शिव के कांवड़ यात्री हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घरों को लौटते हैं और शिवरात्रि के दिन नजदीकी मंदिरों में जल अर्पित करते हैं.
सावन का महीना यानि भगवान शिव के भक्तों के लिए अपने आस्था के सफर पर निकलने का मौका. शिव के कांवड़ यात्री हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने घरों को लौटते हैं और शिवरात्रि के दिन नजदीकी मंदिरों में जल अर्पित करते हैं.
इसी अर्पण के साथ उनका यह कई दिनों का सफर समाप्त होता है. बीते सालों में इस सफर पर महिलाएं भी पुरुषों के बराबर कंधा मिलाने लगी हैं. लेकिन इस दौरान उन्हें किस तरह की दिक्कतें पेश आती हैं और क्या चीज उनका हौसला बनाए रखती है, यही जानने के लिए हमने महिला कांवड़ यात्रियों से बात की.
इस दौरान महिलाओं ने अपने सफर और उसके दौरान आने वाली मुश्किलों के बारे खुलकर बात की. कांवड़ यात्री कीर्ति ने बताया कि वह अपने पति और सात महीने के बच्चे के साथ इतनी लंबी यात्रा कैसे तय कर रही हैं. वहीं, खुशबू ने अपने खेल के प्रति प्रेम और उससे जुड़ी चुनौतियों के बारे में भी हमसे बात की.
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
कांवड़ का कहर: 12 होटल- सवा तीन करोड़ का घाटा
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