का रंग कितना बदला है?
देखिए दिल्ली विश्वविद्यालय से हमारी ये रिपोर्ट.
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